आप ने hindi sex story mom के पिछले भाग धार्मिक यात्रा पर मां को नंगी देखा- 5 में पढ़ा मां बिल्कुल जड़वत हो गई उसका पूरा बदन अकड़ गया मैंने अपने हाथ रोक दिए कुछ पल बाद जब मां का बदन ढीला पड़ने लगा तो मैंने फटाफट बटन खोल दिए और अपनी उंगलियों से चूचियों का ऊपरी हिस्सा सहलाने लगा अब आप hindi sex story mom में आगे पढ़े
Hindi Sex Story Mom 6
मां ने मेरे कंधे को कस के पकड़ लिया और दूसरे हाथ से मेरी पीठ को पकड़कर मुझे आलिंगन कर लिया मैं अपने हाथ को नीचे ले जाकर मां की चूचियों को सहलाने लगा मैंने कुर्ते के बाहर से मां की नाभि को सहलाया फिर मैंने कुर्ते के नीचे से अंदर हाथ घुसाने की कोशिश की लेकिन कुर्ता मां के नीचे दबा हुआ था
मां ने थोड़ा सा अपने नितंब ऊपर को उठाए और मैंने कुर्ता उनके नीचे से हटा दिया फिर मैंने नीचे से कुर्ते के अंदर हाथ डाला तो अपने पेट पर मेरे हाथों के स्पर्श से मां ने सिसकारी ली कुछ पल तक मैं मां के मुलायम पेट पर हाथ फिराता रहा और उनकी नाभि को सहलाता रहा फिर मैं ऊपर को बढ़ा और उसकी चूचियों को छुआ
एक बार फिर से मां का बदन अकड़ गया लेकिन उसने कोई विरोध नहीं किया मुझे टाइट पकड़े हुए वो सिसकारी ले रही थी मां की ब्रा के ऊपर से ही मैंने दोनों चूचियों को धीरे से दबाया
फिर मैंने मां के होठों को चूमा और एक हाथ पीछे ले जाकर ब्रा के हुक खोल दिए ब्रा की क़ैद से चूचियों को आज़ाद करके मैं उन्हे दबाने और सहलाने लगा अंगूठे और बीच वाली उंगली के बीच निपल को दबाकर मैंने धीरे से मसला मां के मुंह से ओह्ह्ह मां निकला और वो बेड पर पीछे को लेट गई
मैं भी कोहनियों के बल मां के पास लेट गया हम दोनों की नज़रें मिली और फिर उसने अपनी आंखें बंद कर ली मैंने मां का कुर्ता उतारने की कोशिश की मां ने अपनी बांहे उठाकर मुझे मदद की जैसे ही मैंने कुर्ता उतारा मां ने अपनी बांह आड़ी रखके चूचियां ढक ली
मैंने मां का चुंबन लिया और उसकी बांह हटा दी मैंने उसकी बड़ी चूचियों को मसला और ऐरोला और निपल को जीभ से चाटा निप्पल पर मेरी जीभ लगते ही मां ने ज़ोर से सिसकारी ली और अपनी बांह मेरे ऊपर रख दी
अब हम प्रेमी जोड़े की तरह से थे मां की शरम और हिचकिचाहट दूर हो चुकी थी वो धीरे धीरे मेरा साथ दे रही थी वो एक ऐसी शर्मीली लड़की की तरह व्यवहार कर रही थी जिसे पहली बार छुआ गया हो
मैंने दोनों हाथों में चूचियां पकड़कर ज़ोर से दबा दिया मां ने आह भरी और आंखें खोल के मुझे देखा मेरा सर पकड़कर वो मेरे चेहरे को नज़दीक लाई और मेरा चुंबन लेते हुए मेरे मुंह के अंदर जीभ डाल दी अब हम दोनों जोरदार तरीके से चुंबन लेने लगे उसने मेरे गालों और माथे को चूमा और फिर से होठों को बेतहाशा चूमने लगी
मैंने अपना हाथ नीचे ले जाकर मां के पेट पर फिराया और फिर पैजामे के एलास्टिक के अंदर हाथ डाल दिया मैंने उठकर मां की आंखों में देखा मां ने शांति से मुझे देखा उसके चेहरे पर कोई भाव नहीं थे मेरा हाथ पैजामे के अंदर नीचे को बढ़ता गया और मां के चेहरे के भाव बदलते गये
जैसी ही मेरे हाथ ने उसकी चूत को छुआ मां ने अपने निचले होंठ को दांतों से काट लिया और अपना मुंह दूसरी तरफ घुमा लिया
मैंने दूसरे हाथ से मां का मुंह घुमाकर सीधा कर दिया और मां की चूत के उभरे हुए भाग को हथेली में पकड़ लिया मां ने अपनी आंखें कस कर बंद कर रखी थी
मां मुझे देखो लेकिन उसने आंखे नहीं खोली
मैंने ज़ोर से मां की चूत को उंगलियों से पकड़कर दबा दिया मां प्लीज़
मां ने अपनी आंखे खोल दी और मैंने देखा उसकी आंखों में कामोन्माद दिखा चूत की दरार की पूरी लंबाई पर मैं उंगली फिराने लगा ऊपर से नीचे तक मां अपने होठों को काटने लगी उसने अपनी ठोड़ी ऊपर उठा ली और उसकी जांघें ढीली पड़ गई
मां की गीली चूत में मैंने बीच वाली उंगली डाल दी आह्ह्ह आह्ह्ह उफ्फफ मां मां ने सिसकारी ली और अपनी बांहों में भरके ज़ोर से मेरे होठों का चुंबन ले लिया
मां ने अपनी जांघें थोड़ी फैला दी मैंने दो उंगलियां डालकर चूत में अंदर बाहर करना शुरू किया मां ने मेरे होंठ काट लिए और मेरे मुंह में अपनी जीभ घुमाने लगी
मैं नीचे को जाकर मां के तने हुए निपल को होठों के बीच लेकर बच्चे की तरह चूसने लगा फिर और नीचे को जाकर मां के पेट पर जीभ फिराने लगा मां की चूत में उंगली करना जारी रखते हुए मैंने उनके मुलायम पेट पर दांतो से हल्के हल्के काट लिया
मां उफ्फ आह्ह्ह आह्ह्ह करती रही
मैंने मां की चूत से उंगलियां बाहर निकाल ली और उनके पैजामे को नीचे खिसकाने लगा पैजामा उनके नीचे दबा हुआ था इसलिए मैं नीचे नहीं कर पाया मैंने उनकी नाभि पर जीभ फिराई और उन्होने थोड़ा सा बदन उठाकर पैजामा उतारने दिया मैंने घुटनो तक पैजामा खींच लिया और फिर मैं उनके ऊपर लेट गया
मैंने कोहनियों के बल ऊपर उठकर मां को देखा मां ने अपनी नज़रें नहीं हटाई उसकी गहरी आंखों में शांति का भाव था उसके चेहरे पर मुझे हल्की सी मुस्कुराहट दिखी उसने दोनों हाथों से मेरी टीशर्ट पकड़ी और सर के ऊपर से उतार दी
अब मां के हाथ मेरी पूरी पीठ को सहला रहे थे कंधों से लेकर नीचे नितंबों तक मां अब अपनी नज़र फेर नहीं रही थी वो सीधे मेरी आंखों में देख रही थी
फिर मैं अंगूठे से मां की क्लिट को मसलने लगा और दो उंगलियां चूत के अंदर बाहर करने लगा
मां ने अपने होंठ काट लिए और कमर ऐंठ कर टेडी कर दी आह्ह्ह आह्ह्ह ओह्ह्ह सुरेश बर्दाश्त नहीं हो रहा है इतनी दूर ले आए हो की अब वापस नहीं लौट सकती प्रेम या वासना फर्क बहुत कम होता है
मेरे बेटे मुझे स्वयं अपने ही भाव का भान नहीं है तुम अपने को समझो अगर सब उन्माद ही है तो तुम्हें मेरी सौगंध ये आख़िरी बार ही होगा बेटा मुझे और नीचे मत गिराना ये क्या है यह तो मैं भी नहीं जानता मां संभवत यह प्रेम और वासना में से कुछ भी नहीं है यह तो उपासना है
अब मैं आपको हिंदू दर्शन पर व्याख्यान तो नहीं दे सकता बोलिये शिवलिंग क्या है लिंग और योनि का समागम ही तो है जो की सृष्टि की रचना का आधार है मां मैं आपकी योनि को अपना लिंग समर्पित करता हूं जहां से मेरा जन्म हुआ था उस चक्र को पूर्ण करने के लिए
बोलिये मां आप कहती हैं की ये पाप है तब तो क्या संसार के सभी प्राणी अपने माता पिता के पाप का फल हैं बच्चे के जन्म पर खुशियां क्यों संतान पाप का फल है या परमात्मा का वरदान अब ये मत कहना की किसे संभोग का अधिकार है और किसे नहीं पिताजी जिन्हें आपने विवाह के पहले ना देखा था ना ही प्रेम किया था
वो आपके साथ संभोग कर सकते हैं उनका आपके साथ यौन संबंध हो सकता है तो फिर आपके अपने शरीर से ही उत्पन्न आपकी संतान का प्रेम शरीर पर आकर पाप क्यूं हो जाता है? बताए मां ऐसा क्यूं है?
आपके पास इसका जवाब शायद ना हो लेकिन मुझे तो ये किसी प्रकार का पाप नहीं लगता है आपसे संभोग तो मुझे उपासना लगता है
उफ बेटा कुछ ही घंटो में दार्शनिक हो गए सच ही कहते हैं पुरुष का दिमाग उसकी टांगों के बीच होता है मां शरारत भरी मुस्कान से बोली और मुझे नीचे को खींचकर चूमने लगी
मैंने मां के पैजामे के एलास्टिक में अपने पैर का अंगूठा फसाया और पैजामे को नीचे को खींच दिया मां ने अपने पैरों को हिलाकर पैजामे को अपने पैरो से निकाल दिया अब मेरी प्यारी मां मेरी बांहों में बिल्कुल नग्न थी लेकिन आश्चर्यजनक रूप से मुझे कोई जल्दबाज़ी नहीं थी
एक पुरुष और स्त्री नग्न होकर जैसे एक दूसरे के ऊपर टूट पड़ते हैं वैसा कुछ भी नहीं था मैं शांत भाव से आगे बढ़ रहा था अपना शांत भाव देखकर मुझे खुद हैरानी हो रही थी तभी मुझे मां को पूर्ण रूप से देखने की इच्छा हुई और मैं बेड से उठकर थोड़ी दूर खड़ा हो गया और मां को देखने लगा
मुझे ऐसे देखते हुए पाकर मां ने अपने को ढकने की कोशिश की मैंने नीचे झुककर मां को रोका मां मुझे रति के रूप की ये छवि देखने दो प्लीज़ मुझे इस दृश्य को देखने से वंचित मत कीजिए
मेरी प्रार्थना सुनकर मां शांत पड़ गई उसने अपने घुटने मोड़ लिए और कमर थोड़ी टेडी करते हुए हाथ फैला लिए मां उस पोज़ में खजुराहो के मंदिरों में गढ़ी हुई किसी नारी की तरह कामुक लग रही थी और उसके चेहरे की मुस्कुराहट देखकर तो मेरा पानी ही निकलने को हो गया
मैंने अपना शॉर्ट उतार दिया और मां के बगल में लेट गया एक हाथ मां की गर्दन के नीचे डालकर मैंने उसे चुंबन के लिए अपनी ओर खींचा मां ने चुंबन में पूरा साथ देते हुए मेरे मुंह में जीभ घुसा दी उसके हाथ मेरी नंगी पीठ को कंधे से लेकर नितंबों तक सहलाने लगे
मेरे नितंबों के बीच की दरार पर मां ने उंगलियां फिराई मेरे नितंबों को उसने दबाया और सहलाया अब हमारे बीच अपराधबोध जैसी कोई भावना नहीं रह गई थी
ये इतना आनंददायक था की मैं बिना संभोग किए हुए ही दिन भर मां के साथ ऐसे ही लेटे रह सकता था मेरे लिए जैसे समय रुक सा गया था आनंद के उन पलों को मैं लंबा खींचना चाहता था ऐसा लग रहा था की ये पल कभी खतम ही ना हो
मैंने मां का हाथ पकड़ा और अपने लंड पर रख दिया मां ने पहले हल्के से लंड को छुआ फिर हल्के से पकड़ लिया कुछ पल बाद जो मुझे बहुत लंबे लगे उसने मेरी गोलियों को सहलाना शुरू किया मैंने अपना सर उठाकर मां को देखा
मुझे गर्व है की तुम मेरे ही शरीर से उत्पन्न हो मेरे लंड पर हाथ फिराते हुए मां बोली फिर उसने लंड को ज़ोर से दबाया और मेरा सर नीचे को खींचकर अपनी छाती में दबा लिया
मां की चूचियों के बीच से सर उठाकर मैं नीचे को बढ़ा और उसकी जांघों के बीच आ गया मां की चूत में मुंह लगाने से पहले ही उसने मुझे रोक दिया
सुरेश आज आनंद का समय नहीं है आज बेटा मुझे लाज और संसारिकता की इस दुर्गम नदी के पार ले चलो आनंद के अवसर तो और भी आएंगे इससे पहले की मेरा साहस टूट जाए आज मुझे बहा के ले चल बेटा
मां की चूत में जीभ घुसाने की अपनी इच्छा को रोकते हुए मैं ऊपर को बढ़ा और उसकी जांघो के ऊपर झुक गया अपनी जांघो को फैलाकर मां ने मुझे जगह दी लंड को हाथ से पकड़कर मैंने मां की चूत के होठों और क्लिट पर रगड़ना शुरू किया मां ने अपनी कमर उठा दी और क्लिट को रगड़ने से वो सिसकारी लेने लगी
हे मां इस अलौकिक संसर्ग की अनुमति मांग रहा हूं मुझे अपने पुत्र को अपनी योनि में स्वीकार कीजिए मां मां के दोनों तरफ हाथ रखकर मैंने मां की आंखों में देखा जिनमे आनंद और आंसू दोनों ही मुझे दिखा
आओ मेरा उपभोग करो बेटा तुम्हारी मां तुम्हारा स्वागत करती है परंतु तुमको सौगंध है अपने उत्तरदायित्व और मर्यादा का पालन करने की ऐसा कहते हुए मां ने मेरे लंड को पकड़ा और अपनी चूत के छेद पर लगा दिया अपने नितंबों को थोड़ा ऊपर करके उसने मुझे धक्का देने का इशारा किया
मैंने धीरे से लंड को मां की चूत के अंदर डाला मां की चूत के होठों ने फैलकर मेरे लंड को अंदर घुसने दिया बहुत ही आनंद की अनुभूति हो रही थी फिर मैंने पूरा लंड बाहर निकालकर मां की कमर पकड़कर एक झटके में जड़ तक चूत में घुसा दिया
मां के मुंह से लंबी सिसकारी निकली मैंने सर उठाकर मां को देखा वो अपने होंठ काट रही थी और कमर टेडी कर रखी थी लेकिन मुझे आश्चर्य हुआ की उसकी आंखे बंद नहीं थी वो सीधे मेरी आंखों में देख रही थी वो
मुझे देखती रही फिर उसने मेरे लिए अपनी बांहे उठा दी मैं मां की बाँहो में आ गया और अपने होंठ उसके होठों से मिला दिए मां की चूत की गर्मी अपने लंड पर महसूस करते हुए मैंने मां के मुंह में जीभ घुसा दी
फिर मैं धीरे धीरे लंड को अंदर बाहर करने लगा मां ने अपनी टांगें उठाकर मेरी कमर पर लपेट दी इशारे को समझते हुए मैं लंबे स्ट्रोक लगाकर मां की चुदाई करने लगा आधे से ज्यादा लंड बाहर निकालकर मैं एक झटके से अंदर घुसा दे रहा था जिससे मां का बदन हिल जा रहा था
मां की आंखों में देखते हुए मैं ऐसा करते रहा मां अपने निचले होंठ को काटते हुए उफ्फफ आह्ह्ह ओह्ह्ह आह्ह्ह बेटा उम्माह करती रही मां की सिसकारियों से मैं बहुत उत्तेजित हो गया लेकिन अपने ऊपर काबू रखते हुए मैंने धीमे धीमे चुदाई जारी रखी
मां की चूत में लंड घुसाए रखकर मैं मां के पूरे बदन को देखने लगा मैंने अपने लंड को देखा जो मां की चूत में घुसा हुआ था मैंने थोड़ा अंदर डाला और फिर बाहर निकाल लिया मेरी प्यारी मां की चूत के रस से लंड पूरा भीग गया था
वोही चूत जो कल तक मेरे लिए असंभव थी वोही चूत जिससे मेरा जन्म हुआ था उस फीलिंग को शब्दों में बयान नहीं किया जा सकता मैंने मां की जांघों पर हाथ फिराया और ज़ोर से मांस को दबा दिया मां को देखा वो मुस्कुरा रही थी
जो तुम्हारी आंखों में देख रही हूं वो पाप नहीं हो सकता मेरे बेटे मुझे आज तक आभास नहीं हुआ की क्या ऐसा है जिसकी मुझे तलाश थी
पर अदभुत पूर्णता का आभास हो रहा है ऐसा लग रहा है की मुझे इसका इंतजार था आ मेरे बेटे पूर्ण कर दे अपनी मां को ऐसा कहते हुए मां ने अपनी जांघें उठा दी और अपने नितंबों को ऊपर को मोड़कर अपनी चूत ऊपर उठा दी
मैंने अपने दोनों हाथों पर वजन डालकर चूत पर गहरे धक्के मारने शुरू किए इस पोज़ में बहुत गहराई तक चूत के अंदर लंड घुस जा रहा था धक्कों से मां की चूचियां हिलने लगी और उसने अपनी थोड़ी ऊपर उठा दी
उफ्फफ मां आह्ह्ह बेटा भर दो मुझे बेटा मुझे विश्वास नहीं हो रहा की मैं ये कर रही हूं लेकिन मुझे अच्छा लग रहा है आह्ह्ह आह्ह्ह उफ्फफ ओह्ह्ह ऊईईई आह्ह्ह बेटा
मां ने मुझे और तेज़ी से करने को कहा अब मैं मां की तेज तेज चुदाई करने लगा मां ने अपना सर उठाकर लंड को चूत में घुसते देखा फिर उसने अपनी बांहे मेरी पीठ में लपेटकर मुझे अपनी ओर खींचा मैं नीचे आकर मां की चूचियों के निपल को चूसने लगा इससे मां का आनंद कई गुना बढ़ गया
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