आप ने hindi sex story mom के पिछले भाग धार्मिक यात्रा पर मां को नंगी देखा- 3 में पढ़ा फिर मैं उसके पैरों को चूमते हुए ऊपर को बढ़ा जब मैं मां के घुटनो के पास पहुंचा तो उसने थोड़ा सा अपनी टांगें फैला दी और मैं उसकी जांघों पर हाथ फिराने लगा अब आप hindi sex story mom में आगे पढ़े
Hindi Sex Story Mom 4
फिर मैं और ऊपर को बढ़ा और अपना मुंह मां की चूत पर रख दिया मां फिर थोड़ा हिली और उसने अपनी जांघें थोड़ी फैलाई मैंने फिर से उसकी चूत को चाटना शुरू कर दिया
मां की सांसे फिर से भारी होने लगी उसके होठों से सिसकारियां निकलने लगी वो फिर से अपने नितंबों को हल्के से ऊपर को करने लगी
मेरी जान मत लो बेटा सुरेश अब बस भी करो
मैं ऊपर की ओर बड़ा और मां की साइड में लेट गया मैंने अपना बायां हाथ मां की गर्दन के नीचे डाला और दाएं हाथ से उनके कंधे को धीरे धीरे सहलाने लगा
फिर मैंने साइड से चूची को चूमा और निपल को होठों में भर लिया मेरे चूसने से मां के निपल सख़्त होने लगे मां के मुंह से हल्की सी ऊहह्ह उफ्फफ की आवाज़ निकली लेकिन उन्होने मुझे रोका नहीं
फिर मैं थोड़ा खिसका और मां का दायां हाथ जो उन्होने अपने पेट पर रखा हुआ था उसको पकड़कर अपने लंड पर लगाया मां ने पहले तो लंड को पकड़ा फिर झटक दिया मां ने कुछ सेकेंड्स के लिए ही मेरे लंड को पकड़ा लेकिन जिस आनंद की अनुभूति मुझे हुई उसे मैं शब्दों में बयान नहीं कर सकता
मां ने अपना चेहरा दूसरी तरफ किया हुआ था और वो चुपचाप थी अब मैंने आगे बढ़ने का निश्चय किया और मैं मां के ऊपर आ गया मां समझ गई उसने उठने की कोशिश की लेकिन मैंने उसे टाइट पकड़े रखा और अपने होंठ उसके होठों से मिला दिए
कुछ पल बाद वो शांत हो गई और उसने अपने होंठ खोल दिए उसने मेरा स्वागत किया या समर्पण कर कर दिया मुझे नहीं मालूम मैंने उसकी चूचियों को सहलाया निपल को चूसा ऐरोला पर जीभ फिराई और उसे चूमा और चाटा फिर मैंने अपना हाथ नीचे ले जाकर अपने लंड को मां की गीली चूत की दरार पर रगड़ना शुरू किया
मां ने दोनों हाथ पीछे ले जाकर बेड का हेडबोर्ड पकड़ लिया और चिल्लाई सुरेश ये मत कर बेटा मैं हाथ से तुम्हारा कर दूंगी पर बेटा अब इस सीमा को मत लांघ
मैंने मां को ओर्गास्म दिलाया था और अब मां उसके बदले मुझे हस्तमैथुन का प्रस्ताव दे रही थी इसका मतलब ये था की वो ये महसूस या कबूल कर रही थी की उसे ओर्गास्म आ चुका है तो सुरेश को भी ओर्गास्म निकालने की जरूरत है
उसका ये प्रस्ताव ही मुझे प्रोत्साहित करने के लिए काफ़ी था अब मुझे चुनाव करना था या तो मैं उसका प्रस्ताव स्वीकार कर लूं या फिर मां मेरी इच्छा के आगे समर्पण कर दे
मुझे जवाब ना देते देखकर मां बोली सुरेश बहुत पछताओगे बेटा बाद में मान जाओ
मैंने मां के होठों को चूमा और बोला अगर ऐसे ही करना है तो मुंह से कर दीजिए
मां ने कहा नहीं लाओ हाथ से कर दूं और फिर अपना हाथ नीचे ले जाकर मेरे लंड को पकड़ लिया मैंने थोड़ी सी जगह दी और मां ने हाथ से मूठ मारनी शुरू कर दी मैंने महसूस किया की मां अनमने ढंग से हस्तमैथुन नहीं कर रही थी बल्कि वास्तव में वो मेरे लंड को सहला रही थी और सहलाते हुए सिसकियां ले रही थी
इससे मैं और भी उत्तेजित हो गया मैंने थोड़ी देर तक मां को ऐसे ही करने दिया मैं उसकी चूचियों को मुंह में भरकर चूसने लगा और उसकी चूत में उंगली डालकर तेज़ी से अंदर बाहर करने लगा
मां सिसकारियां ले रही थी उसके मुंह से निकलती उन सिसकारियों से मैं उत्तेजना से पागल हो गया मैंने उसकी कलाई पकड़ी और अपने लंड से उसका हाथ हटा दिया और फिर से उसके ऊपर आ गया
मां बोली तुम नहीं मानोगे?
लेकिन उसके बोलने की टोन से मुझे लगा की असलियत में वो चाहती है की मैं आगे बढूं क्या उसका विरोध दिखावे के लिए ही था और वो चाहती थी की मैं आगे बढूं या फिर मैंने ग़लत समझा? जो भी हो
मुझे मालूम था यही सही समय है मैंने अपने घुटनो से मां की टांगे फैला दी और उसकी जांघों के नीचे अपने घुटने रख दिए इसे उसकी जांघें मेरी जांघों के ऊपर आ गई मैंने अपने लंड को मां की चूत की दरार की पूरी लंबाई में ऊपर से नीचे तक रगड़ना शुरू किया
मां की आंखे बंद थी और सांसे इतनी भारी थी की उसकी चूचियां ज़ोर ज़ोर से हिल रही थी मैं अब रुक नहीं सका मां की चूत के फूले हुए होठों को अलग करते हुए लंड को मैंने चूत के छेद पर लगा दिया
मां की चूत की गर्मी से ऐसा लग रहा था जैसे मैंने किसी स्टोव में लंड को रख दिया है जैसे ही मैंने अंदर घुसाने को धक्का दिया मां ने झटके से ऊपर को खिसकने की कोशिश की होनी को टालने का ये उसका अंतिम प्रयास था
सुरेशशश नहीं रुक जाओ बेटा मान जाओ ना नहीं आह्ह्ह उफ्फफ आह्ह्ह ओह्ह्ह आह्ह्ह मां
एक धक्के से मैंने समाज के सबसे पवित्र माने जाने वाले बंधन को तोड़ दिया
आधी लम्बाई तक लंड अंदर जा चुका था मैं रुका और लंड को वापस बाहर खींचा और फिर एक झटके में जड़ तक अंदर घुसा दिया
मां सिसकी ऊऊहह्ह मां
मैं कुछ पल के लिए रुका अपनी आंखे बंद की और आनंद की उस भावना को महसूस किया मां की गहरी और गरम चूत की दीवारों ने मेरे लंड को जकड़ रखा था चूत के अंदर बहुत मुलायम महसूस हो रहा था
फिर मैंने आंखे खोलकर मां को देखा बड़ा मनमोहक दृश्य था उसकी जांघें फैली हुई थी टांगे मुड़ी हुई थी और उसके छोटी छोटी सांसे लेने से उसकी छाती और पेट हिल रहे थे
मां ने अपनी बांहे ऊपर उठा रखी थी और हाथों से बेड का हेडबोर्ड पकड़ रखा था जिससे उसकी चूचियां ऊपर को उठी हुई थी उसके बड़े निपल ऊपर को तने हुए आमंत्रण दे रहे थे बेड लैंप की हल्की रोशनी में उसका पूरा गोरा नग्न बदन चमक रहा था
मैं थोड़ा आगे को झुका उसकी जांघों को थोड़ा और ऊपर उठाया और मां के दोनों तरफ अपने हाथ रख दिए फिर थोड़ा और नीचे सर झुकाकर मैंने मां की नाभि को चूमा फिर धीमे लेकिन लंबे स्ट्रोक लगाकर मां की चुदाई करने लगा
मैंने नीचे देखा जहां पर हमारे जिस्म एक में मिल रहे थे मेरा लंड चूत के रस से पूरा भीगा हुआ था मैं लंड को पूरा बाहर निकालकर फिर तेज झटके से अंदर घुसाकर धक्के मारने लगा
मां का पूरा बदन मेरे धक्कों से हिलने लगा वो ज़ोर ज़ोर से सिसकारियां लेने लगी
हे मां उफ़फ्फ़ तुम कितने निर्दयी हो
मुझे मालूम था ऐसे तेज तेज करने से मैं ज्यादा देर तक नहीं ठहर पाऊंगा इसलिए मैं मां के बदन पर लेट गया और फिर धीमे लेकिन गहरे धक्के लगाने लगा मैंने उसकी चूचियों को मुंह में भर लिया और चूसने लगा मेरे चूसने और काटने से चूचियां लाल हो गई
मैंने अपना चेहरा ऊपर बढ़ा के मां के होठों को चूमा मां अब कोई विरोध नहीं कर रही थी विरोध का दिखावा भी नहीं जैसे ही मेरे होठों ने उसके होठों को छुआ उसने मेरी जीभ का स्वागत करने के लिए अपने होंठ खोल दिए
अब मैं सहारे के लिए मां के कंधों को पकड़कर चुदाई करने लगा हर धक्के के साथ कुछ अजीब सी फीलिंग आ रही थी मैंने कभी खुद को इतना उत्तेजित और इतना आनंदित नहीं महसूस किया था अब इस पोज़िशन में मैं तेज तेज शॉट नहीं लगा पा रहा था और जड़ तक लंड नहीं घुस पा रहा था क्यूंकी मैं आगे को झुका हुआ था
तभी अचानक मां ने अपनी जांघें ऊपर की ओर फैला दी जिससे मेरे लिए ज्यादा जगह बन गई और उसकी चूत के ऊपर उठने से मेरा लंड अब जड़ तह गहरा घुसने लगा
इससे हमारे बीच की रही सही शरम भी ख़त्म हो गई मुझे मालूम चल गया था की मां भी अच्छे से चुदाई चाह रही है मैंने दुगने उत्साह से धक्के लगाने शुरू कर दिए
मैंने अपना सर उठाया और धीरे से कहा आई लव यू मां
मां ने एक सिसकारी लेकर उसका जवाब दिया
मेरे हर धक्के से उसके मुंह से ऊवू आआअहह की आवाज़ें निकल रही थी
हर धक्के के साथ उसके बदन से मेरे बदन के टकराने से ठप ठप ठप की आवाज़ पूरे कमरे में गूंजने लगी मां के मुंह से निकलती ऊओ आअहह उफ़फ्फ़ मां की आवाज़ों का संगीत मुझे और भी उत्तेजित कर दे रहा था
मां भी अब कामोन्माद में थी उसकी जीभ उसके मुंह में घूम रही थी मां ने मेरा निचला होंठ अपने मुंह में दबा लिया और उसे चूसने लगी उसके दांतो के अपने होंठ पर गड़ने से मुझे पता चल गया की मां अपने दूसरे ओर्गास्म के करीब है
अपनी धार्मिक मां को कामोन्माद में इतना उत्तेजित देखना मेरे लिए हैरान करने वाला था मैंने उसके बदन के निचले भाग के हल्के हल्के मूवमेंट को महसूस किया और अपने धक्कों को उस के हिसाब से एडजस्ट कर दिया
ऐसा करने से मां बहुत उत्तेजित हो गई उसने बेड का हेडबोर्ड छोड़ दिया और अपनी बांहे मेरी पीठ पर लपेट ली अब वो मुझे बेतहाशा चूमने लगी और मेरे हर धक्के का जवाब अपने नितंबों को ऊपर उछालकर देने लगी जब मैं ऊपर को आ रहा होता था
तो वो नीचे पड़ी रहती थी लेकिन जब मैं नीचे को जाता था तो वो अपने नितंब उठाकर पूरा मेरे लंड को अपने अंदर ले लेती थी फिर उसका बदन अकड़ने लगा मैं समझ गया अब मां को ओर्गास्म आने वाला है
फिर मां ने अपने हाथों से मेरे नितंबों को पकड़ लिया उसके नाख़ून मेरे मांस में गड़ रहे थे वो मेरे नितंबों को पकड़कर अपनी चूत पर ज़ोर ज़ोर से पटककर धक्के देने लगी
अब वो मेरे पर भारी पड़ने लगी थी उसने मजबूती से अपने पैर बेड पर रखे हुए थे और मेरे नितंबों तो कसके पकड़कर वो नीचे से इतनी तेज धक्के मार रही थी की मुझे उसका साथ देने में मुश्किल होने लगी मेरे नितंबों पर गडते उसके नाख़ून दर्द करने लगे थे अपने ओर्गरस्म के आने से पहले मां कामोन्माद से बहुत ही उत्तेजित हो गई थी
फिर वो चीखी ओह सुरेशशश सम्भालो हमको आह्ह्ह उफ्फफ आह्ह्ह
वो झड़ने लगी मैं भी झड़ने ही वाला था मैंने बेरहमी से मां की चूचियां मसल डाली उसके कंधों पर दांत गड़ा दिए और पूरी तेज़ी से धक्के मारने लगा
मां चीखी ऊहह्ह उफ्फफ मेरी जान ही ले लोगे क्या
फिर मां ने अपनी कमर उठाकर टेढ़ी कर दी और एक चीख उसके मुंह से निकली आईईई आह्ह्ह ऊईईई मां
उसकी तेज चीख से मैं घबरा गया कोई सुन ना ले मैंने उसका मुंह अपने मुंह से बंद कर दिया मां ने अपनी जांघों को मेरे नितंबों पर लपेट कर मुझे जकड़ लिया तभी मेरा वीर्य निकल गया मैं धक्के लगाते रहा और मां की चूत को अपने वीर्य से भर दिया
मां का बदन कांपने लगा फिर वो शांत पड़ गई और झड़ने के बाद मैं भी शांत होकर उसके ऊपर ही लेट गया मेरा लंड अभी भी मां की चूत के अंदर था
मां अपना मुंह मेरी गर्दन के पास लाई और हल्के से मेरी गर्दन चूमने लगी अपने हाथ से वो मेरे नितंबों को सहलाने लगी वो देर तक मेरे कंधे मेरी पीठ को सहलाती रही मैं उसके ऊपर पड़े हुए ही सोने लगा उसके सहलाने से मेरी आंखे बंद होने लगी
तभी वो हिली और अपने दायीं तरफ खिसकने लगी मैं उसके ऊपर से उठकर उसके बगल में लेट गया मैंने मां को देखा वो मुझको ही देख रही थी आंसू भरी आंखों से सीधे उसने मेरी आंखों में झांका
मां ने मुझे अपनी तरफ खींचा और अपनी बड़ी छाती में मेरा चेहरा छुपा लिया कैसे हो गया ये सब बेटा? तूने तो मार ही डाला मुझे सुरेश अब क्या होगा?
अपनी इच्छा पूरी हो जाने के बाद अब वास्तविकता से सामना था मां की बात का मेरे पास कोई जवाब नहीं था मैं भी उतना ही कन्फ्यूज और चिंतित था बात को जारी रखने की मेरी हिम्मत नहीं थी
इसलिए मैंने अपनी बांहों को मां के बदन में लपेटा उसकी चूचियों के बीच की घाटी को चूमा और मां की छाती में चेहरा छुपा के किसी बच्चे की तरह सुरक्षित महसूस करते हुए सो गया
सुबह जल्दी मेरी नींद खुल गई बाहर अभी उजाला नहीं हुआ था मैं बेड में लेटे हुए ही रात में हुई घटना के बारे में सोचने लगा लेकिन मैं कुछ भी ठीक से नहीं सोच पा रहा था दिमाग में कई तरह के विचार आ रहे थे मुझे बहुत अपराधबोध हो रहा था
लेकिन इस बात से भी मैं इनकार नहीं कर सकता था की जिस आनंद की मुझे अनुभूति हुई थी वैसी पहले कभी नहीं हुई मैंने खुद से स्वीकार किया की मां का इस घटना में कोई हाथ नहीं है ये सब मेरी वजह से ही हुआ है मेरी ही वजह से मां इस पाप की भागीदार बनी जिसके बारे में हमारे समाज में सोचा भी नहीं जा सकता
यही सब सोचते हुए मुझे फिर से नींद आ गई सुबह बेड के हिलने से मेरी नींद खुली मैं खिड़की की तरफ मुंह करके सोया हुआ था और मां की तरफ मेरी पीठ थी मां के हिलने डुलने से मुझे लगा की वो बेड से उठ रही है
मां ने बेड साइड लैंप ऑन किया मैंने सामने दीवार पर लगे मिरर में देखा मां बेड में पीछे टेक लगाकर बैठी है और उसने अपना चेहरा हाथों से ढका है फिर वो सुबकने लगी और उसकी आंखों से आंसू बहने लगे बीच बीच में वो हे प्रभु हे ईश्वर भी जप रही थी
मुझे बहुत बुरा लगा क्या करूं समझ नहीं आया इसलिए मैं चुपचाप वैसे ही लेटे रहा मैंने फिर से मिरर में देखा तो मेरे अंदर का जानवर फिर से सर उठाने लगा मिरर में मां की बड़ी छाती दिख रही थी कुछ घंटे पहले रात में इन चूचियों को मैंने खूब चूसा था पर अभी नज़ारा कुछ और ही था
जब मां ने अपने हाथों से चेहरा ढका था तो मिरर में कुछ दिख नहीं पा रहा था पर जब उसने अपनी आंखे पोछी और हाथ नीचे कर दिए तो मां की गदराई हुई छाती मुझे दिखने लगी मुझे इस बात पे हैरानी हुई की मां की चूचियां ज्यादा ढली हुई नहीं थी
वो बड़ी बड़ी और गोल थी और उन्होने अपना आकार बरकरार रखा था मां ने अपना सर पीछे को किया हुआ था और उसके गहरी सांसे लेने से उसकी चूचियां हल्के से हिल रही थी उसके कंधे उसकी उठी हुई ठोड़ी सब कुछ एकदम परफेक्ट था
फिर वो सीधी होकर बैठ गई और हाथ पीछे ले जाकर अपने बाल बांधने लगी उसने एक नज़र मेरी तरफ देखा क्या मैंने उसे मुस्कुराते हुए देखा हां वो मुझे देखकर मुस्कुरा रही थी
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