हैलो दोस्तो आपको आपकी नई दोस्त मालती का प्यार भरा नमस्कार कबूल करे मैंने बहुत सारी maa bete ki hindi sex story पढ़ी हुई है जिन्हें पढ़कर मेरे मन में आया क्यों ना मैं भी अपनी hindi sex story mom आप सब लोगों के सामने रखूं
Maa Bete Ki Hindi Sex Story
पहले तो मैं डरती रही के अपनी maa beta sex story आप लोगों तक कैसे पहुंचाऊं फिर मैंने अपनी कहानी टाइप करके chudai kahani com के ही एडमिन को भेज दी सो अब मैं अपनी hindi sex story mom शुरू करती हूं
मैं सबसे पहले अपने बारे में बता दूं मेरा नाम मालती है मेरी उम्र 36 साल है और मैं अपने पति राजेश और 18 साल के बेटे राघव के साथ वड़ोदरा की एक मशहूर सोसाईटी में रहती हूं
मैं एक हाउसवाइफ हूं और मेरे पति राजेश अरोड़ा 40 साल के है और वो एक टूरिस्ट विभाग में काम करते है जबके मेरा बेटा राघव अभी 11वीं में पढ़ रहा है यह कहानी मेरे और मेरे बेटे के पहले सेक्स के बारे में है हुआ यूं के मेरा बेटा और मेरे पति बहुत ही फ्रेंडली स्वभाव के है
मतलब के वो बाप बेटा कम और दोस्त ज्यादा है सुबह काम और स्कूल जाने से पहले और आने के बाद दोनों मोरनिंग इवनिंग वॉक पे जाते है सच कहूं तो मेरे पति काफी दोस्ताना स्वभाव के मालिक है दोनों में काफी बनती है
अक्सर ही वो लड़कियो मोहल्ले की औरतो की बाते करते रहते है मेरे पति तो यहां तक सेक्स के मामले में खुले विचारो वाले है के अपनी ही कज़न सिस्टर के बारे में उसकी गांड चूची की बात करते रहते है
हमारे किचन और बेटे के स्टडी रूम में एक दीवार का फासला है एक दिन पति ने नोट किया के मेरा बेटा किचन में खाना बनाते वक़्त मेरी गांड को निहार रहा है जब उसने पूछा के राघव क्या देख रहे हो तो वो डर गया और रोने लग गया और उनसे माफी मांगने लगा
राजेश ने उसे कुछ नही कहा और मुझे अलग कमरे में लिजाकर बताया के मैंने कई दिनों से नोट किया है के जब तुम कोई काम करती हुई झुकती हो तो ये तुम्हारी चूचियां गांड देखकर अपनी आंखे गर्म करता है
राजेश की बात सुनकर मुझे बहुत गुस्सा आया और जैसे ही मैं बेटे को डांटने उसके कमरे में आने लगी तो राजेश ने मुझे ये कहते हुए समझाकर शांत करवाया के बच्चा है जवानी की दहलीज़ पे नया नया उतरा है अक्सर ही बच्चों से गलती हो जाती है तुम उसे कुछ ना कहना मैं उसे खुद समझाऊंगा
अगले दिन से जब दोनों बाहर सुबह की सैर पे गए वापिस आये तो राजेश ने बताया के मालती राघव का तुम्हारे प्रति नज़रिया बदल गया है वो तुम में मां कम और अपनी पत्नी ज्यादा देखता है अब क्या करे? मां होने के नाते मेरा एक दिल तो करे के इसकी जमकर पिटाई करूं लेकिन पति के रोकने पे रुक गई
थोड़े दिन बाद सब सामान्य हो गया एक दिन हम स्कूल की छुट्टियों में शिमला घूमने गए वहां करीब एक हफ्ता होटल में रहे वहां भी मैंने नोट किया के राघव का ध्यान वहां पे रुकी लड़कियों की चूची और गांड पे ही है
मेरी इस तरह से देखने से राजेश भी मुझे देखकर हंस दिया और बोला अब बोलो यह आपके साथ ही नही बल्कि हर उस लड़की के साथ सम्भोग के सपने संजोता है जो इसके मन को भाती है थोड़े दिन बाद हम घर आ गए अब तो बाप बेटे में इतना खुलापन आ गया था के वो डायरेक्ट ही चूत लण्ड की बाते करने लगे थे
मैंने राजेश को भी डांट दिया के तुम ही इसे सिरे चढ़ा रहे हो कल को कोई बात हो गई ना मुझे दोष मत देना इसपे राजेश ने कहा डिअर पतनी साहिबा बेटा बड़ा हो रहा है उसको सही गलत की पहचान नही है मैं उसे पिता होने के नाते एक दोस्त बनकर उसके दिल में जो भी है बाहर निकाल रहा हूं
क्योंकि यदि मैं एक पिता बनके ये सब उस से पूछूंगा तो शायद ही कभी मेरी किसी बात का जवाब वो देगा जबके एक दोस्त बनकर मैं उसकी हर एक अच्छी बुरी बात जान गया हूं एक दिन सफाई के दौरान उन दोनों की बातचीत मैं एक पेपर पे लिखी देखकर हैरान रह गई जिसमे उसके पिता कुछ जवाब पूछ रहे थे
राजेश- राघव क्या तुम्हे तुम्हारी मां अच्छी लगती है?
राघव- हां बहुत ज्यादा
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राजेश- मां के शरीर का कोनसा पार्ट अच्छा लगता है?
राघव- मां की बड़ी गांड और चूचियां
राजेश- अकेले में मां के साथ रहना चाहोगे?
राघव- हां मैं एक पति बनकर उसकी केअर करना चाहता हूं
राजेश- यदि मां तुमसे संबंध ना बनाये तो?
राघव- तो भी मैं अपनी मां को ही चोदना चाहूंगा प्यार से ना तो जबरदस्ती ही सही
राजेश- मां यदि बुरा मान गई तो?
राघव- मुझे कोई फर्क नही पड़ता मुझे तो बस अपना गरम लावा उसकी चूत में भरना है बस
ऐसी बाते पढ़कर मेरे तन बदन में गुस्से से आग लग गई सोचा आने दो इन दोनों को आज ही क्लास लगाती हूं शाम को जब दोनों खाने की टेबल पे इक्कठे हुए तो मैंने उन दोनों को डांट दिया और उनसे आगे से ऐसी कोई भी शिकायत ना आने का वादा लिया वो दोनों आपस में कुछ भी करते लेकिन मेरे सामने शो नही करते
फिर एक दिन राजेश ने बोला मालती हमारे बेटे की शादी तो अब इस छोटी उम्र में नही कर सकते लेकिन इसमें सेक्स का तूफान उमड़ रहा है हम दोनों मिलकर इसको समझाते है ऐसा करो आज से इसे अलग नही सुलाना बल्कि हमारे कमरे में ही हमारे बिस्तर पे सुलाना
मैं- भला वो क्यों?
राजेश- क्योंकि इसके मां बाप होने के नाते इसके अच्छे बुरे का हमने ही सोचना है कही यह जवानी के जोश में कोई ऐसी गलती ना करदे के हमारा सोसाइटी में नाम बदनाम हो जाये
मैं- ठीक है
राजेश- ऐसा करो तुम लड़कियों वाली बाते इसे समझाओ और मैं लड़को वाली समझाता हूं
उस रात वो हमारे बीच सो गया उसे समझ नही आ रहा था के आज साथ में क्यों सुलाया है
रात को उठकर वो अपने कमरे में चला गया जब हमे जाग आई तो उसे पास ना पाकर चिंतित हुए राजेश उसके कमरे में देखने गए तो वो आंखे बन्द करके लंड हाथ में लिए मेरा नाम लेकर मुठ मार रहा था उसे देखकर राजेश चुप चाप वापिस आ गए और इशारे से मुझे बुलाकर माज़रा देखने को कहा जब मैंने वो सीन देखा तो हक्की बक्की रह गई
वो आंखे बन्द करके आई लव यु मालती आ जाओ प्लीज़ मेरी प्यास बुझा दो मेरा लंड अपनी चूत में ले लो जैसी कामुक बाते कर रहा था जब उसका काम हुआ तो ढेर सारा माल फर्श पे गिरा इतना माल तो कभी मेरे पति का भी नही निकला होगा करीब 5 इंच लम्बा लंड जो अब भी फुंकारे मार रहा था मेरी हालत उसे देखकर पतली हो रही थी
कहते है न जब काम का असर दिमाग में हो तब अच्छा बुरा कोई रिश्ता नाता नज़र नही आता वही हाल अब मेरा हो गया था सरल भाषा में कहूं तो अब मेरा भी दिल उसके लंड को लेने के लिए मचल रहा था गई तो मैं उसपे गुस्सा होने गई थी और वहां उसपे जाकर फिदा ही हो गई
मुझे कुछ समझ नही आ रहा था के क्या करूं अब? एक तरफ मां की ममता और दूसरी तरफ काम के अवेश में उसका तना हुआ लंड ही दिखाई दे रहा था आज पता नही क्यों मां की ममता पे काम उतेज़ना हावी हो रही थी मैने बहुत कण्ट्रोल किया खुद को भी समझाया परन्तु ना जाने क्यों मेरा ध्यान बेटे के लंड पे जाकर रुक जाता
इसी वजह से मैं टेंशन में रहने लगी राजेश ने भी बहुत बार जानना चाहा लेकिन उन्हें कैसे कहती के अब आपके लंड की नही बल्कि बेटे के लंड की भूख है जब कभी भी हम सेक्स करते तो पहले जैसा मज़ा ना आता हर बार मेरा मन राघव के लंड को ही मांगता आखिर एक दिन ऐसा भी आ गया जब हम दोनों मां बेटा घर पे रह गए
जबके मेरे पति अपने किसी काम के लिए 2 दिन तक कही गए हुए थे मैंने सोचा चलो अच्छा मौका है क्यों ना मज़ा लिया जाए स्कूल में छुट्टी थी तो सुबह राघव बाथरूम में नहा रहा था उसने आवाज़ लगाई के मां यहां नहाने की साबुन नही है
मैंने उसे साबुन देने जैसे ही बाथरूम का जरा सा दरवाज़ा खोला तो उसने साबुन लेने के लिए मेरा हाथ थामा तो वो हम दोनों फिसल कर गिर पड़े शावर चलता होने के कारण मेरे कपड़े भी भीग गए और मेरा बदन साफ दिखने लगा भला अंधा क्या चाहे 2 आंखे वाली बात हो गई थी
कुछ पल के लिए राघव की नज़र मेरे भीगे दिख रहे उरोज़ों पे जाकर रुक गई थी जबकि मैं शर्म से मरे जा रही थी उस वक़्त राघव मेरे ऊपर और मैं उसके नीचे गिरी थी उसने मेरे बदन को हाथ लगाने के बहाने से पूछा मां आपको कही चोट तो नही लगी
एक तो भीगा बदन ऊपर से उसका कामुक स्पर्श पाकर मेरी तो हालत बिगड़ गई सच पूछो तो मैं बहक गई थी काम में इतना अंधी हो गई के बेटे को भी हवस की नज़र से देख रही थी दिल की धड़कन बहुत तेज़ हो रही थी आवाज़ भी थरथरा रही थी होंठ सूख चुके थे अब बात थी के हम में से पहल कौन करे?
मन में यह भी आया के मालती यदि आज पीछे हट गई तो फिर ऐसा हसीन मौका नही मिलेगा दिल को कठोर करके मैंने वही पे अपने कपड़े एक एक करके उतारने शुरू कर दिए मुझे ऐसा करते देखकर राघव बोला यह क्या कर रही हो मां?
मैं मेरे कपड़े भीग गए है तो सोचा क्यों ना मैं भी नहा ही लू वैसे भी तू मेरा अपना बेटा ही तो है अब तुमसे क्या शर्माना? बचपन में भी तू रोजाना मेरा स्तनपान करता था वो बात अलग है के आज तू बड़ा हो गया है जबकि मेरा शरीर वैसे का वैसा ही पड़ा है
अपनी मां का नग्न शरीर देखकर राघव की आंखे खुली की खुली रह गई उसका 5 इंची लौड़ा तन चूका था वो आने बहाने मुझको छूने की कोशिश कर रहा था मैंने भी सोचा चलो बच्चे को खुश कर देती हूं इसमें हम दोनों की ही तो खुशी है मैंने बहाने से साबुन राघव को पकडाते हुए कहा के राघव मेरी पीठ पे जरा साबुन लगा दो वहां मेरा हाथ नही पहुंच रहा
राघव ने जल्दी से साबुन पकड़ा और पीठ पे लगाने लगा एक ऊपर से चलता छावर दूजा राघव के हाथ का स्पर्श तन मन में काम ज्वाला जग रही थी मैंने उसकी तरफ घुमकर मुंह कर लिया और कहा अब आगे भी लगा दो वो मेरी तरफ ऐसे देख रहा था मानो मैं कोई मज़ाक कर रही थी
मैंने उस से साबुन पकड़ी और उसके पेट से होते उसके लंड पे लगाने लगी आज पहली बार उसका लंड मेरी मुठी में था तो उसे धोने के बहाने मैं हिला रही थी जिस से मज़े के कारण उसकी सांसे उखड़ रही थी और वो भी मुझे बांहो में भरके कभी मेरे मम्मे तो कभी होंठो को चूम रहा था और आई लव यु मालती डार्लिग बोल रहा था
उसका आज ऐसा बोलना मुझे जरा सा भी अजीब नही लग रहा था शायद आप समझ ही चुके होंगे के क्यों मुझे अच्छा लग रहा था मैं भी सेम टू यू राघव बोलकर उसकी बात का जवाब दे रही थी जब उसके लंड से साबुन धुल गई तो मैं नीचे बैठकर उसके लंड को निहारने लगी और उसके लंड की चमड़ी ऊपर नीचे करने लगी
मुझे पता था के उसने पहले कभी सेक्स नही किया लेकिन मुठ मारकर उसने अपने लंड की चमड़ी ढीली जरूर करली थी जिस से यह तो पता लग गया था के इस से इसको कोई तकलीफ़ नही होगी और सोचते सोचते मुझे पता ही नही चला कब मैंने उसको अपने मुंह में ले लिया और अपना सर आगे पिछे करके उसको चूसने लगी
मेरी इस प्रतिकिर्या से मानो राघव को गड़ा हुआ खज़ाना मिल गया हो उसके चेहरे पे जैसे बहार आ गई थी वो भी मज़े लेकर मेरा मुख पकड़कर अपना लंड पेल रहा था वो बड़ा बेरहम व्यवहार कर रहा था मानो मुझ से कोई बदला ले रहा हो के इतने दिन से मुझे प्यासा क्यों रखा पहले क्यों नही आई
वो जोर जोर से झटके लगा रहा था जिस से मुझे सांस लेने में काफी तकलीफ हो रही थी बीच बीच में खांसी भी आ रही थी मुंह में लंड होने के कारण मुझसे बोला तो नही जा रहा था लेकिन मैं इशारे से उसे रुकने को बोल रही थी
लेकिन वो काम में अंधा हुआ पेलने में इतना मगन हो गया था के उसे मेरे किसी इशारे का पता नही चला और वो अपनी स्पीड से अपना काम करता रहा आखिर उसने अपना पूरा वीर्य मेरे गले में उतार दिया और जोर से मुंह बंद कर दिया
एक पल के लिए मानो मैं बेहोश होने लगी थी मैंने धक्का देकर उसको पीछे गिराया और जोर जोर से खांसने लग गई उसने मुझे उस हालत देखा तो उसके तोते उड़ गए
राघव- मुझे माफ करदो मां मैंने जानबूझकर ऐसा नही किया बस पता नही ऐसे कैसे हो गया
काफी समय बाद मेरी सांसे कण्ट्रोल में आई मुझे उस पर बहुत गुस्सा आ रहा था लेकिन अभी सेक्स करना बाकी था इस लिए उसे डांट भी नही सकती थी इस लिए उसे झूठी सी स्माईल देकर कहा आज तो अपनी मां को मार ही डालते तुम
इतना वहशिपन भी ठीक नही है राघव ने एक बार फिर माफी मांगी मुझे लगा अब शायद ही राघव सेक्स के लिए मानेगा तो मैंने भी उदास सा चेहरा बनाते हुए कहा एक शर्त पे माफी मिल सकती है?
राघव- वो क्या मां?
मैं- यदि बिस्तर पे मेरे साथ आज सेक्स करेगा तो मैं माफ कर सकती हूं
मेरी बात सुनकर राघव का मुंह खुले का खुला ही रह गया उसे यकीन ही नही आ रहा था के इतना कुछ हो जाने के बाद भी मां ऐसा कुछ बोलेगी उसने बिन समय गंवाए हां बोलदी हम दोनों नंगे ही शावर बन्द करके बैडरूम की तरफ चल दिए
उसने मुझे बाँहो में उठाया हुआ था और जैसे फिल्मो में हीरो हेरोइन की आंखों में आंखे डाले उसको ही देखते चलता रहता है ऐसे ही चल रहे थे बैडरूम में जाकर उसने मुझे बैड पे पटक दिया और खुद भी मुझ पे चढ़ गया
अब फिर शुरू होने लगा कामवासना का खेल उसने माथे से लेकर नीचे पैर की ऊंगली तक एक एक अंग को चाट दिया मेरी चूत अब भी आग उगल रही थी थोडा चूत को चाटकर बोला आह्ह्ह ऐसा स्वाद ज़िन्दगी में कभी नही चखा पापा की तो रोज़ाना चांदी होती होगी
उसके जीभ का स्पर्श मात्र से ही मैं बहकने लगी और उसको चूत में लंड डालने का आग्रह करने लगी उसने मेरी व्याकुलता को समझते हुए अपना गर्म रॉड जैसा दहकता लंड मेरी चूत के मुंह पे रखकर हल्का सा झटका दिया जिस से मेरी आह्ह्ह्ह निकल गई
उसके अगले झटके से पूरा लंड मेरी चूत में समा चूका था अब वो पागलपन पे उत्तर आया था क्योंके एक तो उसका पहला सेक्स था दूजा उसको इतनी जानकारी भी नही थी सो उसका मन जैसे बोलता वो वैसे ही करता रहा करीब 10 मिनट की इस खेल में वो और मैं एक साथ रस्खलित हुए और वो मेरे ऊपर गिरकर हांफ रहा था
सच मानो तो मुझे भी बेटे का पहला सेक्स बहुत अच्छा लगा हम दोनों काफी समय तक ऐसे ही लेटे रहे फिर हम दोनो उठकर दुबारा नहाये और इस तरह से मैंने अपने बेटे के लंड का स्वाद चखा
कैसी लगी आपको यह मेरी maa bete ki hindi sex story मुझे जरूर बताना और hindi sex story mom पढ़ने के लिए आप chudai kahani com पर आते रहे यहां पर आपको बहुत सारी hindi sex story mom पढ़ने को मिलेगी