अंधेरे में बेटे से चुद गई- 5

आप ने maa beta sex story के पिछले भाग अंधेरे में बेटे से चुद गई- 4 में पढ़ा जो भी हुआ वो किस्मत की एक गलती थी और अगर अब भी मैं दीनू की तरफ आकर्षित हो रही हूं तो ये बहुत ही गलत बात है जो संसार के नियम बंधनों के हिसाब से पाप है अब आप maa beta sex story में आगे पढ़े

Mom Hindi Sex Story 5

मुझे अपने ऊपर ही क्रोध आने लगा लेकिन लाख कोशिश करने के बाद भी में अपने दिल पर काबू ना पा सकी मेरे मन में दीनू को पाने की इच्छा बढ़ती ही गई जब भी में अपनी आंखें बंद करती मुझको दीनू ही दिखाई देता

मैंने अपनी पूरी कोशिश की कि में अपने बेटे के बारे में इस तरह से ना सोचू मैंने अपना ध्यान दीनू से हटाकर अपने पति के साथ बिताये पलों को याद करने का प्रयास किया लेकिन इन सब कोशिशों से कोई फायदा नहीं हुआ

मुझे बार बार उस अंधेरे कमरे में अपने ऊपर दीनू के बदन की परछाई दिखाई दे रही थी शाम को में डाइनिंग रूम में सोफे पर आंखे बंद किए लेटी थी मेरे मन में दीनू के ही ख्याल आ रहे थे

मुझे लगा दीनू उसके ऊपर लेटा हुआ है और उससे धीमे धीमे प्यार कर रहा है अपने आप ही मेरा एक हाथ चूत के दाने पर चला गया और दूसरे हाथ से में अपनी एक चूची को हलके से सहलाने लगी फिर कुछ पलों बाद मैंने दीनू के मुंह

निकलती सिसकारी सुनी और अपनी चूत में सफेद गाड़े वीर्य की धार महसूस की

पिछले कुछ दिनों से मेरे मन में दीनू से मिलने की बहुत तड़प थी उस रात की उत्तेजना मेरे मन से कभी निकल ही नहीं पायी मुझे लगता था मेरे बदन में कुछ आग सी लग गई है अपनी चूत के फूले होंठ मुझे कुछ ज्यादा ही नरम महसूस हो रहे थे और चूत में हर समय एक गीलापन महसूस होता था

अपने अंदर उठती इन भावनाओं की वजह से दिन भर मैं बहुत रोई थी ये ऐसी इच्छाएं थी जो पूरी नहीं की जा सकती थीं और अपने बेटे के लिए तड़प तो समाज स्वीकार ही नहीं करता था

मैंने कभी नहीं सोचा था कि सिर्फ एक रात के सम्बन्ध से हालात यहां तक पहुंच जायेंगे और मेरे मन में अपने बेटे को पाने की चाहत इस कदर बढ़ जायेगी कि वो समाज के बनाये नियमों को तोड़ने के लिए तैयार हो जाएगी

अब मैं दीनू से अनजान नहीं थी ये बात बिलकुल साफ हो चुकी थी कि वो कौन था जो उसके उत्तेजक सपनो में आता था और उसको भरपूर कामतृप्त करके ही जाता था जिसके चौड़े सीने से लगकर वो अपने आप को फिर से छोटी बच्ची की तरह सुरक्षित महसूस करती थी अब उस अजनबी का चेहरा धुंधला सा नहीं था

वो चेहरा था मेरे हैंडसम बेटे दीनू का

ऐसे हालात में एक ही छत के नीचे अपने बेटे के साथ रहना अब मेरे लिए नामुमकिन सा था दीनू के उसके ही साथ रहने से मेरे को अपनी भावनाओं पर काबू पाना संभव नहीं लग रहा था मुझे लग रहा था कि अगर दीनू यहीं रहा तो वो उसके लिए तड़पती ही रहेगी मैंने सोचा कि वो अपने बेटे से कह देगी कि वो फिर से हॉस्टल चला जा

मगर दीनू को जाने के लिए कहने के ख्याल के बारे में सोचने से ही मुझे इतनी पीड़ा पहुंची कि मैंने इस ख्याल को ही मन से निकाल दिया

मेरे लिए अब दीनू ही मेरा बॉयफ्रेंड था लेकिन दीनू के लिए

दूसरी तरफ शायद दीनू के लिए ये सब बहुत मुश्किल था वो शीतल को बहुत प्यार करता था और उसका पूरा ख्याल रखता था शीतल की बात वो टालता नहीं था

लेकिन अपनी मां के लिए शारीरिक आकर्षण जैसी कोई भावना उसके मन में नहीं थी उस रात नशे की हालत में उसने चुदाई जरूर कर दी थी लेकिन कभी मेरे माथे पर प्यार भरा किस कर लिया तो कर लिया वरना दीनू समझदार बेटे की तरह उससे एक शारीरिक दूरी बनाये रखता था

उसने कभी भी मेरी छाती मेरे चूतड़ों और अक्सर खुली रहने वाली लम्बी चिकनी टांगों की तरफ गलत नज़रों से नहीं देखा था वो तो मां की तरह उससे प्यार करता था उसका मन अपनी मां के लिए शीशे की तरह साफ था और ये बात मेरे को अच्छी तरह से मालूम थी

लेकिन इससे मेरी पीड़ा और भी बढ़ गई क्योंकि मैं जानती थी कि मेरी तड़प इकतरफा थी और ये भी कि दीनू के मन में उसके लिए ऐसी कोई तड़प नहीं है

हर शाम मेरे लिए लम्बी खिंचती चली गई समय के साथ मेरी उलझन बढ़ती जा रही थी मेरे को लग रहा था कि मैं एक चक्रव्यूह में फंस चुकी है और बाहर निकलने का कोई रास्ता उसे नहीं सूझ रहा था

मां मां

कौन? कौन है? जोर जोर से अपना नाम पुकारे जाने की आवाज़ से उसकी तन्द्रा टूटी और वो हड़बड़ा के सोफे में उठ बैठी

मैं कितनी देर से आपको आवाज़ दे रहा हूं आपको क्या हो गया हे

सॉरी दीनू कुछ दिनों से मैं ढंग से सो नहीं पायी हूं इसलिए आंख लग गई थी मैंने आंखे मलते हुए कहा

दीनू ने मेरे चेहरे से छलकता दर्द देखा वो तुरंत समझ गया कि में किन ख्यालों में डूबी हुई थी रात को नींद ना आने की बात तो सिर्फ एक बहाना थी

देखो मां जो कुछ भी हुआ वो एक किस्मत की गलती थी और हम दोनों का ही इसमें कोई कसूर नहीं है हमको इस बात को भूल जाना चाहिए और फिर से आपस में पहले जैसा ही व्यवहार करना चाहिए

पहले की तरह? ये संभव ही नहीं है

लेकिन जो कुछ भी हुआ उसको अब हम पलट तो नहीं सकते ना इसलिए उसे भूल जाना ही ठीक है

तुम क्या कह रहे हो दीनू? जो हुआ उसे भूल जाऊं? कैसे? मेरी पीड़ा अब गुस्से में बदल रही थी

एक तो मैं पहले से ही परेशान थी ऊपर से दीनू का बड़ों की तरह ऐसे बातें करना मुझे अच्छा नहीं लग रहा था गुस्से से मेरा मुंह लाल हो गया

मां प्लीज पहले मेरी बात सुनो मैं सिर्फ ये कह रहा हूं कि मां बेटे के बीच मर्यादा की जो रेखा होती है हमें उसे पहले जैसे ही बरक़रार रखना चाहिए मैं तुम्हारा बेटा तुम मेरी मां हो जो कुछ हुआ उसे बुरा सपना समझकर भुला देना चाहिए आपको मेरी इतनी सी बात समझ क्यों नहीं आ रही है? उस घटना को भूल जाने में आपको प्रॉब्लम क्या है?

इतनी सी बात? ये इतनी सी बात है? बकवास बंद करो दीनू भाड़ में गई तुम्हारी ये लेक्चर बाजी तुम्हें कुछ अंदाजा भी है कि उस रात के बाद से मुझ पर क्या गुजरी है? और तुमने कितनी आसानी से कह दिया सब भूल जाओ मैं कैसे भूल जाऊं?

मर्यादा की जिस रेखा की तुम बात कर रहे हो उसे तो तुम कब का पार कर चुके हो दीनू अब वो रेखा हम दोनों के बीच है ही नहीं क्योंकि उस रात के बाद अब हम दोनों उस रेखा के एक ही तरफ हैं

उस रात जो बदन तुम्हारे जिस्म के नीचे था वो मेरा बदन था तुम्हारी अपनी सगी मां का अब आंखे फेर लेने से क्या होगा और ये बात नशे के बाद भी तुम जानते

सच को झुठला तो नहीं सकते ना तुम

मेरी आंखों से टपटप आंसू बहने लगे बात सिर्फ उस रात के सेक्स की नहीं है लेकिन उस रात बिताये पलों के बाद जाने अनजाने में मेरे मन में जो आशाएं उम्मीदें जो इच्छाएं जन्मी थी उनका क्या? जो सपने रात भर मुझे बेचैन किये रहते थे उनका क्या? मैं उन्हें भुला ही नहीं सकती चाहे मैं कितनी ही कोशिश क्यों ना कर लूं समझे तुम?

मेरे अंदर की इतने दिनों की पीड़ा उसकी तड़प लावा बनकर फूट पड़ी

तुम सभी मर्द एक जैसे होते हो तुम लोगों को इस बात का कुछ अंदाजा ही नहीं होता कि जब एक औरत किसी लड़के को अपना दिल दे बैठती है तो उस पर क्या बीतती है लड़कों को लगता है कि औरत पर थोड़ा पैसा खर्च कर दो कुछ गिफ्ट वगैरह दे दो और वो औरत उनके लिए अपने कपड़े उतार दे क्यों?

क्योंकि वो ऐसा चाहते हैं बस वो किसी भी तरह सिर्फ सेक्स करने की कोशिश में रहते हैं औरत की भावनाओं की उन्हें कोई कद्र नहीं होती उनका सिर्फ एक लक्ष्य होता है कि कैसे भी पटाकर औरत की टांगे फैला दी जाए और इससे पहले कि औरत कहीं अपना इरादा ना बदल दे झट से ऊपर चढ़के उसके अंदर अपना पानी गिरा दें

कई बेवकूफ औरते इनके चक्करों में फंस भी जाती हैं और जब तक उन्हें समझ आती है लड़के अपना काम निकाल के उनको छोड़ कर जा चुके होते हैं लेकिन ये बातें मुझे जल्द ही समझ आ गई थीं

मैं जानती थी की उस दिन मेरे लिए सेक्स बहुत मायने रखता था तुम नहीं होते तो शायद किसी और से चुदवा लेती तुम्हारे डैडी की शराबखोरी ने उन्हें सेक्स में कमजोर बना दिया था और हर रात में अतृप्त रह जाती थी

उस रात तुमने मुझे कई रातो के बाद तृप्त किया था हा ये सही हे की मुझे जब ये पता चला की तुमने मेरे साथ सेक्स किया हे तो में नादीनू थी लेकिन इन दो महीनो में मुझे पता चल गया हे की में तुम्हारे बिना नहीं रह सक

मै बोलते बोलते थोड़ी सांस लेने के लिए रुकी मेरी पीड़ा देखकर दीनू का दिल भर आया उसने मुझ को बाहों में भरकर मेरा सर अपनी छाती से लगा लिया अपने बेटे की मजबूत बांहों के घेरे में आकर मैंने एक गहरी सांस ली मेरी आंखों से फिर आंसू बह चले सुबकते हुए में बो

मै फिर चुप हो गई और अपने बेटे के सीने से लगी रही दीनू के सीने से लगकर मेरी तड़प फिर बढ़ने लगी मैं फिर से बेचैन हो गई सिर्फ एक बार बस एक बार अगर तुम मुझसे वैसे ही प्यार करो तो शायद मेरे मन की तड़प पूरी हो जाए और ये रोज़ रात में आकर तड़पाने वाले सपनों से मुझे मुक्ति मिल जाए क्या पता

फिर मैंने अपनी आंखे उठाकर दीनू की आंखों में झांका पर उनमे उसे वही भाव दिखे जो कुछ दिन से दिख रहे

दीनू प्लीज मैं जानती हूं तुम मेरे बेटे हो और ऐसा करना शायद तुम्हारे लिए बहुत मुश्किल होगा लेकिन सिर्फ एक बार मुझे वही प्यार दो उसके बाद तुम अगर मेरे पास आना नहीं चाहोगे तो कोई बात नहीं लेकिन सिर्फ एक बार मैं तुमसे वही प्यार चाहती हूं

फिर जैसा तुम चाहोगे वैसा ही होगा अगर तुम चाहोगे तो फिर से हम पहले के जैसे मां बेटे बन जायेंगे लेकिन प्लीज एक बार सिर्फ इस बार मेरा मन रखलो सिर्फ एक बार के लिए मेरे बॉयफ्रेंड बन जाओ मेरे बेटे

अपनी सुबकती हुई मां को सीने से लगाए हुए दीनू गहरी सांसे लेते हुए चुपचाप खड़ा रहा

मैंने अपने को दीनू की बाहों से अलग किया अपनी आंखों से आंसू पोछे और दीनू को उम्मीद भरी नज़रों से देखा लेकिन दीनू की कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि वो क्या बोले

मैं अपने बेडरूम का दरवाज़ा खुला रखूंगी तुम अगर अपना मन बना लोगे तो सीधे अंदर आ जाना नॉक करने की कोई जरुरत नहीं मैं तुम्हारा इंतज़ार करूंगी अगर तुम नहीं आये तो मैं समझ जाऊंगी कि तुमने क्या फैसला किया है

इससे पहले कि दीनू कुछ जवाब दे पाता मैं तेज तेज कदमों से अपने बेडरूम में चली गई

दीनू को कुछ भी समझ में नहीं आ रहा था अपने बेडरूम में बेड पर लेटे हुए उसके दिमाग में उस रात के दृश्य घूमने लगे उस अंधेरे कमरे में वो मादक औरत जिसने उसे जी भर के कामतृप्ति दी थी

लेकिन मैंने जो बातें अभी कहीं थी उनसे दीनू उलझन में था अगर वो मेरी बात मानकर मेरा दिल रख लेता है तो भी उनके बीच कुछ अलग नहीं होने वाला था क्योंकि आपस में सेक्स तो वो पहले ही कर चुके थे

अब इससे ज्यादा और हो ही क्या सकता था लेकिन वो ये भी जानता था कि अगर ये किस्सा शुरू हुआ तो फिर ये एक बार ही नहीं होगा

ये होते रहेगा और उनकी लाइफ को और उनके आपसी रिश्तों को और उलझा देगा

दीनू अभी कोई मन नहीं बना पा रहा था उसको इन सब बातों पर सोचने के लिए कुछ और वक्त की जरुरत थी उसने सोचा होगा कि अगर वो मेरी बात नहीं मानता और मुझको मना कर देता है तो फिर एक ही छत के नीचे वो कैसे रह पायेंगे उनके रिश्ते के बीच एक दरार पैदा हो जायेगी

दीनू फिर उस रात की औरत के बारे में सोचने लगता है वो औरत उसे भी बहुत पसंद आई थी और उस रात को याद करके उसका लंड भी कई बार खड़ा हो जाता था

पर अब हालात दूसरे थे वो औरत कोई अनजान नहीं खुद उसकी मां थी अब अगर वो मां के बेडरूम में चला भी जाता है तो अपनी मां के साथ वैसे सेक्स थोड़ी कर पायेगा जैसे उसने उस रात अनजान औरत के साथ हावी होकर किया था और वो सुखद तरीका मुझे बहुत पसंद आया था

वो वैसा कर ही नहीं सकता था क्योंकि उसे मालूम था अपनी मां के सामने वो नर्वस हो जायेगा दीनू कुछ भी फैसला नहीं कर पाया उसने सारी समस्या को वक्त और किस्मत के भरोसे छोड़ दिया जो किस्मत में होगा देखा जायेगा उसने सोचा कि देखते हैं सुबह में कैसा रियेक्ट करती हूं

उधर मैं रात में अपने कमरे में दीनू के आने का इंतज़ार करती रही वो रात मेरे लिए बहुत लम्बी और तड़पा देने वाली वाली साबित हुई जैसे जैसे समय बीतता गया में डिप्रेशन की गहराईयों में गिरते चली गई दूसरे दिन सुबहमें बहुत दुखी थी अपनी पैंटी के ऊपर एक लम्बी ढीली टीशर्ट डालकर नाश्ता बना रही थी

नाश्ता करते समय हम दोनों में से कोई भी कुछ नहीं बोल रहा था हम चुपचाप अपनी प्लेटों की तरफ देखकर खाना खा रहे थे खा क्या रहे थे बस प्लेट में खाना इधर उधर घुमा रहे थे

दोनों ही अपने अपने विचारों में खोये हुए थे कुछ नहीं बोल रहे थे हम चुपचाप अपनी प्लेटों की तरफ देखकर खाना खा रहे थे खा क्या रहे थे बस प्लेट में खाना इधर उधर घुमा रहे थे दोनों ही अपने अपने विचारों में खोये हुए थे

जब मैंने नाश्ता कर लिया तो मैंने नज़रें उठाकर दीनू को देखा अपने हैंडसम बेटे को लेकिन अब में जानती थी कि मुझे अपने बेटे के प्रति शारीरिक आकर्षण को वहीं पर ख़तम कर देना चाहिए हम दोनों की नज़रें आपस में मिली मेरा दिल तड़प उठा मेरी आंखों में दर्द उमड़ आया दीनू द्वारा ठुकरा दिए जाने की पीड़ा से मेरे आंसू गालों पर बहने लगे

तुम्हारा निर्णय अब मुझे पता चल गया है में फिर एक झटके से उठी और अपनी प्लेट लेकर किचन में चली गई

मेरा दुख देखकर दीनू का दिल भर आया मेरे उदास और लटके हुए चेहरे को देखकर उसने उसी क्षण फैसला ले लिया भाड़ में जाए समाज के नियम- कानून मेरी मां मुझे इतना चाहती है और मैं उसे चाहता हूं तो हमें औरों से क्या लेना देना

दीनू अपनी कुर्सी से उठा और मेरी ओर बढ़ा मेरे को अपनी तरफ घुमाकर उसने मजबूत बांहों के घेरे में भरके मुझे अपनी ओर खींचा

मैंने अपनी आंसुओ से भरी आंखे उठाकर दीनू की आंखों में देखा वहां अब असमंजस के भाव नहीं थे दीनू निर्णय ले चुका था मैंने अपनी बाहें उसके गले में डालकर उसकी छाती में अपना सर रख दिया

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