धोबी मां बेटा- 3

आप ने maa beta sex story के पिछले भाग धोबी मां बेटा- 2 में पढ़ा मैंने अपने आप को गालियां भी निकाली क्या उल्लू का पट्ठा हूं मैं भी जो चीज़ आराम से छूने को मिल रही थी तो उसे छूने की बजाए मैं हाथ हटा लिया पर अब क्या हो सकता था मैं चुप चाप वैसे ही बैठा रहा कुछ सोच भी नहीं पा रहा था अब आप maa beta sex story में आगे पढ़े

Dhobi Maa Beta Sex Story 3

फिर मैंने सोचा की जब उस वक़्त मां ने खुद मेरा हाथ अपने मम्मों पर रखा दिया था तो फिर अगर मैं खुद अपने मन से रखू तो शायद डाटेंगी नहीं और फिर अगर डाटेंगी तो बोल दूंगा तुम्ही ने तो मेरा हाथ उस वक़्त पाकर कर रखा था तो अब मैं अपने आप से रख दिया सोचा शायद तुम बुरा नहीं मनोगी

यही सब सोच कर मैंने अपने हाथो को धीरे से उसके मम्मों पर ले जा के रख दिया और हल्के हल्के सहलाने लगा मुझे गजब का मज़ा आ रहा था मैंने हल्के से उसकी साड़ी को पूरी तरह से उसके ब्लाउज पर से हटा दिया और फिर उसके मम्मों को दबाया वाह इतना गजब का मज़ा आया की बता नहीं सकता

एक दम गुदाज़ और सख़्त मम्में थे मां के इस उमर में भी मेरा तो लंड खड़ा हो गया और मैंने अपने एक हाथ को मम्मों पर रखे हुए दूसरे हाथ से अपने लंड को मसल्ने लगा जैसे जैसे मेरी बेताबी बढ़ रही थी वैसे वैसी मेरे हाथ दोनो जगहो पर तेज़ी के साथ चल रहे थे मुझे लगता है की मैंने मां के मम्मों को कुछ ज़्यादा ही जोर से दबा दिया था

शायद इसी लिए मां की आंख खुल गई और वो एकदम से हड़बड़ाते हुए उठ गई और अपने आंचल को संभालते हुए अपने मम्मों को ढक लिया और फिर मेरी तरफ देखती हुई बोली हाय क्या कर रहा था तू हाय मेरी तो आंख लग गई थी?

मेरा एक हाथ अभी भी मेरे लंड पर था और मेरे चेहरे का रंग उड़ गया था मां ने मुझे गौर से एक पल के लिए देखा और सारा माजरा समझ गई और फिर अपने चेहरे पर हल्की सी मुस्कराहट बिखेरते हुए बोली हाय देखो तो सही क्या सही काम कर रहा था ये? लड़का मेरा भी मसल रहा था और उधर अपना भी मसल रहा था

वो अब एक दम से मेरे नज़दीक आ गई थी और उसकी गरम सांसे मेरे चेहरे पर महसूस हो रही थी वो एक पल के लिए ऐसे ही मुझे देखती रही फिर मेरे ठोडी पकड़ कर मुझे ऊपर उठाते हुए हल्के से मुस्कुराते हुए धीरे से बोली क्यों रे बदमाश क्या कर रहा था बोल ना क्या कर रहा था अपनी मां के साथ फिर मेरे फूले फूले गाल पाकर कर हल्के से मसल दिया

मेरे मुंह से तो आवाज़ नहीं निकाल रही थी फिर उसने हल्के से अपना एक हाथ मेरे जांघों पर रखा और मेरे लंड को सहलाते हुए बोली है कैसे खड़ा कर रखा है मुए ने फिर सीधा पाजामा के ऊपर से मेरे खड़े लंड जो की मां के जागने से थोड़ा ढीला हो गया था पर अब उसके हाथो स्पर्श पा के फिर से खड़ा होने लगा था

पर उसने अपने हाथ रख दिया उई मां कैसे खड़ा कर रखा है क्या कर रहा था रे हाथ से मसल रहा था क्या है बेटा और मेरी इसको भी मसल रहा था तू तो अब लगता है जवान हो गया है तभी मैं कहूं की जैसे ही मेरा पेटीकोट नीचे गिरा ये लड़का मुझे घूर घूर के क्यों देख रहा था

इस लड़के की तो अपनी मां के उपर ही बुरी नज़र है अगर मैं नहीं जागती तो तू तो अपना पानी निकाल के ही मानता ना मेरे छातियों को दबा दबा के उम्म्म बोल निकालता की नहीं पानी?

मां गलती हो गई

वाह रे तेरी गलती कमाल की गलती है किसी का मसल दो दबा दो फिर बोलो की गलती हो गई अपना मज़ा कर लो दूसरे चाहे कैसे भी रहे

कह कर मां ने मेरे लंड को कस के दबाया उसके कोमल हाथो का स्पर्श पा के मेरा लंड तो लोहा हो गया था और गरम भी काफ़ी हो गया था

हाय मां छोड़ो क्या कर रही हो

मां उसी तरह से मुस्कुराती हुई बोली क्यों प्यारे तूने मेरा दबाया तब तो मैंने नहीं बोला की छोड़ो अब क्यों बोल रहा है तू

मैंने कहा मां तू दबाएगी तो सच में मेरा पानी निकाल जाएगा

क्यों पानी निकालने के लिए ही तो तू दबा रहा था ना मेरी छातिया मैं अपने हाथ से निकाल देती हूं तेरे गन्ने से तेरा रूस चल जरा अपना गन्ना तो दिखा

मां छोड़ो मुझे शरम आती है

अच्छा अभी तो बड़ी शरम आ रही है और हर रोज जो लूंगी और पाजामा हटा हटा के सफाई जब करता है तब तब क्या मुझे दिखाई नहीं देता क्या अभी बड़ी एक्टिंग कर रहा है

नहीं मां तब की बात तो और है फिर मुझे थोड़े ही पता होता था की तुम देख रही हो

ओह ओह मेरे भोले राजा बरा भोला बन रहा चल दिखा ना देखूं कितना बड़ा और मोटा है तेरा गन्ना

मैं कुछ बोल नहीं पा रहा था मेरे मुंह से शब्द नहीं निकाल पा रहे थे और लग रहा था जैसे मेरा पानी अब निकला की तब निकला इस बीच मां ने मेरे पाजामे का नारा खोल दिया और अंदर हाथ डाल के मेरे लंड को सीधा पकड़ लिए मेरा लंड जो की केवल उसके छूने के कारण से फुफकारने लगा था

अब उसके पकड़ने पर अपनी पूरी औकात पर आ गया और किसी मोटे लोहे के रोड की तरह एक दम टन कर उपर की तरफ मुंह उठाए खड़ा था मां ने मेरे लंड को अपने हाथो में पकड़ने की पूरी कोशिश कर रही थी पर मेरे लंड की मोटाई के कारण से वो उसे अपने मुट्ठी में अच्छी तरह से कैद नहीं कर पा रही थी उसने मेरे पाजामे को वही खुले में पेड़ के नीचे मेरे लंड पर से हटा दिया

मां छोड़ो कोई देख लेगा ऐसे कपड़ा मत हटाओ

मगर मां शायद पूरे जोश में आ चुकी थी

चल कोई नहीं देखता फिर सामने बैठी हूं किसी को नज़र नहीं आएगा देखूं तो सही मेरे बेटे का गन्ना आखिर है कितना बड़ा? और मेरा लंड देखता ही आश्चर्य से उसका मुंह खुला का खुला रह गया एकदम से चौंकती हुई बोली हाय दैया ये क्या इतना मोटा और इतना लंबा ये कैसे हो गया रे तेरे बाप का तो बीतते भर का भी नहीं है और यहा तू बेलन के जैसा ले के घूम रहा है

ओह मां मेरी इसमे क्या गलती है ये तो शुरू में पहले छोटा सा था पर अब अचानक इतना बड़ा हो गया है तो मैं क्या करू?

गलती तो तेरी ही है जो तूने इतना बड़ा जुगाड़ होते हुए भी अभी तक मुझे पता नहीं चलने दिया वैसे जब मैंने देखा था नहाते वक़्त तब तो इतना बड़ा नहीं दिख रहा था रे

मां वो वो मैं हकलाते हुए बोला वो इसलिए कोयोंकि उस समय ये उतना खड़ा नहीं रहा होगा अभी ये पूरा खड़ा हो गया है

ओह ओह तो अभी क्यों खड़ा कर लिया इतना बड़ा कैसे खड़ा हो गया अभी तेरा?

अब मैं क्या बोलता की कैसे खड़ा हो गया ये तो बोल नहीं सकता था की मां तेरे कारण खड़ा हो गया है मेरा

मैंने सकपकते हुए कहा अरे वो ऐसे ही खड़ा हो गया है तुम छोड़ो अभी ठीक हो जाएगा

ऐसे कैसे खड़ा हो जाता है तेरा मां ने पुछा और मेरी आंखों में देख कर अपने रसीले होंठो का एक कोना दबा के मुस्कने लगी

अरे तुमने पकड़ रखा है ना इसलिए खड़ा हो गया है मेरा क्या करू मैं छोड़ दो ना मैंने किसी भी तरह से मां का हाथ अपने लंड पर से हटा देना चाहता था मुझे ऐसा लग रहा था की मां के कोमल हाथो का स्पर्श पा के कही मेरा पानी निकाल ना जाए

फिर मां ने केवल पकड़ा तो हुआ नहीं था वो धीरे धीरे मेरे लंड को सहला भी और बार बार अपने अंगूठे से मेरे चिकने सुपाड़े के छू भी रही थी

अच्छा अब सारा दोष मेरा हो गया और खुद जो इतनी देर से मेरी छातियों पकड़ के मसल रहा था और दबा रहा था उसका कुछ नहीं गलती हो गई

चल मान लिया गलती हो गई पर सज़ा तो इसकी तुझे देनी परेगी मेरा तूने मसला है मैं भी तेरा मसल देती हूं कह कर मां अपने हाथो को थोड़ा तेज चलाने लगी और मेरे लंड का मूठ मारते हुए मेरे लंड के मुंडी को अंगूठे से थोड़ी तेज़ी के साथ घिसने लगी

मेरी हालत एकदम खराब हो रही थी गुदगुदाहट और सनसनी के मारे मेरे मुंह से कोई आवाज़ नहीं निकाल पा रहा था ऐसा लग रहा था जैसे की मेरा पानी अब निकला की तब निकला पर मां को मैं रोक भी नहीं पा रहा था

मैंने सिसकते हुए कहा ओह मां निकल जाएगा मेरा निकल जाएगा

इस पर मां ने और जोर से हाथ चलते हुए अपनी नज़र उपर करके मेरी तरफ देखते हुए बोली क्या निकल जाएगा?

ओह ओह छोड़ो ना तुम जानती हो क्या निकाल जाएगा क्यों परेशान कर रही हो

मैं कहां परेशान कर रही हूं तू खुद परेशान हो रहा है

क्यों मैं क्यों भला खुद को परेशान करुंगा तुम तो खुद ही जबरदस्ती पता नहीं क्यों मेरा लंड मसले जा रही हो

अच्छा जरा ये तो बता शुरुआत किसने की थी मसल्ने की कह कर मां मुस्कुराने लगी

मुझे तो जैसे सांप सूंघ गया था मैं भला क्या जवाब देता कुछ समझ में ही नहीं आ रहा था की क्या करू क्या ना करू उपर से मज़ा इतना आ रहा था की जान निकली जा रही थी तभी वो हल्का सा आगे की ओर सरकी और झुकी आगे झुकते ही उनका आंचल उनके ब्लाउज पर से सरक गया पर उन्होने कोई प्रयास नहीं किया उसको ठीक करने का

अब तो मेरी हालत और खराब हो रही थी मेरी आंखों के सामने उनके नारियल के जैसे सख़्त मम्में जिनको सपने में देख कर मैंने ना जाने कितनी बार अपना माल गिराया था और जिनको दूर से देख कर ही तड़पता रहता था भले ही मम्में अभी भी ब्लाउज में ही कैद थे परंतु उनके भारीपन और सख्ती का अंदाज उनके उपर से ही लगाया जा सकता था

ब्लाउज के उपरी भाग से उनके मम्मों के बीच की खाई का उपरी गोरा गोरा हिस्सा नज़र आ रहा था हल्के मम्मों को बहुत बड़ा तो नहीं कहा जा सकता पर उतने बड़े तो थे ही जितनी एक स्वस्थ शरीर की मालकिन का हो सकता है

मेरा मतलब है की इतने बड़े जितने की आप के हाथो में ना आए पर इतने बड़े भी नहीं की आप को दो दो हाथो से पकड़ना पड़े और फिर भी आपके हाथ ना आए एकदम किसी भाले की तरह नुकीले लग रहे थे और सामने की ओर निकले हुए थे

मेरी आंखे तो हटाए नहीं हट रही थी तभी मां ने अपने हाथो को मेरे लंड पर थोड़ा जोर से दबाते हुए पुछा बोल ना दबाऊ क्या और

मां छोड़ो ना

उन्होने ने जोर से मेरे लंड को मुट्ठी में भर लिया

मां छोड़ो ना बहुत गुदगुदी होती है

तो होने दे ना तू खाली बोल दबाऊं या नहीं

दबाओ मां मस्लो

अब आया ना रास्ते पर

मां तुम्हारे हाथो में तो जादू है

जादू हाथो में है या फिर इसमे है अपने ब्लाउज की तरफ इशारा कर के पुछा

मां तुम तो बस

शरमाता क्यों हाई बोल ना क्या अच्छा लग रहा है

मां मैं क्या बोलू

क्यों क्या अच्छा लग रहा है? अरे अब बोल भी दे शरमाता क्यों है

मां अच्छा लग रहा है

तो फिर शर्मा क्यों रहा था बोलने में फिर मां ने बड़े आराम से मेरे पूरे लंड को मुट्ठी के अंदर कैद कर हल्के हल्के अपना हाथ चलना शुरू कर दिया

तू तो पूरा जवान हो गया है रे

हां मां

पूरा सांड की तरह से जवान हो गया है तू तो अब तो बर्दाश्त भी नहीं होता होगा कैसे करता है

क्या मां

वही बर्दाश्त और क्या तुझे तो अब छेद चाहिए समझा?

छेद मतलब? मां नहीं समझा

क्या उल्लू लड़का है रे तू छेद मतलब नहीं सकझता

मैंने नाटक करते हुए कहा नहीं मां नहीं समझता

इस पर मां हल्के हल्के मुस्कुराने लगी और बोली चल समझ जाएगा फिर उसने अपने हाथो को तेज़ी से मेरे लंड पर चलाने लगी मारे गुदगुदी और सनसनी के मेरा तो बुरा हाल हो रखा था समझ में नहीं आ रहा था क्या करू दिल कर रहा था की हाथ को आगे बढ़ा कर मां के दोनों मम्मों को कस के पकड़ लूं और खूब जोर जोर से दबाऊं

लेकिन डर रहा था की कही बुरा ना मान जाए इसी चक्कर में मैंने कराहते हुए सहारा लेने के लिए सामने बैठी मां के कंधे पर अपने दोनों हाथ रख दिए वो बोली तो कुछ नहीं पर अपनी नज़रे उपर कर के मेरी तरफ देख कर मुस्कुराते हुए बोली क्यों मज़ा आ रहा है की नहीं

हां मां मज़े की तो बस पूछो मत बहुत मज़ा आ रहा है मैं बोला इस पर मां ने अपने हाथ और तेज़ी से चलना शुरू कर दिया और बोली साले हरामी कही का मैं जब नहाती हूं तब घूर घूर के मुझे देखता रहता है

मैं जब सो रही थी तो मेरे चुचे दबा रहा था और और अभी मज़े से मुठ मरवा रहा है कमीने तेरे को शरम नहीं आती मेरे तो होश ही उड़ गया ये मां क्या बोल रही थी

पर मैंने देखा की उसका एक हाथ अब भी पहले की तरह मेरे लंड को सहलाए जा रहा था तभी मां मेरे चेहरे के उड़े हुए रंग को देख कर हंसने लगी और हंसते हुए मेरे गाल पर एक थप्पड़ लगा दिया मैंने कभी भी इस से पहले मां को ना तो ऐसे बोलते देखा था ना ही इस तरह से व्यवहार करते हुए नहीं देखा था इसलिए मुझे बड़ा आश्चर्य हो रहा था

पर उनके हसते हुए थप्पड़ लगाने पर तो मुझे और भी ज्यादा आशचर्य हुआ की आखिर ये चाहती क्या है और मैंने बोला की माफ कर दो मां अगर कोई गलती हो गई हो तो इस पर मां ने मेरे गालो को हल्के सहलाते हुए कहा की गलती तो तू कर बैठा है बेटे अब केवल गलती की सज़ा मिलेगी तुझे

मैंने कहा क्या गलती हो गई मेरे से मां

सबसे बरी गलती तो ये है की तू खाली घूर घूर के देखता है बस करता धरता तो कुछ है नहीं खाली घूर घूर के कितने दिन देखता रहेगा

क्या करू मां मेरी तो कुछ समझ में नहीं आ रहा

साले बेवकूफ़ की औलाद अरे करने के लिए इतना कुछ है और तुझे समझ में ही नहीं आ रहा है

क्या मां बताओ ना

देख अभी जैसे की तेरा मन कर रहा है की तू मेरे अनारो से खेले उन्हे दबाए मगर तू नहीं वो काम ना कर के केवल मुझे घूरे जा रहा है बोल तेरा मन कर रहा है की नहीं बोल ना

बाकी कहानी maa beta sex story के अगले भाग धोबी मां बेटा- 4 में पढ़े