धार्मिक यात्रा पर मां को नंगी देखा- 5

आप ने hindi sex story mom के पिछले भाग धार्मिक यात्रा पर मां को नंगी देखा- 4 में पढ़ा फिर वो सीधी होकर बैठ गई और हाथ पीछे ले जाकर अपने बाल बांधने लगी उसने एक नज़र मेरी तरफ देखा क्या मैंने उसे मुस्कुराते हुए देखा हां वो मुझे देखकर मुस्कुरा रही थी अब आप hindi sex story mom में आगे पढ़े

Hindi Sex Story Mom 5

फिर मैंने उसका हाथ अपने सर पे महसूस किया उसने प्यार से मेरा सर सहलाया फिर मेरे गाल को सहलाया

ये तूने क्या कर डाला मेरे बच्चे मां बोली

मैंने मिरर में देखा मां मेरे ऊपर झुक रही है मैंने सोए हुए का नाटक करते हुए आंखे बंद कर ली मैंने मां की गरम सांसे अपनी गर्दन पर महसूस की मां ने अपने होंठ मेरी बाई कनपटी पर रख दिए और कुछ देर तक ऐसे ही वो अपने हाथ से मेरा सर सहलाती रही

फिर उसने अपने होंठ हटाए और वो बेड से उठने लगी मैंने अपनी आंखे खोली और मिरर में देखा लेकिन तब तक वो बेड से उठ चुकी थी

मैंने कान लगाकर सुनने की कोशिश की बाथरूम का दरवाज़ा खुलने की आवाज़ आई मां बाथरूम में चली गई है समझकर मैं जैसे ही सीधा लेटने को हुआ वो अचानक मिरर में मुझे दिख गई मैंने जल्दी से आंखे बंद कर ली

फिर थोड़ी सी खोलकर देखा मां घूमकर मेरी बेड की साइड में आई और फर्श से अपनी नाइटी उठाने लगी जो मैंने रात में उतार कर फेंक दी थी नाइटी को अपनी छाती से लगाकर वो सामने मिरर में अपने नंगे बदन को देखने लगी उसकी पीठ मेरी तरफ थी

वो दृश्य पागल कर देने वाला था मां अपनी पूरी नग्नता के साथ मिरर के सामने खड़ी थी उसने अपनी नाइटी बेड में रख दी और अपने को देखा वो थोड़ी साइड में घूमी और अपने को मिरर में देखने लगी ऐसा ही उसने दूसरी तरफ घूमकर किया फिर उसने अपनी चूचियों के नीचे हाथ रखे और उन्हे थोड़ा ऊपर उठाया

फिर थोड़ा हिलाया चादर के अंदर ही मेरा पानी निकलने को हो गया वो थोड़ी देर तक अपने को ऐसे ही मिरर में निहारती रही शायद वो गर्व महसूस कर रही होगी की अभी भी उसका बदन ऐसा है की वो उसका जवान बेटा भी उस पर लटटू हो गया

फिर वो थोड़ा पीछे हटी मिरर में अपना पूरा बदन देखने के लिए अब वो मेरे बिल्कुल करीब थी उसके बदन से उठती खुशबू को मैंने महसूस किया उसके पसीने और चूत रस की मिली जुली खुशबू से मैं मदहोश हो गया कमरे में आती हुई सूरज की रोशनी में उसका नंगा बदन चमक रहा था

कुछ समय के लिए मैं दुनिया को भूलकर अपनी देवी जैसी मां को देखते रहा उसकी टांगों और जांघों का पिछला भाग जो मेरी आंखों के सामने था बिल्कुल गोरा और मांसल था कमर से नीचे को उसके विशाल नितंब फैले हुए थे जो मां के हिलने के साथ ही हिल डुल रहे थे

उसकी चूत के बड़े फूले हुए होठों से उसकी गुलाबी क्लिट ढक सी गई थी ज्यादातर गोरी औरतों की चूत भी काले रंग की होती है लेकिन उसकी गोरी थी नाभि के नीचे वो उभरा हुआ भाग बड़ा ही मादक दिख रहा था

मुझे लगा मेरी प्यारी मां रति का अवतार है एक आदमी को जो चाहिए वो सब उसमे था लंबी टांगे अच्छा आकार लिए हुए चूचियां बाहर को निकले हुए विशाल नितंब और नाभि के नीचे उभरा हुआ वो भाग

मैं मां को देखने में डूबा हुआ था तभी मां झुकी और बेड से अपनी नाइटी उठाने लगी उसके झुकने से उसके नितंबों के बीच की दरार से मुझे उसकी चूत दिखी अब मेरा लंड पूरा मस्त हो चुका था मेरा मूड हुआ की मैं वहीं पर ही मां को चोद दूं लेकिन इससे पहले की मैं उठ पाता मां ने नाइटी अपने बदन पर डाल ली और वहां से चली गई

फिर बाथरूम का दरवाज़ा बंद होने की आवाज़ आई मैंने बाथरूम से पानी गिरने की आवाज़ का इंतज़ार किया फिर मैं उठ गया और टीशर्ट और शॉर्ट पहन लिया कमरे में अकेला होने के बाद फिर से मेरे दिमाग़ में उथल पुथल होने लगी मेरी इच्छाओं और नैतिकता के बीच द्वन्द्ध होने लगा

फिर मैंने सोचना छोड़कर दरवाज़ा खोला और बास्केट में से सुबह का अख़बार निकाल लिया फिर नाश्ते का ऑर्डर देकर में अख़बार पढ़ने लगा मौसम के बारे में लिखा था की उत्तर भारत में शीत लहर जारी है लेकिन आश्चर्यजनक रूप से मुझे कोई खुशी नहीं हुई

एक रात पहले जो मुझे मौसम खराब होने पर होटेल में रुकने की खुशी थी वैसा अब महसूस नहीं हो रहा था पता नहीं क्यूं तब मुझे एहसास हुआ की कल रात मां के साथ जबरदस्त चुदाई के बाद अब मेरे और उनके बीच एक चुप्पी सी छा गई है जिसे मैं बर्दाश्त नहीं कर पा रहा था और मैं इसे खत्म करना चाहता था

तभी बाथरूम का दरवाज़ा खुला और मां सिर्फ ब्रा और पेटीकोट पहने हुए बाहर आई मेरी तरफ देखे बिना वो सूटकेस में से अपनी साड़ी निकालने लगी वो थोड़ी देर खड़ी रही फिर उसने कुर्ता और पैजामा निकाल लिया वो कभी कभार ही कुर्ता पैजामा पहनती थी

मां की तरफ सीधे देखने की मेरी हिम्मत नहीं हुई इसलिए मैं आंखों के कोने से उसे देखता रहा फिर मुझसे और टेंशन बर्दाश्त नहीं हुआ और मैं उठा और बाथरूम चला गया बाथरूम में आकर मैंने देखा मेरा लंड मुरझा चुका है अब मुझे उत्तेजना भी महसूस नहीं हो रही थी

मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था तभी मैंने मां को कुछ मैगज़ीन्स और अख़बार का ऑर्डर देते हुए सुना मां को थोड़ी बहुत अंग्रेजी ही आती थी

फिर मैं नहाने लगा ठंडा पानी जब मेरे बदन पर पड़ा तो कांपते हुए मेरे दिमाग़ की उथल पुथल गायब हो गई फिर टीशर्ट और शॉर्ट पहनकर मैं रूम में आ गया

नाश्ता आ चुका था और मां चाय डाल रही थी मैंने रूम सर्विस को लांड्री के लिए कहा और खिड़की से बाहर झांकने लगा हमारे रूम के सामने नीचे स्विमिंग पूल था मैं बच्चों को तैरते हुए देखने लगा

मां ने नाश्ते के लिए बुलाया तो मैं उनके सामने बैठ गया मैंने सीधे मां की आंखों में देखा उन्होने नज़रें घुमा ली और सैंडविच की प्लेट मेरी तरफ सरका दी मैंने सैंडविच उठा लिया और खाने लगा जब भी मैं मां की ओर देखता की वो क्या सोच रही है

तो वो अपनी नज़रें घुमा लेती लेकिन मुझे ऐसा लग रहा था की जब मैं उसको नहीं देख रहा होता था तो वो मुझे देख रही होती थी नाश्ता भी खतम हो गया और हमारे बीच टेंशन बना रहा कोई कुछ नहीं बोला

नाश्ता खत्म होते ही लांड्री के लिए वेटर आ गया मैंने उसको कपड़ों का बैग दिया और मां से पूछा मां आपको कुछ और देना है लांड्री के लिए?

मां ने सिर्फ नहीं कहा फिर जैसे ही वेटर जाने को मुड़ा तो उन्होने सूटकेस से 2 नाइटी निकालकर लांड्री बैग में डाल दी

उसके जाते ही रूम साफ करने के लिए आया आ गई मैं बैठे हुए सोचने लगा अब क्या किया जाए

रूम की सफाई करने के बाद आया ने ट्राली में से 2 साफ चादर निकाली और बेड से पुरानी चादरें हटा दी मैं आया को ऐसे ही देख रहा था तभी उसने पुरानी चादर को अपनी नाक पर लगाकर सूंघा उसमे एक बड़ा सा दाग लगा हुआ था

मुझे इतनी शरम आई की मैंने मुंह फेर लिया और नीचे स्विमिंग पूल को देखने लगा तभी आया मां से कन्नड़ में कुछ बोलने लगी मैं मुड़कर उसे देखने लगा तभी वो टूटी फूटी हिन्दी में धीमे से मां से बोली भगवान अयप्पा के आशीर्वाद से आपको ऐसी बहुत सी रातें बिताने को मिले

फिर ऐसा कहते हुए आया ने मां को वो चादर पर लगा धब्बा दिखाया मां डर गई उसने सोचा रात में जो हुआ वो सब आया समझ गई है उसने जल्दी से 500 का नोट निकाला और आया के हाथ में थमा दिया ताकि आया खुश हो जाए और अपना मुंह बंद रखे और अपने साथ काम करने वालों को कुछ ना बताए

आया ने खुश होकर वो नोट अपने माथे से लगाया और बोली भगवान तुम दोनों को खुश रखे और फिर वो चली गई उसके जाते ही मां ने मुझे देखा शरम से उसका पूरा चेहरा सुर्ख लाल हो गया था

मैं दौड़ कर उसके पास गया और कंधों से उसे पकड़ लिया मां ने मेरी आंखों में देखा और अपनी नज़रें फर्श की तरफ झुका ली मैंने अपने आलिंगन में मां को कस लिया और वो सुबकने लगी मैं कुछ भी नहीं बोल पाया और उसे अपने से चिपकाए रखा

फिर मैं उसे बेड के पास ले गया और बेड पर बिठा दिया और उसकी पीठ बेड के हेडबोर्ड पर टिका दी खुद उसके सामने बैठ गया

तुमने मेरे साथ ऐसा क्यूं किया? क्या तुम्हारे मन में लंबे समय से मेरे लिए वासना थी या फिर मेरे व्यवहार में ऐसा कुछ था जिससे ये घटना हुई?

मैं सीधे मां की आंखों में नहीं देख पाया मैं दूसरी तरफ देखता रहा

मां ने मेरे कंधे पकड़कर मुझे अपनी तरफ घुमाया बताओ बेटा कल रात जो हुआ उसके बारे में बहुत सी बातें करनी है जाननी है

मुझे चुप देखकर मां ने मुझे ज़ोर से झिझोड़ दिया मुझसे बात करो बेटा मैं बर्बाद हो गई हूं हम दोनों ही इस घटना से प्रभावित हुए है

मां मैंने कभी आपको ऐसी नज़र से नहीं देखा लेकिन जब आप बाथरूम में थी और आपने मुझसे नाइटी मांगी थी जिस दिन हम बंगलोर आए थे और फिर मैंने पूरी बात मां को बता दी की कैसे कैसे मेरी काम इच्छा बढ़ती चली गई

पूरी बात सुनकर वो अपने को दोष देने लगी और रोने लगी

मैंने कहा मां ये बात सही है की उस दिन बाथरूम में आपको देखकर ही ये भावना मेरे अंदर आई लेकिन जो कुछ हुआ उसके लिए आप अपने को दोषी क्यूं ठहरा रही हैं आपने तो होनी को टालने की पूरी कोशिश की थी लेकिन आप भी इंसान हैं और शारीरिक इच्छाओं के आगे आपने समर्पण कर दिया

एक गहरी साँस लेकर वो बोली सुरेश सिर्फ एक पल की कमज़ोरी से मेरा सब कुछ छिन गया हे ईश्वर मैंने ऐसा होने कैसे दिया

फिर सुबकते हुए वो कहने लगी अपने ही बेटे की नज़रों में मैं अपना रुतबा खो चुकी हूं मैं अब वो मां नहीं रही जो तुम्हारे लिए पूजनीय थी जिसकी तुम इज़्ज़त करते थे आज से मैं तुम्हारी नज़रों में ऐसी चरित्रहीन औरत हूं जो इस उमर में भी अपनी टांगे फैला देती है

मां प्लीज़ ऐसा ना कहो मैं अब आपको और भी ज्यादा प्यार करता हूं आप ये बात समझ लो की बिना इज़्ज़त के प्यार नहीं हो सकता आप मेरे लिए वो देवी हो जिसके चरणों में मेरा सब कुछ अर्पित है प्यार इज़्ज़त और जरूरत पड़ी तो मेरी जिंदगी भी मैंने कभी अपनी मां के साथ संभोग के लिए नहीं सोचा था

लेकिन फिर भी ये हो गया ये हमारे भाग्य में था या तो हमें इसे स्वीकार कर लेना चाहिए या फिर रोते चिल्लाते रहें कोसते रहें लेकिन भाग्य में जो होगा वो होकर रहेगा

मेरी बात सुनकर मां ने रोना बंद कर दिया और आश्चर्य से बोली क्या तुम मुझे ये समझाना चाहते हो की जो कुछ हुआ वो सही था और हमें इस पाप को करते रहना चाहिए? अपनी काम इच्छाओं को सही ठहराने के लिए भाग्य का बहाना बनाना चाहिए?

मां क्या सही है क्या ग़लत इसका फ़ैसला मैं या आप नहीं कर सकते हैं ये बस यूं ही हो गया और मुझे इसका कोई अफ़सोस या दुख नहीं है आप अपने को देखिए आपने विरोध करने की कोशिश की थी लेकिन कही गहराई में आपके अंदर कुछ था

जिसने आपके विरोध को कमज़ोर कर दिया और उसके बाद आपने भी यौन सुख का भरपूर आनंद लिया मां आप चाहे माने या ना माने लेकिन आपके अंदर भी कुछ ख़ालीपन या शून्य था जिसके बारे में आप खुद अंजान थीं

मां मेरी आंखों में देखिए और मुझसे कहिये की जो कुछ हुआ उसके बाद आप मुझसे घृणा करती हैं और आप इसे जारी नहीं रखना चाहती हैं मेरी सौगंध लीजिए मां उसके बाद मैं कभी आपको परेशान नहीं करूंगा

मेरे हृद्य में आप मेरी काम की देवी की तरह रहेंगी लेकिन मैं आपसे फिर कभी संभोग के लिए नहीं कहूंगा बताइए मुझे मां मेरी आंखों से आंसू बहने लगे

मां ने अपनी बड़ी बड़ी आंखों से मुझे देखा और बड़बड़ाई हे ईश्वर वो मुझे ऐसे ही देखती रही जैसे मुझे नहीं बल्कि मेरे अंदर मेरी आत्मा में कुछ देख रही हो

फिर मैं मां के नज़दीक़ बैठ गया मां ने थोड़ा खिसककर मुझे जगह दी मैंने अपनी बांह मां से लपेटकर उन्हे अपनी ओर खींचा मां ने मेरे कंधे पर अपना सर रख दिया और मेरी छाती पर अपनी बांह लपेटकर मुझे पकड़ लिया मैंने मां के चेहरे को सहलाया तो उनके मुंह से एक सिसकारी निकली और मेरे बदन में अपना चेहरा छुपा लिया

मां को अपने से लगाए हुए मैं बैठा रहा उस समय कुछ ऐसी फीलिंग थी जैसा पहले कभी महसूस नहीं हुआ था वो वासना नहीं थी प्यार भी नहीं था एक अजीब सी भावना थी क्या था मुझे भी नहीं पता

अब मेरे अंदर कोई अपराधबोध या इच्छाओं के बीच संघर्ष नहीं रह गया था सब साफ हो चुका था की मुझे मां की पूजा और उनसे प्यार करने की अपनी दैवीय ज़िम्मेदारी को निभाना है

मां और मेरे शारीरिक संबंध के बावजूद मां का रुतबा और उनके लिए इज़्ज़त पहले जैसी ही रही मां को ऐसे पकड़े रहने और उनकी चूचियों के मेरे बदन से दबने से मुझे उत्तेजना आ रही थी

लेकिन उसके मां होने की भावना भी मेरे मन में आ रही थी किसी भी औरत के साथ मैं इस अवस्था में होता तो उत्तेजना की भावना तो आती लेकिन वो एमोशनल फीलिंग नहीं आती जो मां के साथ आ रही थी

मैंने अपने अंगूठे से मां के होठों को छुआ छूने पर उनके होठों में हुए कंपन को मैंने महसूस किया मैंने धीरे से निचले होंठ को अलग किया और थोड़ा सा अंगूठा अंदर डाला उन्होने अपने होठों से मेरे अंगूठे का हल्का चुंबन लिया

मैंने मां की ठोड़ी ऊपर उठाई अब मां सीधे मेरी आंखों में झांक रही थी उनके होंठ खुले हुए थे मैंने मां की आंखों में देखा और अपने होंठ मां के होठों से मिला दिए

मां के बदन में कंपन हुआ मैंने उनके मुंह में जीभ घुसा दी मां ने कोई विरोध नहीं किया और मजबूती से मुझे पकड़े रखा हम चुंबन लेते रहे मां अपनी तरफ से ज्यादा कुछ नहीं कर रही थी

उसने अपनी जीभ से मेरे होठों को छुआ और कभी कभार मेरे निचले होंठ को अपने होठों में भर लेती थी थोड़ी देर तक ये हल्का फुल्का प्यार चुंबन ऐसे ही चलता रहा फिर मैंने मां के कुर्ते के बटन खोलने शुरू किए

मां बिल्कुल जड़वत हो गई उसका पूरा बदन अकड़ गया मैंने अपने हाथ रोक दिए कुछ पल बाद जब मां का बदन ढीला पड़ने लगा तो मैंने फटाफट बटन खोल दिए और अपनी उंगलियों से चूचियों का ऊपरी हिस्सा सहलाने लगा

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