हैलो दोस्तो आज मैं आपको maa beta hindi sex stories बताऊंगा कैसे एक बेटे ने अपनी मां की चुदाई की आप इस maa beta sex story को पढ़ कर बहुत उत्तेजित हो जायेंगे यह maa beta hindi sex stories थोड़ी लंबी है पर आपको यह maa beta sex story पढ़कर मज़ा आयेगा अब मैं maa beta hindi sex stories शुरू करता हूं
Maa Beta Hindi Sex Stories 1
सुरेश सिंह असम के एक छोटे से गांव का रहने वाला है वो अपने मां बाप का एकलौता बेटा है गांव में घोर गरीबी के चलते उसे 15 साल की ही उम्र अपनी पढ़ाई बीच में ही छोड़ कर दिल्ली आना पड़ा
दिल्ली आते ही उसे एक कारखाने में नौकरी मिल गई सुरेश ने तुरंत ही अपनी लगन एवं ईमानदारी का इनाम पाया और उसकी तरक्की सिर्फ एक साल में ही सुपरवाइजर में हो गई अब उसे ज्यादा वेतन मिलने लगा था
अब वो अपने गांव अपने मां-बाप से मुलाकात करने और उन्हें यहां लाने की सोच रहा था तभी एक दिन उसके पास उसकी मां का फोन आया कि उसके बाप की तबियत काफी खराब है
सुरेश जल्दी से अपने गांव के लिए छुट्टी लेकर निकला दिल्ली से असम जाने में उसे तीन दिन लग गए मगर दुर्भाग्यवश वो जैसे ही अपने घर पहुंचा उसके अगले दिन ही उसके बाप की मृत्यु हो गई
होनी को कौन टाल सकता था बाप के गुजरने के बाद सुरेश अपनी मां को दिल्ली ले जाने की सोचने लगा क्यों कि यहां वो बिलकुल ही अकेली रहती और गांव में कोई खेती बाड़ी भी नहीं थी जिसके लिए उसकी मां गांव में रहती पहले तो उसकी मां अपने गांव को छोड़ना नहीं चाहती थी मगर बेटे के समझाने पर वो मान गई और बेटे के साथ दिल्ली चली आई
उसकी मां का नाम पुष्पा है उसकी उम्र 31-32 साल की है वो 15 साल की ही उम्र में सुरेश की मां बन चुकी थी आगे चलकर उसे एक और संतान हुई मगर कुछ ही दिनों में उसकी मृत्यु हो गई थी
आगे चल कर पुष्पा को कोई अन्य संतान नहीं हुई इस प्रकार से पुष्पा को सिर्फ एक पुत्र सुरेश से ही संतुष्टी प्राप्त करना पड़ा खैर सुरेश उसका लायक पुत्र निकला और वो अब नौकरी कर के अपना और अपनी मां का ख्याल रख सकता था
सुरेश ने दिल्ली में एक छोटा सा कमरा किराया पर ले रखा था इसमें एक किचन और बाथरूम अटैच था उसने जिस मकान में यह कमरा ले रखा था उसमे चारों तरफ इसी तरह के छोटे छोटे कमरे थे वहां पर लगभग सभी बाहरी लोग ही किराए पर रहते थे इसलिए किसी को किसी से मतलब नहीं था
सुरेश के कमरे में सिर्फ एक खिडकी और एक मुख्य दरवाजा था पुष्पा पहली बार अपने राज्य से बाहर निकली थी वो तो कभी असम के शहर भी नहीं घूमी थी दिल्ली की भव्यता ने उसकी उसकी आंखें चुंधिया दी जब सुरेश अपनी मां पुष्पा को अपने कमरे में लेकर गया
तो पुष्पा को वह छोटा सा कमरा भी आलिशान लग रहा था क्यों कि वो आज तक किसी पक्के मकान में नहीं रही थी वो असम में एक छोटे से झोपड़े में अपना जीवन गुजार रही थी
पुष्पा को उसके बेटे ने अपने कमरे के बारे में बताया किचन और बाथरूम के बारे में बताया यह भी बताया कि यहां गांव की तरह कोई नदी नहीं है जब मन करे जाकर पानी ले आये और काम करे यहां पानी आने का टाइम रहता है
इसी में अपना काम कर लेना है पहले दिन उसने अपनी मां को बाहर ले जाकर खाना खिलाया पुष्पा के लिए ये सचमुच अनोखा अनुभव था वो हिंदी भाषा ना तो समझ पाती थी ना ही बोल पाती थी वो परेशान थी लेकिन सुरेश ने उसे समझाया कि वो धीरे धीरे सब समझने लगेगी
रात में जब सोने का समय आया तो दोनों एक ही बिस्तर पर सो गए सुरेश का बिस्तर डबल था इसलिए दोनों को सोने में परेशानी तो नहीं हुई परन्तु सुरेश तो आदत अनुसार किसी तरह सो गया लेकिन पहाड़ों पर रहने वाली पुष्पा को दिल्ली की उमस भरी रात पसंद नहीं आ रही थी वो रात भर करवट लेती रही खैर सुबह हुई सुरेश अपने कारखाने जाने के लिए निकलने लगा
पुष्पा ने उसके लिए नाश्ता बना दिया सुरेश ने पुष्पा को सभी जरुरी बातें समझा कर अपने कारखाने चला गया पुष्पा ने दिन भर अपने कमरे की साफ सफाई की और कमरे को ठीक किया शाम को जब सुरेश वापस आया तो अपना कमरा सजा हुआ पाया तो बहुत खुश हुआ और पुष्पा को बाजार घुमाने ले गया और रात का खाना भी बाहर ही खाया
अगले 3-4 दिनों में पुष्पा अपने पति की यादों से बाहर निकलने लगी थी और अपने आप को दिल्ली के वातावरण अनुसार ढालने की कोशिश करने लगी सुरेश भी अब पुष्पा पर अधिकार जमाने लगा था
वो लोग पहाड़ी आदिवासी समुदाय के थे वहां के परिवार के बीच ज्यादा परदा नहीं होता है सुरेश आराम से अपनी मां के सामने सिगरेट पीता था वो रात में सिर्फ एक छोटा सा गमछा लपेट कर सोता था इस से उसके लंड का उभार आकार सभी पता चलता रहता था लेकिन उसकी मां ने कभी इसका बुरा नहीं माना क्यों कि ये उन लोगों का पारंपरिक पहनावा था
उसकी मां भी सिर्फ एक तौलिये को अपने बदन से लपेट कर सोती थी पुष्पा को भी सुरेश से कोई लाज नहीं लगती थी एक रात 12 बजे बिजली चली गई जिसकी वजह से गरमी के मारे पुष्पा की नींद खुल गई और वह एक हाथ वाला पंखा से अपने आपको और सुरेश को हवा दे रही थी लेकिन उस से पुष्पा को राहत नहीं मिल रही थी
वो कुछ क्यादा ही परेशान हो गई थी क्यों की उसे दिल्ली की गर्मी बर्दाश्त करने की आदत नहीं हुई थी तभी सुरेश की नींद खुली तो उसने देखा कि उसकी मां गरमी से बेहाल हो रही है
सुरेश- क्या हुआ? सोती क्यों नहीं?
पुष्पा- इतनी गरमी है यहां
सुरेश- तो इतने भारी भरकम तौलिया क्यों पहन रखा हैं?
पुष्पा- मेरे पास तो यही हैं
सुरेश- गाउन नहीं है क्या?
पुष्पा- नहीं
सुरेश- तुमने पहले मुझे बताया क्यों नहीं? कल मैं लेता आऊंगा तू एक काम कर अभी ये सब खोल कर सो जा
पुष्पा- बिना कपड़ो के ही?
सुरेश ने कहा- नहीं ब्रा और पैंटी है ना तेरी? वही पहन के सो जा ना कौन तुझे रात में यहां देखेगा?
पुष्पा- नहीं आज की रात किसी तरह काट लेती हूं तू कल सुबह मेरे लिए गाउन लेते आना
अगले दिन सुरेश अपनी मां के लिए एक बिलकूल पतली सी छोटी कुरती खरीद कर ले आया ताकि रात में मां को आराम मिल सके वो छोटी कुरती सिर्फ पतली ही नहीं बल्कि छोटी भी थी पुष्पा की नाभी भी किसी तरह ही ढंक रहे थे सुरेश ने बताया कि दिल्ली में सभी औरतें इस तरह की छोटी कुरती पहन कर ही सोती हैं
पुष्पा ने किचन में जा कर अपनी पहले के सभी कपड़े खोले और छोटी कुरती और पैंटी पहन ली छोटी कुरती किसी पतले गमछे की तरह काफी पतली थी जिस से छोटी कुरती उसके बदन से चिपक गए थे पुष्पा का जवान जिस्म अभी 32 साल का ही था
उस पर पहाड़ी औरत का जिस्म काफी गदराया हुआ था गोरी और जवान पुष्पा के चूचे बड़े बड़े थे छोटी कुरती का गला इतना नीचे था कि पुष्पा के चूचे का निपल सिर्फ बाहर आने से बच रहा था पुष्पा वो छोटी कुरती पहन कर किचन से बाहर आई सुरेश ने अपनी मां को इतनी पतली सी छोटी कुरती और पैंटी में देखा तो उसके होश उड़ गए
पुष्पा के पूरे जिस्म का अंदाजा इस पतली सी छोटी कुरती से साफ साफ दिख रहा था सुरेश ने तो कभी ये सोचा भी नहीं था कि उसकी मां की चूची इतनी बड़ी होगी
वो सिगरेट पीते हुए बोला- अच्छी है देखना गरमी नहीं लगेगी
उस रात पुष्पा सचमुछ आराम से सोई लेकिन सुरेश का दिमाग मां के बदन पर टिक गया था वो आधी रात तक अपनी मां के बदन के बारे में सोचता रहा वो अपनी मां के बदन को और भी अधिक देखना चाहने लगा उसने उठ कर कमरे की लाईट जला दी उसकी मां की छोटी कुरती पुष्पा के पेट के ऊपर तक चढ़ चुकी थी
जिस से पुष्पा की पैंटी भी सुरेश को दिख रही थी सुरेश ने गौर से पुष्पा की चूची की तरफ देखा उसने देखा कि मां की चूची का निपल भी साफ साफ पता चल रहा है वो और भी अधिक पागल हो गया उसका लंड अपनी मां के बदन को देख कर खड़ा हो गया वो बाथरूम जा कर वहां से अपनी सोई हुई मां के बदन को देख देख कर मुठ मारने लगा
मुठ मारने पर उसे कुछ शान्ति मिली और वापस कमरे में आकर लाईट बंद कर के सो गया सुबह उठा तो देखा मां फिर से अपने पुराने कपड़े पहन कर घर का काम कर रही है लेकिन उसके दिमाग में पुष्पा का बदन अभी भी घूम रहा था अगले 2 रात वो पुष्पा के बदन की कल्पना कर कर के पागल हो गया
पुष्पा भी अब अपने बेटे के सामने ही कपड़े बदल लेती थी जब भी पुष्पा उसके सामने छोटी कुरती और पैंटी में रहती तो सुरेश अपने गमछी के अन्दर हाथ डाल कर अपने लंड को सहलाते रहता था कई बार पुष्पा ने रात को सुरेश के पतले से गमछे के भीतर एक जवान लंड को खड़ा होते हुए देख चुकी थी
इस में पुष्पा को भी अब लाज नहीं लगती थी अब सुरेश पुष्पा का पूरा जिस्म नंगा देखना चाहता था एक रात सुरेश ने सिगरेट सुलगाया और मां से पूछा- मां मैं तो तेरे लिए सिर्फ एक ही छोटी कुरती लाया हूं तू हर रात उसे ही पहनेगी क्या?
पुष्पा- हां वही पहन लुंगी
सुरेश- नहीं एक और लेता आऊंगा कम से कम दो तो होने ही चाहिए
पुष्पा- ठीक है जैसी तेरी मर्जी
सुरेश शाम को बाज़ार गया और जान बुझ कर बिलकूल झीनी कपड़ों वाली पारदर्शी जालीदार ब्रा खरीद कर लाया
आकर उसने अपनी मां को वो ब्रा दिया और कहा- मां आज रात में सोते समय ये नया ब्रा पहन लेना इसे पहनने के बाद छोटी कुरती पहनने की कोई जरुरत नहीं है
पुष्पा ने ब्रा को देखते हुए खुशी से कहा- अरे वाह ये तो जालीदार ब्रा है
रात में सोने से पहले जब पुष्पा ने वो ब्रा और पैंटी पहना तो ब्रा के अन्दर का सारा नजारा दृश्यमान हो रहा था उसकी गोरी चूची और निपल तो पूरा ही दिख रहा था उस ब्रा और पैंटी को पहन कर वो सुरेश के सामने आई सुरेश अपनी मां के बदन को एकटक देखता रहा
पुष्पा- देख तो बेटा कैसा है ये ब्रा?
सुरेश ने गौर से अपनी मां की चूची और उसके बीच की घाटी और समूचे बदन को एकटक निहारते हुए कहा- अरे मां तू तो एकदम जवान दिखने लगी
यह सुन कर पुष्पा एकदम खुश हो गई उस ने कहा- देख ना ठीक से बैठ नहीं रहा है पीछे का हुक कुछ खराब है क्या? इसे सेट कैसे करूं
सुरेश पीछे से ब्रा के हुक को सही से लगाने लगा मगर हुक लग नहीं रहा था हुक कुछ टेढा था सुरेश ने पीछे से पूरा हुक खोल दिया और हुक ठीक करने लगा उसके सामने उसकी मां की नंगी पीठ थी उसके नीचे पैंटी के अन्दर से गांड की दरार दिख रही थी
किसी तरह कांपते हाथों से सुरेश ने ब्रा का हुक ठीक किया और लगा दिया मगर अब भी ब्रा चूची पर सेट नहीं आ रही थी सुरेश ने सामने जाकर ब्रा को इधर उधर कर चूची को ब्रा में सेट किया ये सब करते समय वो जान बुझकर काफी समय लगा रहा था और हाथ से अपनी मां की चूची को बार बार छूता था और दबाता था
पुष्पा की गोरी गोरी चुचीयों को नजदीक से निहार रहा था इस बीच इसका लंड पानी पानी हो रहा था वो तो अच्छा था कि उसने गमछा पहन रखा था लेकिन उसका लंड इतना तन गया था कि गमछा तम्बू बन चूका था पुष्पा को भी पता था कि उसका बेटा उसकी चुचियों को निहार रहा है लेकिन वो भी मस्त हो रही थी और मस्ती से अपने बेटे से अपनी चूची को ब्रा में सेट करवा रही थी
अचानक उसकी नजर सुरेश के लंड की ओर गई उसने सुरेश के गमछा को तम्बू बना देख समझ गई की सुरेश का लंड खड़ा हो गया है वो सुरेश के लंड के विषय में सोच रही थी और उसके साइज का अंदाजा लगा रही थी उसका लंड पूरे उफान पर था रह रह कर वो अपने लंड को भी दबा रहा था
फिर वो तुरंत बाथरूम गया और अपना गमछा खोल कर अपनी मां की चूची को याद कर कर के लंड को मसलने लगा और मुठ मार कर अपनी गरमी शांत की तब तक उसकी मां कमरे में अंधेरा कर के सो चुकी थी सुरेश वापस नंगा ही बिस्तर पर आया अचानक उसे कब नींद आ गई उसे खयाल भी नहीं रहा और उसका गमछा खुला हुआ ही रह गया
सुबह होने पर रोज की तरह पुष्पा पहले उठी तो वो अपने बेटे को नंगा सोया हुआ देख कर चौक गई वो सुरेश के लंड को देख कर आश्चर्यचकित हो गई उसे पता नहीं था कि उसके बेटे का लंड अब जवान हो गया है और उस पर इतने घने बाल भी हो गए है वो समझ गई कि उसका बेटा अब जवान हो गया है
उसके लंड का साइज देखकर भी वो आश्चर्यचकित थी क्यों कि उसने आज तक अपने पति के लंड के सिवा कोई और जवान लंड नहीं देखा था उसके पति का लंड इस से छोटा ही था हाय कितना मस्त लंड है इसका लंड इतना बड़ा हो गया है और मुझे पता भी नहीं चला काश एक बार ऐसा लंड मेरी चूत में मिल जाता कमबख्त कितने दिन हो गए चुदाई हुए
वो अभी सोच ही रही थी कि अचानक सुरेश की आंख खुल गई और उसने अपने आप को अपनी मां के सामने नंगा पाया वो थोडा भी शर्मिदा नहीं हुआ और आराम से गमछे को लपेटा और कहा- वो रात में काफी गरमी थी इसलिए मैंने गमछा खोल दिया था वैसे जब तू यहां नहीं रहती थी तो मैं तो इसी तरह ही सोता था
पुष्पा ने थोडा सा मुस्कुरा कर कहा- तो अभी भी सो जाया करो ना बिना कपड़े के मुझसे शर्म कैसी? मैं अभी तेरे लिए चाय बना देती हूं
सुरेश ने सिगरेट के कश लेते हुए कहा- अच्छा? तुम्हे कोई दिक्कत नहीं?
पुष्पा- नहीं रे अपने बच्चे से क्या दिक्कत?
पुष्पा किचन में चाय बनाने तो चली गई लेकिन वो सुरेश के लंड को देख कर इतनी गर्म गई कि किचन में ही उसने अपनी चूत में उंगली डाल कर मुठ मार लिया तब कहीं उसे शान्ति मिली
उसी रात पुष्पा फिर से सिर्फ ब्रा और पैंटी पहन कर सुरेश के बगल में सोयी सुरेश ने आधी रात को अपना गमछा पूरी तरह खोल दिया था और पुष्पा के उठने से ठीक पहले पेशाब लगने की वजह से उठ गया और नंगे ही बाथरूम जा कर वापस आया और अपनी मां के बगल में लेट गया
बाकी कहानी maa beta sex story के अगले भाग मां बेटे की कामुक कहानी- 2 में पढ़े