बुआ की बेटी और छुट्टियों का वो दौर

हैलो दोस्तों कैसे हो सब मैं आपके लिए अपनी बहुत ही गरम कहानी लेकर आया हूं आप मेरी इस कहानी को पढ़कर बहुत उत्तेजित हो जाएंगे आप इस bhai bahan ki chudai ki kahani hindi me पढ़े और इसका मजा ले

Bhai Bahan Ki Chudai Ki Kahani Hindi Me

छुट्टियों के दौरान बुआ की बेटी का आना जैसे उस मौसम में नई रौनक भर देता था उसकी बढ़ती उम्र की शालीनता और खूबसूरती मुझे गहराई से प्रभावित करती थी

हमारे बीच एक अनकहा सा खिंचाव और नजदीकियां बढ़ने लगी थीं पर संकोच की वजह से मैं कभी कुछ कह नहीं पाया आखिरकार एक दिन उसने खुद ही उस खामोशी को तोड़ दिया

मेरा नाम मोहित मैं कानपुर का रहने वाला हूं मैं सरकारी नौकरी कर रहा हूं मैं chudai kahani की कहानियों को पढ़ रहा हूं मेरी लम्बाई 5 फुट 6 इंच हैं गोरा रंग बॉडी भी फिट है मेरे लंड की लंबाई 6.5 इंच है जो किसी भी लड़की या महिला को खुश कर सकता है

आज मैं अपनी पहली chudai kahani लिखने जा रहा हूं यह chudai kahani मेरी और मेरी बुआ की लड़की सुरेखा की है यह chudai kahani आज से 7 साल पहले की है जब मैं ग्रेजुएशन कर रहा था उस समय मैं छुट्टियों में अपने घर पर ही था

कई बार छुट्टियों के मौके पे मेरी बुआ की लड़की सुरेखा ननिहाल आती रहती है अपनी बहन की खूबसूरत जवानी को देखता रहता था

लेकिन कभी चोदने का नहीं सोचा था मेरी बहन का गोरा रंग तने हुए चूचे उठी हुई गांड कसम ऊपर वाले की उसे देखते ही मेरा लंड खड़ा हो गया था

ऐसी स्थिति में मैं खुद को किसी तरह समझा बुझाकर मुठ मारकर शांत कर लेता था क्योंकि मेरे लिए यह सब सिर्फ एक अधूरा ख्वाब ही था जिसे पूरा करने की हिम्मत मैं कभी नहीं जुटा सकता था

शुरुआत से ही हमारे बीच का रिश्ता बेहद खास था उसकी बातें मुझे हमेशा अपनी ओर खींचती थीं जिससे मैं धीरे धीरे उसके करीब आता गया हमारी यह नजदीकियां रंग लाईं और अब वह भी मुझसे अपने दिल की हर बात पूरी बेबाकी और सहजता से साझा करने लगी थी

घर के सभी लोग एक ही आंगन में सोया करते थे जिससे मेरी और उसकी चारपाई बिल्कुल पास पास आ जाती थी वह वक्त हमारे लिए सबसे खास होता था रात के उस शांत माहौल में हम दोनों देर तक धीरे धीरे बातें करते और आखिरकार बातें करते करते ही नींद की आगोश में चले जाते

महीनों तक यह खूबसूरत दौर यूं ही चलता रहा हर बार छुट्टियों में उसका आना और हमारा इस तरह वक्त बिताना हमें एक दूसरे के और करीब ले आया वक्त गुजरता गया और हमारी यह नजदीकियां एक नया मोड़ लेने लगीं

उसका छुट्टियों में आना मेरे लिए बेहद खास होता था मैं पहले से ही उसकी पसंद की चीज़ें जैसे सेंटर फ्रेश और चॉकलेट लाकर रख लेता था जब मैं उसे ये तोहफे देता तो वह खुशी से झूम उठती थी उसे खुश देखना मुझे अच्छा लगता था इसलिए मैं हमेशा उसका खास ख्याल रखता था

एक बार जब वह सर्दियों की छुट्टियों में आई तो मौसम के कारण घर के सभी लोग अंदर कमरों में ही बिस्तर लगाते थे इस वजह से हमारा बिस्तर भी बिल्कुल पास पास ही लगा था कड़ाके की ठंड होने के कारण हम दोनों एक ही रजाई में एक दूसरे के करीब सटकर सो गए

वक्त गुज़रता गया और सालों तक हमारा यह रिश्ता इसी मोड़ पर थमा रहा हर बार छुट्टियों में हम करीब तो आते पर संकोच की एक दीवार हमेशा बीच में रही जिसे पार करने की हिम्मत मैं कभी नहीं जुटा पाया लेकिन इस बार की सर्दियों की छुट्टियां कुछ अलग होने वाली थीं

उसके आते ही मेरा दिल बल्लियों उछलने लगा रात को सबने मिलकर खाना खाया और जैसे ही सोने का वक्त करीब आया कमरे में सन्नाटा छाने लगा और मेरी धड़कनों की रफ्तार बढ़ने लगी कि आज की रात क्या मोड़ लेगी

इंतज़ार की घड़ियां खत्म हुई और रात को जब सब सोने चले गए तो हमारा बिस्तर एक बार फिर साथ लगा था कमरे में अंधेरा और सन्नाटा था कड़ाके की ठंड के बीच मैं रजाई में अपनी बहन के पास सटकर सो गया दिल में एक अजीब सी हलचल थी लेकिन बाहर सब कुछ बिल्कुल शांत था

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तभी सुरेखा ने बेहद धीमी आवाज़ में मुझसे पूछा- मोहित एक बात पूछूं तुमसे?

दिल की बढ़ती धड़कनों के बीच मैंने जवाब दिया- हां बिल्कुल कहो न क्या बात है?

सुरेखा- मेरा दूध पियेगा?

मैंने धीरे से कहा- हां क्यों नहीं बस तुम बुरा मत मानना

सुरेखा ने सहजता से कहा- इसमें बुरा मानने जैसी क्या बात है मोहित? तू शुरू से ही मेरा इतना ध्यान रखता है तेरे लिए तो कुछ भी हाजिर है

फिर क्या सुरेखा ने अपनी कमीज ऊपर की और अपनी ब्रा से चूचे बाहर निकाले मां कसम क्या चूचे थे वो मुलायम सफेद चमक रहे थे नाईट बल्ब में

मैं तो पागल होता जा रहा था अपनी बहन की नंगी चूचियां देखकर और मेरे दिल की धड़कने काबू से बाहर हो रही थी जिंदगी में पहली बार चूचे देखने का मौका मिला था

मैंने सीधे एक निप्पल अपने मुंह में लिया और चूसने लगा दूसरे हाथ से मैं दूसरे वाला चूचा मसल रहा था मुझे बड़ा मजा आ रहा था और सुरेखा रजाई में मुंह छिपाकर आह आह कर रही थी

फिर मेरा हाथ उसकी चूत पर चला गया और मैं अपनी बहन की चूत मसलने लगा और उंगली करने लगा वो पागल होती जा रही थी लेकिन आवाज भी नहीं कर सकती थी क्योंकि पास में सब सो रहे थे

उसने कुछ नहीं कहा और मैं धीरे धीरे अपनी बहन की चूत सहलाने लगा अब वो भी आवाज़ निकालने लगी थी मैं उसकी चूत में उंगली कर रहा था वो ओर तेज तेज सांस लेने लगी थी

फिर मेरा हाथ उसकी सलवार के नाड़े तक पहुंच गया मैंने उसका नाड़ा खोल दिया और उसकी चूत को पैंटी के ऊपर से ही सहलाने लगा उसकी चूत भी गीली हो गई थी उसका कामरस बहने लगा था

फिर मैंने उसकी पैंटी एक साइड कर दी ओर उसकी चूत को सहलाने लगा वो सिहर उठी और आह आह आह करने लगी वो अपनी आवाज़ रजाई में दबा रही थी

लेकिन मुझे उसकी सिसकारियां सुन रही थी जिनको सुनकर मैं जोर जोर से उसकी चूत सहलाने लगा वो बिल्कुल पागल सी हो गई थी अपनी गांड उठा कर मुझसे चूत रगड़वा रही थी

फिर मैंने एक उंगली उसकी चूत में डाल दी और उससे उसको धीरे धीरे अंदर बाहर करके चोदने लगा वो भी अब नीचे से कमर हिला रही थी

करीब 10 मिनट में उसकी चूत ने पानी छोड़ दिया और वो एकदम से अकड़ गई थी फिर संतुष्टि भरी नज़रों से मुझे मेरे मुंह पर किस करने लगी

फिर थोड़ी देर बाद हमने एक ही रजाई कर ली और मैं उसके ऊपर चढ़ गया और अपने होंठ उसके होंठों पे लगा दिए अब मैं जिंदगी के पहले चुम्बन का मजा लेने लगा

पहले हम धीरे धीरे किस करते रहे फिर मैं उसकी जीभ को अपने मुंह में लेकर चूसने लगा इस चुम्मा चाटी में बहुत मजा आने लगा था

करीब 20 मिनट तक हम लोग किस करते रहे और साथ साथ मैं उसकी दोनों चुचियों को भी दबा रहा था

फिर मैंने उसकी सलवार उतार दी और पैंटी भी उतार दी और रजाई ऊपर तक ओढ़ ली नीचे से मेरी बहन पूरी नंगी हो गई थी मैंने भी अपना लोवर और अंडरवियर उतार दिया और अपने लंड को उसकी चिकनी चूत पे टिका दिया

मैं पहला बार चूत में लंड डाल रहा था मैंने एक झटका लगाया लेकिन लंड चूत के अंदर नहीं गया लेकिन दूसरी बार झटका लगाने से पहले सुरेखा ने अपने हाथ से लंड सैट किया और बोली- डालो

मैंने एकदम धक्का दिया और मेरा पूरा लंड मेरी बहन की चूत में चला गया

सुरेखा ने मेरे होंठ अपने होंठों से मिला दिये और आह आह कर रही थी मैं धीरे धीरे लंड को बहन की चूत के अंदर बाहर कर रहा था मुझे असीम आंनद की प्राप्ति हो रही थी मैं स्वर्ग में सैर कर रहा था मानो चोदने का बड़ा मजा आ रहा था और वो मुझे जबरदस्त किस कर रही थी

फिर मैंने उसके मुंह से मुंह हटाया और धक्के तेज तेज देने लगा वो भी उम्मम आह आह हाय हाय किये जा थी

सुरेखा की चूत से कुछ ही देर में हल्का हल्का पानी आने लगा तभी सुरेखा ने बताया कि वो छूटने वाली है

मैंने भी अपनी बहन की चूत में धक्कों की स्पीड बढ़ा दी और वो ओह ओह आह आह करती हुई झड़ गई उसी के साथ ही मैं भी झड़ गया इस पहली चुदाई में बहुत मजा आया सच में

इस चुदाई के बाद हम दोनों सुबह 4 बजे का अलार्म लगाकर एक दूसरे के करीब सो गए हमें पता था कि सुबह होने से पहले ही हमें अपनी अपनी रजाई में वापस जाना होगा ताकि घर के किसी सदस्य को हमारी इस नज़दीकी का पता न चले

कैसी लगी आपको ये बुआ की बेटी और छुट्टियों का वो दौर bhai bahan ki chudai ki kahani hindi me और गरम कहानियां पढ़ने के लिए आप chudai kahani com पर आते रहे

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