आप ने maa beta sex story के पिछले भाग अंधेरे में बेटे से चुद गई- 2 में पढ़ा अब किसी भी पल उसका छूटने वाला था मैं अपनी चूत में उसके रस की बौछार का इंतज़ार कर रही थी के अचानक कानो में बहुत ऊंची बाहर से शोर सुनाई दिया हम दोनों रुक गए अब आप maa beta sex story में आगे पढ़े
Mom Hindi Sex Story 3
वो फायर अलार्म था मैं घबरा कर उठी और दौड़ कर दरवाजे के पास गई और लाइट का स्विच ढूंढने लगी नहीं रुको लाइट मत जलाओ वो घबराई मगर बेहद जानी पहचानी आवाज़ मेरे कानो में गूंज उठी मगर देर हो चुकी थी उसके बोलने से पहले ही में स्विच ऑन कर चुकी थी कमरा रौशनी से जगमग उठा और फिर मैंने उस अजनबी को देखा
उस अजनबी को देखते ही मेरे पांव तले जमीन खिसक गई वो कोई और नहीं था दीनू था जो कुछ क्षण पहले मुझे घोड़ी वनाकर चोद रहा था मेरा अपना बेटा मेरे सामने पूरा नंगा खड़ा था मेरी सारी सोच समझ जवाब दे गई मैं क्या करूं कुछ समझ नहीं आ रहा था
मेरा बेटा मेरे सामने नंगा खड़ा था और उसका मोटा लम्बा लंड मेरी आंखों के सामने ऊपर नीचे हो रहा था और वो मेरे पूरे जिस्म को फटी फटी आंखों से देख रहा था
दीनू यह तुमने क्या मेरी बात पूरी ना हो सकी उसके लंड से तेज़ जोरदार वीर्य की पिचकारी सीधी मेरी नाभि पर आकर गिरी और उसका रस बहकर नीचे मेरी चूत की और जाने लगा मैं हैरान होकर देख रही थी के दूसरी फुहार निकल कर एकदम सीधी मेरी चूत से टकराई ओह्ह्ह दीनू के मुंह से सिसकी निकल गई
दीनू की नज़र मेरी चूत पर जमी हुई थी और उसके लंड से वीर्य की तेज़ फुहारे मेरी चूत को नहला रही थी अचानक मुझे होश आया मैं घूमी और फटाफट बाथरूम की और भागी मैंने भढाक से दरवाजा बंद कर दिया अपने कपड़े पहनो और जाओ देखो क्या हुआ है मैं आती हूं अभी जल्दी करो मैंने एक सेकंड बाद हल्का सा दरवाजा खोल उसे कहा और फिर से दरवाजा बंद कर दिया
मैंने शावर खोला और अपने चेहरे को हाथों से ढक कर अपने अंतर में चल रहे मनमंथन को शांत करने का प्रयास करने लगी कुछ ही क्षणों में इतना कुछ घट चूका था के दिमाग ने काम करना बंद कर दिया था
वो अजनबी मेरा पति नहीं था इस बात का आभास तो मुझे उसी क्षण हो गया जब उसका लंड मेरी चूत के अंदर घुसा था मगर वो मेरा अपना बेटा निकलेगा इसकी तो मैंने कल्पना तक नही की थी
मगर यह हुआ कैसे? वो आखिर मेरे कमरे में कैसे आया? उसे मालूम नहीं था के वो उसकी मां का कमरा है? उसे मालूम नहीं चला के वो अपनी ही मां को चोद रहा है? आखिर यह हुआ कैसे? उसने मेरी आवाज़ को क्यों नहीं पहचाना? हर पल दिमाग में नया सवाल कोंध रहा था और मेरे पास एक भी सवाल का जवाब नहीं था
पानी से बदन को रगड़ रगड़ कर साफ करने लगी जैसे उस गुनाह का हर सबूत मिटा देना चाहती थी जो मैंने अपने बेटे के साथ मिलकर किया था और जिसके गवाह हम दोनों थे मेरा हाथ चूत पर गया तो पूरा बदन सनसना उठा उसके रस से पूरी जांघे भरी पड़ी थी
मैंने अपनी जांघे खोल पानी की धार को अपनी चूत पर केंद्रित किया मेरा पूरा हाथ चिपचिपा हो गया था बहुत ही गाढ़ा रस था एकदम मख्खन की तेरह मैंने अपनी दो उंगलियां चूत के अंदर घुसाई तो मेरा हाथ फिर से भर गया उफ्फ्फ नजाने कम्बखत ने कब से जमा करके रखा था पूरी चूत लबालब भरी पड़ी है
कोई 5 मिनट की मेहनत के बाद में बेटे की चिकनाई को धो सकी मैंने घूम कर पीठ को भी साफ करना चाहा के तभी मेरी नज़र बाथरूम के शीशे पर पड़ी शीशे पर ऊंची ऊंची लाल लपटे नाच रही थी अचानक से मुझे होश आया फायर अलार्म ऐसे नही बजा था जैसे मुझे शुरू में लगा था सच में आग लगी हुई थी
मैंने तुम्हारे डैड को नही बताया इसका मतलब यह नही के मैंने तुम्हे माफ़ कर दिया है चाहे तुमने मेरा बेटा होते हुए मेरे साथ बहुत गंदी हरकत की है मगर मैं मां होने का फर्ज़ नहीं भूल सकती लेकिन अब मुझसे ज्यादा उम्मीद मत करना अब मैं तुम्हारी मां सिर्फ तुम्हारे बाप के सामने हूं मुझे नहीं लगता मैं तुम्हे कभी माफ कर पाऊंगी
उस दिन के बाद मैंने अपने बेटे से दूरी बना ली थी मैं एक मां का फर्ज़ जरूर पूरा कर रही थी उसका खाना बनाना कपड़े धोना इत्यादि काम मैं उसके जरूर कर रही थी मगर मां के प्यार और स्नेह से उसे मैंने पूरी तरह वंचित रखा था मैंने हम दोनों के बीच एक ऐसी दीवार खड़ी कर ली थी जिससे हम दोनों एक ही घर में रहते हुए भी अलग कर दिया था
अब हम दोनों में लगभग ना के बराबर ही बातचीत होती थी जब कोई बेहद जरूरी बात होती तो मैं उसे बुलाती थी जैसे दो दिन पहले मैंने उसे पॉकेट मनी के बारे में पूछा था और उसने इंकार में धीरे से सर हिला दिया था
उसके पास पैसे नहीं थे और इसके बाद मैंने उसे कुछ रूपये जेब खर्च के लिए दिए थे क्योंकि घर का खर्च और हिसाब किताब सब मेरे पास होता था और उसकी जरूरते भी में ही पूरी करती थी
लेकिन रात को एक अजनबी मेरे सपनो में आता और वो मुझे उत्तेजित कर देता लेकिन में उस सपने को नजर अंदाज कर देती में जानती थी वो अजनबी कौन हे अब दूरी तो उसने भी मुझ से बना ली थी मैंने तो जरूरत पड़ने पर दो तीन बार उसे बुला ही लिया था मगर उसने एक बार भी बात करने की कोशिश नहीं की थी पैसे ना होने पर भी उसने मुझसे मांगे नही थे
मगर एक दूसरे से बात ना करने की हमारी वजह अलग अलग थी मैं उसे उसकी करतूत के लिए सजा दे रही थी जबके वो अपना बचाव कर रहा था वो इस बात की पूरी कोशिश करता था के हमारा आमना सामना कम से कम हो जा बिलकुल ना हो सुबह कॉलेज को जाना और कॉलेज से सीधा घर आना खाना खाने भी वो हमारे बुलाने के बाद ही आता था
अपने बाप से भी बेहद कम बोलता था यहां तक के उसने कॉलेज के सिवा और कहीं जाना बिलकुल बंद कर दिया था पहले वो रोजाना अपने दोस्तों के साथ क्रिकेट खेलने जाता था हफ्ते में एक दो बार सिनेमा देखने जा फिर यूं ही कहीं घूमने चले जाना जैसे आजकल जवान छोकरे करते हैं लेकिन नहीं उसने कॉलेज के सिवा सब बंद कर दिया था
मुझे लगता था शायद उसे इस बात का डर था के कहीं मैं किसी बात पर उससे गुस्सा ना हो जाऊं और उसके बाप के सामने उसकी पोल ना खोल दूं मेरी नाराज़गी तो वो यकीनन किसी भी हालात में नहीं चाहता था या फिर शायद वो बात के ठंड पड़ने के इंतज़ार कर रहा था और उसकी यह शराफत वकती तौर पर उसका ढोंग मात्र थी
वजह कुछ भी हो मगर हम दोनों के एक दूसरे से इस तरह कट जाने से घर में एक दम शांति छा गई थी असहनीय शांति और भयानक चुप्पी से हमारा घर घर ना होकर समशान लगने लगा था
कभी कभी तो मुझे डर लगने लगता था बेटा घर में होता भी तो अपने कमरे से बहार नही निकलता था और मैं उसके कमरे में जाती नहीं थी मैं जाती थी उसका बिस्तर बनाने जा फिर गंदे कपड़े उठाने मगर तभी जब वो कॉलेज गया होता
वो बंद कमरे में क्या करता था मैं नहीं जान सकती थी अपनी पढ़ाई कितनी करता था सोता कितना था जा फिर इंटरनेट पर गंदी फिल्म्स देखता था जा chudai kahani com पर mom hindi sex story पढ़ता था
मेरे पास जानने का कोई मार्ग नहीं था उसके कमरे से मुझे ढूंढने पर भी कोई आपत्तिजनक चीज़ नहीं मिली थी और पासवर्ड प्रोटेक्टर होने के कारन उसका कंप्यूटर तो मैं चला नहीं सकती थी
एक महीना बीत चूका था और अब मुझे चिंता होने लगी थी उसकी इतनी बड़ी हरकत के बाद मेरा उससे इतनी कठोरता से पेश आना स्वाभाविक था मगर जिस तरह वो एकदम से एकाकी जीवन ब्यतीत करने लगा था वो सही नहीं था मैंने तो सोचा था एक दो महीने उसे बात नहीं करूंगी उसे थोड़ी बहुत सजा दूंगी मगर मुझसे ज्यादा तो वो खुद को सजा दे रहा था
मैंने उसे क्या डराना था उसने उल्टा मुझे डरा दिया था मुझे पहले पहले उसकी यह चुप्पी ड्रामा लग रही थी शायद वो दुखी होने का ढोंग करके मेरी सहानुभूति चाहता हो ऐसी सम्भावना बहुत थी लेकिन एक महीना बीत जाने के बाद भी जब उसके सवभाव में कोई बदलाव नहीं आया तो मैं उसके अंतर में झांकने की कोशिश करने लगी
खाने के टेबल पर जब वो हमारे साथ बैठता तो मैंने उसके चेहरे को पढ़ने की कोशिश की वो खाना भी खाता था तो चेहरा झुकाकर नज़र तो वो मिलाता ही नहीं था उसे देखकर कहना मुहाल था
वो एक्टिंग कर रहा है इतनी सहनशीलता वो भी इतने लंबे समय तक धारण किये रहना बहुत ज्यादा मुश्किल है मुझे अब लगभग यकीन हो चला था के वो ढोंग नहीं कर रहा था बल्कि वास्तव में वो बहुत डरा हुआ है
अब सबसे बड़ा सवाल यह था के क्या उसे अपने किये पर पछतावा है? अब उसने जो किया था उसके नतीजे से उसे डर लगना स्वाभिक ही था ऊपर से मैंने उसे उसके बाप का डर दिया था घर से निकाले जाने का डर यकीनन बहुत बुरा होता है
तो वो डरा हुआ था खामोश था इस मुश्किल घड़ी से किसी तरह बच निकलना चाहता था मगर लेकिन क्या वो अपने किये पर शर्मिंदा था? शर्मशार था मुझे नहीं लगता था वो पछता रहा है
अब मैं अजीब से संकट में फस गई थी अगर मैं उसका डर दूर नहीं करती तो मुझे चिंता थी कहीं वो किसी मनोरोग का शिकार ना हो जाए और अगर मैं उसका डर दूर करने की पहल करती तो वो मुझे कमजोर मान सकता था और इतनी आसानी से बच निकलने पर बहुत संभव था वो दोबारा मुझे चोदने की कोशिश करता
मैं कुछ फैसला करती उससे पहले मेरी मुसीबत का हल मेरे पति ने कर दिया घर में हर वक़त छायी रहने वाली चुप्पी और हम दोनों मां बेटे के बीच किसी बातचीत के ना होने की और उनका धयान जाना स्वाभाविक ही था वो गुरुवार का दिन था और हम जैसा लगभग पिछले एक महीने से चल रहा था चुपचाप खाना खा रहे थे
शीतल मैं बहुत दिनों से देख रहा हूं तुम और दीनू आपस में बात नहीं करते बिलकुल भी बात नहीं करते क्यों? जबसे शादी से लौटे हैं घर में इतनी चुप्पी छायी हुई है मानो यह घर नहीं कोई वीरान खंडहर है आखिर बात क्या है? अचानक से मेरे पति ने खाना कहते हुए मुझे पूछा तो मैं सकपका गई मैं अपनी सोच में गुम थी इसलिए अपने पती को क्या जवाब दूं मुझे कुछ सुझा नहीं
कुछ बात नहीं है आपको यूं ही लग रहा है मैंने बात टालते हुए कहा मेरे दिल में एक बार भी यह ख्याल नहीं आया था के घर के माहोल की तरफ मेरे पति की नज़र भी जायेगी और वो इसकी वजह जानना चाहेगा कुछ बात नहीं है मुझे यूं ही लग रहा है तुम्हे क्या लगता है मुझे दिखाई नहीं देता जा मैं मुर्ख हूं? तुम गुमसुम सी रहती हो और दीनू को तो मानो सांप सूंघ गया है
आखिर तुम दोनों में लड़ाई किस बात की है? पति ने खीझकर पूछा जरूर वह कई दिनों से देख रहे थे मगर चुप थे उफ्फफ ऊहह्ह कोनसी लड़ाई किस बात की लड़ाई आपको ग़लतफहमी हुई है और आपने मुझे कब गुमसुम देख लिया मैं पति को झुठलाती बोली लेकिन मेरी बात में दम नहीं था इसलिए इस बार वो अपने वेट से मुखातिब हुए
दीनू तुम्हारी मां तो साफ झूठ बोल रही है तुम ही बता दो आखिर बात क्या है? तुम दोनों आपस में बोल क्यों नहीं रहे हो? डैडी वो बात नहीं बेटे की बोलती बंद हो गई वो मेरी तरफ देखने लगा
आप भी ना खामखाह बात का बतंगड़ बना देते हैं अगले महीने उसके एग्जाम शुरू होने वाले हैं उसका पूरा ध्यान पढ़ाई पर है और वैसे भी आपको मालूम तो है उस रात होटल में आग लगने के बाद बोलते हुए मुझे झुरझुरी सी आ गई पति को ठंडा करने के लिए अब कुछ ढोंग तो करना ही था
मेरे पति पर तुरंत असर हुआ और उसने टेबल के ऊपर से मेरा हाथ पकड़ कर दबा दिया और मेरी और देखते हुए बड़े ही प्यार से मुस्करा दिए मैंने मन ही मन चैन की सांस ली बला टली कुछ देर के लिए कमरे में फिर से चुप्पी छा गई मैंने बेटे की और देखा तो उसका चेहरा लाल हो गया था
यकीन नहीं होता तुम्हे एग्जाम की इतनी फिकर है कुछ देर बाद पति ने बेटे जो मज़ाक करते हुए कहा तो मैंने उन्हें घूर कर देखा खैर भगवन की कृपा से हम सभ उस रात बच गए और अब उसे याद कर कर परेशां क्यों होना भूल जाओ उस रात को और वैसे भी मुझे इस तरह ख़ामोशी पसंद नहीं है बेचैनी महसूस होती है और बरखुरदार तुम तुम अपनी मां का ध्यान रखा करो
अब मेरा तो पूरा दिन ऑफिस में निकल जाता है और अगर तुम भी अपने कमरे में बंद रहोगे तो तुम्हारी मां का ख्याल कौन करेगा? इसलिए यह तुम्हारी जिम्मेदारी है के तुम अपनी मां का ख्याल रखो उसके काम में हाथ बंटाया करो उसे कहीं घुमा लाया करो कहीं शौपिंग वगेरह के लिए ले जाया करो उसका भी मन बहल जायेगा मेरे पति बेटे को लंबा चौढ़ा भाषण देते बोले
जी डैडी बेटा धीरे से बोला
यह भीगी बिल्ली की तरह रहना बोलना बंद करो मरद बनो मरद हम तुहारी उम्र में गर्दन अकड़ कर चलते थे और तुम पर जैसे जैसे जवानी चढ़ रही है तुम ठन्डे पढ़ते जा रहे हो मेरे पति बेटे का कन्धा थपथपा कर बोले उसके गाल कुछ और लाल हो गए थे
हां हां बहुत अच्छी बात है आपका समझाने का तरीका तो माशाअल्लाह आप क्या चाहते हैं वो पढ़ाई छोड़ कर आवारागर्दी करने लग जाये जी नहीं वो जैसा है बहुत अच्छा है मैं मुस्कराती पति को टोकती हुई बोली अरे बेगम साहिबा यह उम्र पढ़ाई के साथ साथ मस्ती करने की भी होती है
तुम क्या चाहती हो वो बंद कमरे में सारा दिन किताबों के पन्ने ही पलटता रहे ऐसा नहीं चलेगा अरे जवानी में मरद बड़े बड़े किले फतेह कर लेता है हमें देखो हम क्या थे और आज क्या हैं मेरे पति खुद पर गर्व करते बोले अब उन्हें क्या पता जिस बेटे को वो मर्दानगी का पाठ पढ़ा रहे है उसी बेटे ने उसकी बीवी पर मर्दानगी की ऐसी छाप छोड़ी थी जितनी वो आज तक नहीं छोड़ पाये थे
अपने मोटे लंड के ऐसे ताबड़तोड़ धक्के लगाये थे के पूरी चूत सूज गई थी बस कीजिये बस कीजिये वर्ना मेरी हंसी निकल जायेगी मैं हंसते हुए पति को चिढ़ाते हुए बोली तभी मेरा बेटा उठ खड़ा हुआ शायद वो हमारी बातचीत के कारन असहज महसूस करने लगा था
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