बहन की ब्रा और पैंटी ने उत्तेजित किया- 2

आप ने bhai behan sex story के पिछले भाग बहन की ब्रा और पैंटी ने उत्तेजित किया- 1 में पढ़ा दीदी ने पूछा क्या छूना चाहते हो? साफ साफ दीदी ने फिर मुझसे पूछीं तब मैं धीरे से दीदी से बोला तुम्हारा दूध छूना दीदी ने तब मुझसे तपाक से बोली क्या छूना है साफ साफ बोलो? अब आप bhai behan sex story में आगे पढ़े

Real Bhai Behan Sex Story 2

मैं तब दीदी से मुस्कुरा कर बोला तुम्हारी चूची छूना है उसको मसलना है अभी मां आ सकती है दीदी तब मुस्कुरा कर बोलीं मैं भी तब मुस्कुरा कर अपनी दीदी से बोला जब मां आएगी तो हमें पता चल जायेगा

मेरी बातों को सुन कर दीदी कुछ नहीं बोलीं और चुपचाप नज़दीक आ कर खड़ी हो गई लेकिन उनकी चूची कल की तरह मेरे हाथ नहीं छू रहे थे

मैं समझ गया कि दीदी आज मेरे से सट कर खड़ी होने से कुछ शर्मा रही हैं अब तक दीदी अनजाने में मुझसे सट कर खड़ी होती थी लेकिन आज जानबूझ कर मुझसे सट कर खड़ी होने से वो शर्मा रही हैं क्योंकि आज दीदी को मालूम था की सट कर खड़ी होने से क्या होगा

जैसे दीदी पास आ गई और अपने हाथों से दीदी को और पास खींच लिया अब दीदी की चूची मेरे हाथों को कल की तरह छू रही थी मैंने अपना हाथ दीदी की चूची पर टिका दिया

दीदी के चूची छूने के साथ ही मैं मानो स्वर्ग पर पहुंच गया मैं दीदी की चूची को पहले धीरे धीरे छुआ फिर उन्हें कस कस कर मसला कल की तरह आज भी दीदी की कुर्ती और उसके नीचे ब्रा बहुत नर्म कपड़े की थी और उस में से मुझे दीदी की निप्पल तन कर खड़े होना मालूम चल रहा था

मैं तब अपनी एक उंगली और अंगूठे से दीदी की निप्पल को जोर जोर से दबाने लगा मैं जितनी बार दीदी की निप्पलों को दबा रहा था उतनी बार दीदी कसमसा रही थीं और दीदी की मुंह शरम के मारे लाल हो रहा थी

तब दीदी मुझसे धीरे से बोलीं धीरे दबा तब मैं लगा धीरे धीरे करने मैं और दीदी ऐसे ही फालतू बातें कर रहे थें और देखने वाले को यही दिखता कि मैं और दीदी कुछ गंभीर बातों पर बहस कर रहे थें लेकिन असल में मैं दीदी की चूचियों को अपने हाथों से कभी धीरे धीरे और कभी जोर जोर से मसल रहा था

थोड़ी देर बाद मां ने दीदी को बुला लिया और दीदी चली गईं ऐसे ही 2-3 दिन तक चलता रहा मैं रोज दीदी की सिर्फ एक चूची को मसल पाता था लेकिन असल में मैं दीदी की दोनों चूचियों को अपने दोनों हाथों से पकड़ कर मसलना चाहता था लेकिन बालकोनी में खड़े हो कर यह मुमकिन नहीं था मैं दो दिन तक इसके बारे में सोचता रहा

एक दिन शाम को मैं हॉल में बैठ कर टीवी देख रहा था मां और दीदी किचन में डिनर की तैयारी कर रही थीं कुछ देर के बाद दीदी काम खत्म करके हॉल में आ कर बिस्तर पर बैठ गई दीदी ने थोड़ी देर तक टीवी देखा और फिर अखबार उठा कर पढ़ने लगीं

दीदी बिस्तर पर पलटी मार कर बैठी थीं और अखबार अपने सामने उठा कर पढ़ रही थी मेरा पैर दीदी को छू रहा था मैंने अपने पैरों को और थोड़ा सा आगे खिसका दिया और अब मेरा पैर दीदी की जांघो को छू रहा था

मैं दीदी की पीठ को देख रहा था दीदी आज एक काले रंग का झीना टी-शर्ट पहनी हुई थीं और मुझे दीदी की काले रंग का ब्रा भी दिख रहा था मैं धीरे से अपना एक हाथ दीदी की पीठ पर रखा और टी-शर्ट के उपर से दीदी की पीठ पर चलाने लगा

जैसे मेरा हाथ दीदी की पीठ को छुआ दीदी की शरीर अकड़ गया दीदी ने तब दबी जुबान से मुझसे पूछी यह तुम क्या कर रहे हो तुम पागल तो नहीं हो गए मां अभी हम दोनों को किचन से देख लेगी

दीदी ने दबी जुबान से फिर मुझसे बोलीं मां कैसे देख लेंगी? मैंने दीदी से कहा क्या मतलब है तुम्हारा? दीदी पूछीं मेरा मतलब यह है कि तुम्हारे सामने अखबार खुली हुई है अगर मां हमारी तरफ देखेगी तो उनको अखबार दिखलाई देगी मैंने दीदी से धीरे से कहा तू बहुत स्मार्ट और शैतान है दीदी ने धीरे से मुझसे बोलीं

फिर दीदी चुप हो गई और अपने सामने अखबार को फैला कर अखबार पढ़ने लगी मैं भी चुपचाप अपना हाथ दीदी के दाहिने बगल के ऊपर नीचे किया और फिर थोड़ा सा झुक कर मैं अपना हाथ दीदी की दाहिने चूची पर रख दिया

जैसे ही मैं अपना हाथ दीदी के दाहिने चूची पर रखा दीदी कांप गईं मैं भी तब इत्मिनान से दीदी की दाहिने वाली चूची अपने हाथ से मसलने लगा

थोड़ी देर दाहिना चूची मसलने के बाद मैं अपना दूसरा हाथ से दीदी बाईं तरफ वाली चूची पाकर लिया और दोनों हाथों से दीदी की दोनों चूचियों को एक साथ मसलने लगा

दीदी कुछ नहीं बोलीं और वो चुप चाप अपने सामने अखबार फैलाए अखबार पढ़ती रही मैं दीदी की टी-शर्ट को पीछे से उठाने लगा दीदी की टी-शर्ट दीदी के चूतड़ों के नीचे दबी थी और इस लिए वो ऊपर नहीं उठ रही थी

मैं जोर लगाया लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ दीदी को मेरे दिमाग की बात पता चल गया दीदी झुक कर के अपना चूतड़ को उठा दिया और मैंने उनका टी-शर्ट धीरे से उठा दिया

अब मैं फिर से दीदी के पीठ पर अपना ऊपर नीचे घूमना शुरू कर दिया और फिर अपना हाथ टी-शर्ट के अंदर कर दिया वो क्या चिकना पीठ था दीदी का

मैं धीरे धीरे दीदी की पीठ पर से उनका टी-शर्ट पूरा का पूरा उठा दिया और दीदी की पीठ नंगी कर दिया अब अपने हाथ को दीदी की पीठ पर ब्रा के ऊपर घूमना शुरू किया

जैसे ही मैंने ब्रा को छुआ दीदी कांपने लगीं फिर मैं धीरे से अपने हाथ को ब्रा के सहारे सहारे बगल के नीचे से आगे की तरफ बढ़ा दिया फिर मैं दीदी की दोनों चूचियों को अपने हाथ में पकड़ लिया और जोर जोर से दबाने लगा

दीदी की निप्पल इस समय तनी तनी थी और मुझे उसे अपने उंगलो से दबाने में मजा आ रहा था मैं तब आराम से दीदी की दोनों चूचियों को अपने हाथों से दबाने लगा और कभी कभी निप्पल खींचने लगा

मां अभी भी किचन में खाना पका रही थी हम लोगों को मां साफ साफ किचन में काम करते दिखलाई दे रही थी मैं यह सोच सोच कर खुश हो रहा था कि दीदी कैसे मुझे अपनी चूचियों से खेलने दे रही है और वो भी तब जब मां घर में मौजूद हैं

मैं तब अपना एक हाथ फिर से दीदी की पीठ पर ब्रा के हुक तक ले आया और धीरे धीरे दीदी की ब्रा की हुक को खोलने लगा दीदी की ब्रा बहुत टाइट थी और इस लिए ब्रा का हुक आसानी से नहीं खुल रहा था

लेकिन जब तक दीदी को यह पता चलता मैं उनकी ब्रा की हुक खोल रहा हूं ब्रा का हुक खुल गया और ब्रा की स्ट्रेप उनकी बगल तक पहुंच गया

दीदी अपना सर घुमा कर मुझसे कुछ कहने वाली थी कि मां किचन में से हॉल में आ गई मैंने जल्दी से अपना हाथ खींच कर दीदी की टी-शर्ट नीचे कर दिया और हाथ से टी-शर्ट को ठीक कर दिया मां हॉल में आ कर कुछ ले रही थी और दीदी से बातें कर रही थी

दीदी भी बिना सर उठाए अपनी नज़र अखबार पर रखते हुए मां से बात कर रही थी मां को हमारे कारनामों का पता नहीं चला और फिर से किचन में चली गई

जब मां चली गई तो दीदी ने दबी जुबान से मुझसे बोलीं अमित मेरी ब्रा की हुक को लगा क्या? मैं यह हुक नहीं लगा पाऊंगा मैं दीदी से बोला क्यों तू हुक खोल सकता है और लगा नहीं सकता?

दीदी मुझे झिड़कते हुए बोलीं नही यह बात नहीं है दीदी तुम्हारा ब्रा बहुत टाइट है मैं फिर दीदी से कहा दीदी अखबार पढ़ते हुए बोली मुझे कुछ नहीं पता तुमने ब्रा खोला है और अब तुम ही इसे लगाओगे दीदी नाराज होती बोलीं

लेकिन दीदी ब्रा की हुक को तुम भी तो लगा सकती हो? मैंने दीदी से पूछा बुधु मैं नहीं लगा सकती मुझे हुक लगाने के लिए अपने हाथ पीछे करने पड़ेंगे और मां देख लेंगी तो उन्हें पता चल जाएगा कि हम लोग क्या कर रहे थे दीदी मुझसे बोलीं मुझे कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि मैं क्या करूं

मैं अपना हाथ दीदी की टी-शर्ट नीचे से दोनों बगल से बढ़ा दिया और ब्रा के स्ट्रेप को खींचने लगा जब स्ट्रेप थोड़ा आगे आया तो मैंने हुक लगाने की कोशिश करने लगा

लेकिन ब्रा बहुत ही टाइट था और मुझसे हुक नहीं लग रहा था मैं बार बार कोशिश कर रहा था और बार बार मां की तरफ देख रहा था मां ने रात का खाना करीब करीब पका लिया था और वो कभी भी किचन से आ सकती थी

दीदी मुझसे बोलीं यह अखबार पकड़ अब मुझे ही ब्रा के स्ट्रेप को लगाना पड़ेगा मैंने बगल से हाथ निकल कर दीदी के सामने अखबार पकड़ लिया और दीदी अपनी हाथ पीछे करके ब्रा की हुक को लगाने लगीं

मैं पीछे से ब्रा का हुक लगाना देख रहा था ब्रा इतनी टाइट थी कि दीदी को भी हुक लगाने में दिक्कत हो रहीं थी आखिरकार दीदी ने अपनी ब्रा की हुक को लगा लिया जैसे ही दीदी ने ब्रा की हुक लगा कर अपने हाथ सामने किए मां कमरे में फिर से आ गई

मां बिस्तर पर बैठ कर दीदी से बातें करने लगीं मैं उठ कर टॉयलेट की तरफ चल दिया क्योंकि मेरा लंड बहुत गरम हो चुका था और मुझे उसे ठंडा करना था

दूसरे दिन जब मैं और दीदी बालकोनी पर खड़े थें तो दीदी मुझसे बोलीं हम कल रात करीब करीब पकड़ लिए गए थे मुझे बहुत शरम आ रही थी मुझे पता है और मैं कल रात की बात से शर्मिदा हूं तुम्हारी ब्रा इतनी टाइट थी कि मुझसे उसकी हुक नहीं लगी

मैंने दीदी से कहा दीदी तब मुझसे बोलीं मुझे भी बहुत दिक्कत हो रहीं थी और मुझे अपने हाथ पीछे करके ब्रा की स्ट्रेप लगाने में बहुत शरम आ रही थी

दीदी तुम अपनी ब्रा रोज कैसे लगाती हो? मैंने दीदी से धीरे से पूछा दीदी बोलीं हम लोग फिर दीदी समझ गई की मैं दीदी से मजाक कर रहा हूं तब बोलीं तू बाद में अपने आप समझ जाएगा

फिर मैंने दीदी से धीरे से कहा मैं तुमसे एक बात कहूं? हां दीदी तपाक से बोलीं दीदी तुम सामने हुक वाली ब्रा क्यों नहीं पहनती मैंने दीदी से पूछा?

दीदी तब मुस्कुरा कर बोलीं सामने हुक वाली ब्रा बहुत महंगी है मैं तपाक से दीदी से कहा कोई बात नहीं तुम पैसे के लिए मत घबराओ मैं तुम्हें पैसे दे दूंगा मेरी बातों को सुनकर दीदी मुस्कुराते हुए बोलीं तेरे पास इतने सारे पैसे हैं चल मुझे एक 100 का नोट दे मैं भी अपना पर्स निकाल कर दीदी से बोला तुम मुझसे 100 का नोट ले लो दीदी

मेरे हाथ में 100 का नोट देख कर बोलीं नहीं मुझे पैसे नहीं चाहिए मैं तो यूंही मजाक कर रही थी लेकिन मैं मजाक नहीं कर रहा हूं दीदी तुम ना मत करो और यह रुपये तुम मुझसे ले लो और मैं जबरदस्ती दीदी के हाथ में वो 100 का नोट थमा दिया

दीदी कुछ देर तक सोचती रहीं और वो नोट ले लिया और बोलीं मैं तुम्हें उदास नहीं देख सकती और मैं यह रुपये ले रही हूं लेकिन याद रखना सिर्फ इस बार ही रुपये ले रही हूं

मैं भी दीदी से बोला सिर्फ काले रंग की ब्रा खरीदना मुझे काले रंग की ब्रा बहुत पसंद है और एक बात याद रखना काले रंग के ब्रा के साथ काले रंग की पैंटी भी खरीदना दीदी

दीदी शर्मा गई और मुझे मारने के लिए दौड़ीं लेकिन मैं अंदर भाग गया अगले दिन शाम को मैं दीदी को अपनी किसी सहेली के साथ फोन पर बातें करते हुए सुना मैंने सुना की दीदी अपनी सहेली को मार्केटिंग करने के लिए साथ चलने के लिए बोल रही हैं

मैं दीदी को अकेला पाकर बोला मैं भी तुम्हारे साथ मार्केटिंग करने के लिए जाना चाहता हूं क्या मैं तुम्हारे साथ जा सकता हूं? दीदी कुछ सोचती रहीं और फिर बोलीं अमित मैं अपनी सहेली से बात कर चुकी हूं और वो शाम को घर पर आ रहीं है और फिर मैंने मां से भी अभी नहीं कही है कि मैं शॉपिंग के लिए जा रही हूं

मैंने दीदी से कहा तुम जाकर मां से बोलो कि तुम मेरे साथ मार्केट जा रही हो और देखना मां तुम्हें जाने देंगी फिर हम लोग बाहर से तुम्हारी सहेली को फोन कर देंगे कि मार्केटिंग का प्रोग्राम कैंसिल हो गया है और उसे आने की जरूरत नहीं है ठीक है ना?

हां यह बात मुझे भी ठीक लगती है मैं जा कर मां से बात करती हूं और यह कह कर दीदी मां से बात करने अंदर चली गई मां ने तुरंत दीदी को मेरे साथ मार्केट जाने के लिए हां कह दीं

उस दिन कपड़े की मार्केट में बहुत भीड़ थी और मैं ठीक दीदी के पीछे खड़ा हुआ था और दीदी के चूतड़ मेरे जांघों से टकरा रहे थे मैं दीदी के पीछे चल रहा था जिससे की दीदी को कोई धक्का ना मार दे

हम जब भी कोई फुटपाथ के दुकान में खड़े होकर कपड़े देखते तो दीदी मुझसे चिपक कर खड़ी होतीं और उनकी चूची और जांघे मुझसे छू रहा होता

अगर दीदी कोई दुकान पर कपड़े देखतीं तो मैं भी उनसे सट कर खड़ा होता और अपना लंड कपड़ों के ऊपर से उनके चूतड़ से भिड़ा देता और कभी कभी मैं उनके चूतड़ों को अपने हाथों से सहला देता

हम दोनों ऐसा कर रहे थे और बहाना मार्केट में भीड़ का था मुझे लगा कि मेरे इन सब हरकतों को दीदी कुछ समझ नहीं पा रही थीं क्योंकि मार्केट में बहुत भीड़ थी

मैंने एक जीन्स का पैंट और टी-शर्ट खरीदा और दीदी ने एक गुलाबी रंग की पंजाबी ड्रेस एक गर्मी के लिए स्कर्ट और टॉप और 2-3 टी-शर्ट खरीदीं हम लोग मार्केट में और थोड़ी देर तक घूमते रहे अब करीब 7:30 बज गए थे दीदी ने मुझे सारे शॉपिंग बैग थमा दिए और बोलीं आगे जा कर मेरा इंतज़ार करो मैं अभी आती हूं

वो एक दुकान में जा कर खड़ी हो गई मैंने दुकान को देखा वो महिलाओं के अंडरगार्मेन्ट की दुकान थी मैं मुस्कुरा कर आगे बढ़ गया मैं देखा कि दीदी का चेहरा शर्म के मारे लाल हो चुका है और वो मेरी तरफ मुस्कुरा कर देखते हुए दुकानदार से बातें करने लगी

कुछ देर के बाद दीदी दुकान पर से चल कर मेरे पास आई दीदी के हाथ में एक बैग था मैं दीदी को देख कर मुस्कुरा दिया और कुछ बोलने ही वाला था कि दीदी बोलीं अभी कुछ मत बोल और चुपचाप चल हम लोग चुपचाप चल रहे थे

बाकी कहानी bhai behan sex story के अगले भाग बहन की ब्रा और पैंटी ने उत्तेजित किया- 3 में पढ़े