धोबी मां बेटा- 4

आप ने maa beta sex story के पिछले भाग धोबी मां बेटा- 3 में पढ़ा देख अभी जैसे की तेरा मन कर रहा है की तू मेरे अनारो से खेले उन्हे दबाए मगर तू नहीं वो काम ना कर के केवल मुझे घूरे जा रहा है बोल तेरा मन कर रहा है की नहीं बोल ना अब आप maa beta sex story में आगे पढ़े

Dhobi Maa Beta Sex Story 4

हां मां मन तो मेरे बहुत कर रहा है

तो फिर दबा ना मैं जैसे तेरे औज़ार से खेल रही हूं वैसे ही तू मेरे समान से खेल दबा बेटा दबा बस फिर क्या था मेरी तो बांछे खिल गई मैंने दोनों हथेलियो में दोनों चुचो को थाम लिया और हल्के हल्के उन्हे दबाने लगा मां बोली शाबाश ऐसे ही दबाने का जितना दबाने का मन उतना दबा ले कर ले मज़े

मैं फिर पूरे जोश के साथ हल्के हाथो से उसके मम्मों को दबाने लगा ऐसी मस्त मस्त चुचिया पहली बार किसी ऐसे के हाथ लग जाए जिसने पहले किसी चुचि को दबाना तो दूर छुआ तक ना हो तो बंदा तो जन्नत में पहुच ही जाएगा ना मेरा भी वही हाल था मैंने हल्के हाथो से संभाल संभाल के मम्मों को दबाए जा रहा था

उधर मां के हाथ तेज़ी से मेरे लंड पर चल रहे थे तभी मां जो अब तक काफ़ी उत्तेजित हो चुकी थी ने मेरे चेहरे की ओर देखते हुए कहा क्यों मज़ा आ रहा है ना जोर से दबा मेरे चुचयों को बेटा तभी पूरा मज़ा मिलेगा मसलता जा देख अभी तेरा माल मैं कैसे निकलती हूं

मैंने जोर से मम्मों को दबाना शुरू कर दिया था मेरा मन कर रहा था की मैं मां के ब्लाउज खोल के मम्मों को नंगा करके उनको देखते हुए दबाऊं इसीलये मैंने मां से पुछा मां तेरा ब्लाउज खोल दूं?

इस पर वो मुस्कुराते हुए बोली नहीं अभी रहने दे मैं जानती हूं की तेरा बहुत मन कर रहा होगा की तू मेरे नंगे मम्मों को देखे मगर अभी रहने दे

मैं बोला ठीक है मां पर मुझे लग रहा हाई की मेरे औज़ार से माल निकालने वाला है

इस पर मां बोली कोई बात नहीं बेटा निकालने दे तुझे मज़ा आ रहा है ना?

हां मां मज़ा तो बहुत आ रहा है

अभी क्या मज़ा आया है बेटे अभी तो और आएगा अभी तेरा माल निकाल ले फिर देख मैं तुझे कैसे जन्नत की सैर कराती हूं कह कर मां ने अपना हाथ और ज्यादा तेज़ी के साथ चलना शुरू कर दिया मेरे पानी अब बस निकालने वाला ही था मैंने भी अपना हाथ अब तेज़ी के साथ मां के अनारो पर चलाना शुरू कर दिया था

मेरा दिल कर रहा था उन प्यारे प्यारे मम्मों को अपने मुंह में भर के चुसू लेकिन वो अभी संभव नहीं था मुझे केवल मम्मों को दबा दबा के ही संतोष करना था ऐसा लग रहा था जैसे की मैं अभी सातवे आसमान पर उड़ रहा था मैं भी खूब जोर जोर सिसकते हुए बोलने लगा ओह मां हा मां और जोर से मस्लो और जोर से मूठ मारो निकाल दो मेरा सारा पानी

पर तभी मुझे ऐसा लगा जैसे की मां ने लंड पर अपनी पकर ढीली कर दी है लंड को छोड़ कर मेरे आंडो को अपने हाथ से पकड़ के सहलाते हुए मां बोली अब तुझे एक नया मज़ा चखती हूं ठहर जा और फिर धीरे धीरे मेरे लंड पर झुकने लगी लंड को एक हाथ से पकडे हुए वो पूरी तरह से मेरे लंड पर झुक गई और अपने होठों को खोल कर मेरे लंड को अपने मुंह में भर लिया

मेरे मुंह से एक आह निकल गई मुझे विश्वास नहीं हो रहा था की वो ये क्या कर रही है

मैं बोला ओह मां ये क्या कर रही हो है छोड़ ना बहुत गुदगुदी हो रही है

मगर वो बोली तो फिर मज़े ले इस गुदगुदी के करने दे तुझे अच्छा लगेगा

मां क्या इसको मुंह में भी लिया जाता

हां मुंह में भी लिया जाता है और दूसरी जगहो पर भी अभी तू मुंह में डालने का मज़ा लूट कह कर तेज़ी के साथ मेरे लंड को चूसने लगी मेरी तो कुछ समझ में नहीं आ रहा था गुदगुदी और सनसनी के कारण मैं मज़े के सातवे आसमान पर झूल रहा था

मां ने पहले मेरे लंड के सुपारे को अपने मुंह में भरा और धीरे धीरे चूसने लगी और मेरी ओर बड़ी सेक्सी अंदाज में अपने नज़रो को उठा के बोली

कैसा लाल लाल सुपारा है रे तेरा एकदम पहरी आलू के जैसे लगता है अभी फट जाएगा इतना लाल लाल सुपरा कुंवारे लड़कों का ही होता है फिर वो और कस कस के मेरे सुपारे को अपने होंठो में भर भर के चूसने लगी नदी के किनारे पेड़ की छावं में मुझे ऐसा मज़ा मिल रहा था

जिसकी मैंने आज तक कल्पना तक नहीं की थी मां अब मेरे आधे से अधिक लंड को अपने मुंह में भर चुकी थी और अपने होंठो को कस के मेरे लंड के चारो तरफ से दबाये हुए धीरे धीरे उपर सुपारे तक लाती थी और फिर उसी तरह से सरकते हुए नीचे की तरफ ले जाती थी

उसकी शायद इस बात का अच्छी तरह से अहसास था की ये मेरा किसी औरत के साथ पहला संबंध है और मैंने आज तक किसी औरत हाथो का स्पर्श अपने लंड पर नहीं महसूस किया है और इसी बात को ध्यान में रखते हुए वो मेरे लंड को बीच बीच में ढीला भी छोड़ देती थी और मेरे अंडों को दबाने लगती थी

वो इस बात का पूरा ध्यान रखे हुए थी की मैं जल्दी ना झाड़ू मुझे भी गजब का मज़ा आ रहा था और ऐसा लग रहा था जैसे की मेरा लंड फट जाएगा मगर मुझसे अब रहा नहीं जा रहा था मैंने मां से कहा मां अब निकाल जाएगा मां मेरा माल अब लगता है नहीं रुकेगा

उसने मेरी बातो की ओर कोई ध्यान नहीं दिया और अपनी चूसाई जारी रखी

मैंने कहा मां तेरे मुंह में ही निकल जाएगा जल्दी से अपना मुंह हटा लो

इस पर मां ने अपना मुंह थोरी देर के लिए हटाते हुए कहा की कोई बात नहीं मेरे मुंह में ही निकाल मैं देखना चाहती हूं की कुंवारे लड़के के पानी का स्वाद कैसा होता है और फिर अपने मुंह में मेरे लंड को कस के जकड़ते हुए उसने अब अपना पूरा ध्यान केवल अब मेरे सुपारे पर लगा दिया और मेरे सुपारे को कस कस के चूसने लगी

उसकी जीभ मेरे सुपारे के कटाव पर बार बार फिर रही थी मैं सिसकते हुए बोलने लगा ओह मां पी जाओ तो फिर चख लो मेरे लंड का सारा पानी ले लो अपने मुंह में ओह ले लो कितना मज़ा आ रहा है ही मुझे नहीं पाता था की इतना मज़ा आता है निकल गया निकल गया मां निकला

तभी मेरे लंड का फ़ौवारा छुट पड़ा और तेज़ी के साथ मेरे लंड से पानी गिरने लगा मेरे लंड का सारा सारा पानी सीधे मां के मुंह में गिरता जा रहा था और वो मज़े से मेरे लंड को चूसे जा रही थी कुछ ही देर तक लगातार वो मेरे लंड को चूसती रही मेरा लंड अब पूरी तरह से उसके थूक से भीग कर गीला हो गया था और धीरे धीरे सिकुड़ रहा था

पर उसने अब भी मेरे लंड को अपने मुंह से नहीं निकाला था और धीरे धीरे मेरे सिकुड़े हुए लंड को अपने मुंह में किसी चॉक्लेट की तरह घुमा रही थी कुछ देर तक ऐसा ही करने के बाद जब मेरी सांसे भी कुछ शांत हो गई तब मां ने अपना चेहरा मेरे लंड पर से उठा लिया और अपने मुंह में जमा मेरे वीर्या को अपना मुंह खोल कर दिखाया और हल्के से हंस दी

फिर उसने मेरा सारा पानी गटक लिया और अपने सारी पल्लू से अपने होंठो को पोछती हुई बोली मज़ा आ गया सच में कुंवारे लंड का पानी बड़ा मीठा होता है मुझे नहीं पाता था की तेरा पानी इतना मजेदार होगा फिर मेरे से पुछा मज़ा आया की नहीं मैं क्या जवाब देता जोश ठंडा हो जाने के बाद मैंने अपने सिर को नीचे झुका लिया था

पर गुदगुदी और सनसनी तो अब भी कायम थी तभी मां ने मेरे लटके हुए लंड को अपने हाथो में पकड़ा और धीरे से अपने साड़ी के पल्लू से पोछती हुई पूछी बोल ना मज़ा आया की नहीं मैंने शर्माते हुए जवाब दिया हां मां बहुत मज़ा आया इतना मज़ा कभी नहीं आया था

तब मां ने पुछा क्यों? अपने हाथ से नहीं करता था क्या

करता हूं मां पर उतना मज़ा नहीं आता था जितना आज आया है

औरत के हाथ से करवाने पर तो ज़यादा मज़ा आएगा ही पर इस बात का ध्यान रखियो की किसी को पता ना चले

हा मां किसी को पता नहीं चलेगा

तब मां उठ कर खडी हो गई अपने साड़ी के पल्लू को और मेरे द्वारा मसले गये ब्लाउज को ठीक किया और मेरी ओर देख कर मुस्कुराते हुए अपनी चूत के सामने अपनी साड़ी को हल्के से दबाया और साड़ी को चूत के उपर ऐसे रगड़ा जैसे की पानी पोछ रही हो मैं उसकी इस क्रिया को बरे गौर से देख रहा था

मेरे ध्यान से देखने पर वो हसते हुए बोली मैं जरा पेशाब कर के आती हूं तुझे भी अगर करना है तो चल अब तो कोई शरम नहीं है मैं हल्के से शरमाते हुए मुस्कुरा दिया तो बोली क्यों अब भी शर्मा रहा है क्या मैंने इस पर कुछ नहीं कहा और चुप चाप उठ कर खड़ा हो गया वो आगे चल दी और मैं उसके पीछे पीछे चल दिया

जब हम झाड़ियों के पास पहुच गये तो मां ने एक बार पीछे मुड कर मेरी ओर देखा और मुस्कुरई फिर झाड़ियों के पीछे पहुच कर बिना कुछ बोले अपने साड़ी उठा के पेशाब करने बैठ गई उसकी दोनो गोरी गोरी जंघे उपर तक नंगी हो चुकी थी और उसने शायद अपने साड़ी को जान बुझ कर पीछे से उपर उठा दिया था जिस के कारण उसके दोनो चूतड़ भी नुमाया हो रहे थे

ये सीन देख कर मेरा लंड फिर से फुफ्करने लगा उसका गोरे गोरे चूतड़ बड़े कमाल के लग रहे थे मां ने अपने चूतड़ों को थोरा सा उचकाया हुआ था जिस के कारण उसके गांड की खाई भी दिख रही थी हल्के भूरे रंग की गांड की खाई देख कर दिल तो यही कर रहा था की पास जा उस गांड की खाई में धीरे धीरे उंगली चलाऊं और गांड की भूरे रंग की छेद को अपनी उंगली से छेड़ूं और देखूं की कैसे पाक पकती है

तभी मां पेशाब कर के उठ खडी हुई और मेरी तरफ घूम गई उसने अभी तक साड़ी को अपने जांघों तक उठा रखा था मेरी ओर देख कर मुस्कुराते हुए उसने अपने साड़ी को छोड़ दिया और नीचे गिरने दिया

फिर एक हाथ को अपनी चूत पर साड़ी के उपर से ले जा के रगड़ने लगी जैसे की पेशाब पोछ रही हो और बोली चल तू भी पेशाब कर ले खड़ा खड़ा मुंह क्या टाक रहा है

मैं जो की अभी तक इस शानदार नज़ारे में खोया हुआ था थोडा सा चौंक गया पर फिर और हकलाते हुए बोला हा हा अभी करता हूं मैंने सोचा पहले तुम कर लो इसलिए रुका था फिर मैंने अपने पाजामा के नाड़े को खोला और सीधा खड़े खड़े ही मूतने की कोशिश करने लगा मेरा लंड तो फिर से खड़ा हो चुका था और खड़े लंड से पेशाब ही नहीं निकाल रहा था

मैंने अपनी गांड तक का जोर लगा दिया पेशाब करने के चक्कर में मां वही बगल में खडी हो कर मुझे देखे जा रही थी मेरे खरे लंड को देख कर वो हंसते हुए बोली चल जल्दी से कर ले पेशाब देर हो रही है घर भी जाना है

मैं क्या बोलता पेशाब तो निकाल नहीं रहा था तभी मां ने आगे बढ़ कर मेरे लंड को अपने हाथो में पकड़ लिया और बोली फिर से खाद कर लिया अब पेशाब कैसे उतरेगा? कह कर लंड को हल्के हल्के सहलाने लगी

अब तो लंड और टाइट हो गया पर मेरे जोर लगाने पर पेशाब की एक आध बूंदे नीचे गिर गई

मैंने मां से कहा अरे तुम छोडो ना इसको तुमहरे पकड़ने से तो ये और खड़ा हो जाएगा छोडो और मां का हाथ अपने लंड पर से झटकने की कोशिश करने लगा इस पर मां ने हसते हुए कहा मैं तो छोड़ देती हूं पर पहले ये तो बता की खड़ा क्यों किया था अभी दो मिनिट पहले ही तो तेरा पानी निकाला था

मैंने और तूने फिर से खड़ा कर लिया कमाल का लड़का है तू तो मैं कुछ नहीं बोला अब लंड थोडा ढीला पड़ गया था और मैंने पेशाब कर लिया मूतने के बाद जल्दी से पाजामा के नाड़े को बांध कर मैं मां के साथ झारियों के पीछे से निकल आया मां के चेहरे पर अब भी मंद मंद मुस्कान आ रही थी

मैं जल्दी जल्दी चलते हुए आगे बढ़ा और कपड़े के गट्ठर को उठा कर अपने माथे पर रख लिया मां ने भी एक गट्ठर को उठा लिया और अब हम दोनो मां बेटे जल्दी जल्दी गांव के पगडंडी वाले रास्ते पर चलने लगे शाम होते होते तक हम अपने घर पहुच चुके थे कपड़ों के गट्ठर को इस्त्री करने वाले कमरे में रखने के बाद हमने हाथ मुंह धोया और फिर मां ने कहा कि बेटा चल कुछ खा पी ले

भूख तो वैसे मुझे नहीं लगी नहीं थी दिमाग़ में जब सेक्स का भूत सवार हो तो भूख तो वैसे भी मार जाती हाई पर फिर भी मैंने अपना सिर सहमति में हिला दिया मां ने अब तक अपने कपड़ों को बदल लिया था मैंने भी अपने पाजामा को खोल कर उसकी जगह पर लूंगी पहन ली क्यों की गर्मी के दिनों में लूंगी ज्यादा आरामदायक होती है मां रसोई घर में चली गई

रात के 9:30 ही बजे थे पर गांव में तो ऐसे भी लोग जल्दी ही सो जाया करते है हम दोनो मां बेटे आ के बिछावन पर लेट गये बिछावन पर मेरे पास ही मां भी आ के लेट गई थी मां के इतने पास लेटने भर से मेरे शरीर में एक गुदगुदी सी दौड़ गई

उसके बदन से उठने वाली खुशबु मेरी सांसो में भरने लगी और मैं बेकाबू होने लगा था मेरा लंड धीरे धीरे अपना सिर उठाने लगा था तभी मां मेरी ओर करवट कर के घूमी और पुछा बहुत तक गये हो ना? हां मां जिस दिन नदी पर जाना होता है उस दिन तो थकावट ज्यादा हो ही जाती है हां मुझे भी बड़ी थकावट लग रही है जैसे पूरा बदन टूट रहा हो

मैं दबा दूं थोड़ी थकान दूर हो जाएगी नहीं रे रहने दे तू तू भी तो थक गया होगा नहीं मां उतना तो नहीं थका की तेरी सेवा ना कर सकु मां के चेहरे पर एक मुस्कान फैल गई और वो हंसते हुए बोली दिन में इतना कुछ हुआ था उससे तो तेरी थकान और बढ़ गई होगी नहीं दिन में थकान बढ़ने वाला तो कुछ नहीं हुआ था

बाकी कहानी maa beta sex story के अगले भाग धोबी मां बेटा- 5 में पढ़े