आप ने bhai behan sex story के पिछले भाग बहन की ब्रा और पैंटी ने उत्तेजित किया- 2 में पढ़ा दीदी दुकान पर से चल कर मेरे पास आई दीदी के हाथ में एक बैग था मैं दीदी को देख कर मुस्कुरा दिया और कुछ बोलने ही वाला था कि दीदी बोलीं अभी कुछ मत बोल और चुपचाप चल हम लोग चुपचाप चल रहे थे अब आप bhai behan sex story में आगे पढ़े
Real Bhai Behan Sex Story 3
मैं अभी घर नहीं जाना चाहता था और आज मैं दीदी के साथ अकेला था और मैं दीदी के साथ और कुछ समय बिताने के लिए बेचैन था मैंने दीदी से बोला चलो कुछ देर हम लोग समुंदर के किनारे पर बैठते हैं और भेलपुड़ी खाते है नहीं देर हो जाएगी दीदी मुझसे बोलीं
लेकिन मैंने फिर दीदी से कहा चलो भी दीदी अभी सिर्फ 7:30 बजे हैं और हम लोग थोड़ी देर बैठ कर घर चल देंगे और मां जानती हैं कि हम दोनों साथ साथ हैं इस लिए वो चिंता भी नहीं करेंगी
दीदी थोड़ी सोच कर बोलीं चल समुंदर के किनारे चलते है दीदी के राजी होने से मैं बहुत खुश हुआ और हम दोनों समुंदर के किनारे जो कि मार्केट से सिर्फ 10 मिनट का पैदल रास्ता था चल दिए
हमने पहले एक भेलपुड़ी वाले से भेलपुड़ी ली और एक मिनरल वाटर की बोतल ली और जाकर समुंदर के किनारे बैठ गए हम लोग समुंदर के किनारे पास पास पैर फैला कर बैठ गए अभी समुंदर का पानी पीछे था और हमारे चारों तरफ बड़े बड़े पत्थर पड़े हुए थे
वहां खूब जोरों की हवा चल रहीं थी और समुंदर की लहरें भी तेज़ थी इस समय बहुत सुहाना मौसम था हम लोग भेलपुड़ी खा रहे थे और बातें कर रहे थे
दीदी मुझ से सट कर बैठी थीं और मैं कभी कभी दीदी के चेहरे को देख रहा था दीदी आज काले रंग की एक स्कर्ट और ग्रे रंग का ढीला सा टॉप पहनी हुई थी एक बार ऐसा मौका आया जब दीदी भेलपुड़ी खा रहीं थी तो एक हवा का झोंका आया और दीदी की स्कर्ट उनकी जांघ के ऊपर तक उठ गई और दीदी की जांघें नंगी हो गई
दीदी ने अपने जांघों को ढकने की कोई जल्दी नहीं की उन्होंने पहले भेलपुड़ी खाई और आराम से रूमाल से हाथ पोंछ कर फिर अपनी स्कर्ट को जांघों के नीचे किया और स्कर्ट को पैरों से दबा लिया वैसे तो हम लोग जहां बैठे थे वहां अंधेरा था फिर भी चांदनी की रोशनी में मुझे दीदी की गोरी गोरी जांघों का पूरा नजारा मिला
दीदी की जांघों को देख कर मैं कुछ गर्म हो गया जब दीदी ने अपनी भेलपुड़ी खा चुकी तो मैं दीदी से पूछा दीदी क्या हम उन बड़े बड़े पत्थरों के पीछे चलें? दीदी ने फौरन मुझसे पूछा क्यों?
मैंने दीदी से कहा वहां हम लोग और आराम से बैठ सकते हैं दीदी ने मुझसे मुस्कुराते हुए पूछा यहां क्या हम लोग आराम से नहीं बैठे हैं? लेकिन वहां हमें कोई नहीं देखेगा मैंने दीदी की आंखों में झांकते हुए धीरे से बोला
तब दीदी शरारत भरी मुस्कान के साथ बोलीं तुझे लोगों की नज़रों से दूर क्यों बैठना है? मैंने दीदी को आंख मारते हुए बोला तुम्हें मालूम है कि मुझे क्यों लोगों से दूर बैठना है दीदी मुस्कुरा कर बोलीं हां मालूम तो है लेकिन सिर्फ थोड़ी देर के लिए बैठेंगे हम लोग को वैसे ही काफी देर हो चुकी है और दीदी उठ कर पत्थरों के पीछे चल पड़ी
मैं भी झट से उठ कर पहले अपना बैग संभाला और दीदी के पीछे पीछे चल पड़ा वहां पर दो बड़े बड़े पत्थरों के बीच एक अच्छी सी जगह थी मुझे लगा वहां से हमें कोई देख नहीं पाएगा मैंने जा कर वहीं पहले अपने बैग को रखा और फिर बैठ गया दीदी भी आकर मेरे पास बैठ गई दीदी मुझसे करीब एक फुट की दूरी पर बैठी थीं
मैंने दीदी से और पास आ कर बैठने के लिए कहा दीदी थोड़ा सा सरक कर मेरे पास आ गई और अब दीदी के कंधे मेरे कंधों से छू रहे थे मैंने दीदी के गले में बाहें डाल कर उनको और पास खींच लिया मैं थोड़ी देर चुपचाप बैठा रहा और फिर दीदी के कान के पास अपना मुंह ले जाकर धीरे से कहा आप बहुत सुंदर हो
अमित क्या तुम सही बोल रहे हो? दीदी ने मेरी आंखों में आंखें डाल कर मुझे चिढ़ाते हुए बोलीं मैंने दीदी के कानों पर अपना होंठ रगड़ते हुए बोला मैं मजाक नहीं कर रहा हूं मैं तुम्हारे लिए पागल हूं दीदी धीरे से बोलीं मेरे लिए? मैंने फिर दीदी से धीरे से पूछा मैं तुम्हें किस कर सकता हूं?
दीदी कुछ नहीं बोलीं और अपनी सर मेरे कंधों पर टिका कर आंखें बंद कर ली मैंने दीदी की ठुड्डी पकड़ कर उनका चेहरा अपनी तरफ़ घुमाया तो दीदी ने मेरी आंखों में झांका और फिर से अपनी आंखें बंद कर लीं
मैं अब तक दीदी को पकड़े पकड़े गर्म हो चुका था और मैंने अपने होंठ दीदी के होंठों पर रख दिए ओह भगवान दीदी के होंठ बहुत ही रसीले और गर्म थे जैसे ही मैंने अपने होंठ दीदी के होंठ पर रखे दीदी की गले से एक घुटी सी आवाज निकल गई
मैं दीदी को कुछ देर तक चूमता रहा चूमने से मैं तो गर्म हो ही गया और मुझे लगा कि दीदी भी गर्मा गई हैं दीदी मेरे दाहिने तरफ बैठी थी अब मैं अपने हाथ से दीदी की एक चूची पकड़ कर दबाने लगा मैं इत्मीनान से दीदी की चूची से खेल रहा था क्योंकि यहां मां के आने का डर नहीं था
मैं थोड़ी देर तक दीदी की एक चूची कपड़ों के ऊपर से दबाने के बाद मैंने अपना दूसरा हाथ दीदी की टॉप के अंदर घुसा दिया और उनकी ब्रा के ऊपर से उनकी चूची दबाने लगा
मुझे हाथ घुसा कर दीदी की चूची दबाने में थोड़ा अटपटा सा लग रहा था और इस लिए मैंने अपने हाथों को दीदी की टॉप में से निकाल कर अपने दोनों हाथों को उनकी कमर के पास रखा और धीरे धीरे दीदी की टॉप को उठाने लगा और फिर अपने दोनों हाथों से दीदी की दोनों चूचियों को पकड़ कर जोर जोर से मसलने लगा
दीदी मुझे रोक नहीं रही थीं और मुझे कुछ भी करने का अच्छा मौक़ा था मैं अपने दोनों हाथों से दीदी की दोनों चूचियों को पकड़ कर जोर जोर से मसल रहा था
दीदी बस अपने गले से घुटी घुटी मस्त सिसकारियां निकाल रही थी मैं अपने दोनों हाथों को दीदी के पीछे ले गया और उनकी ब्रा के हुक खोलने लगा जैसे ही मैंने दीदी की ब्रा का हुक खोला तो ब्रा गिर कर उनके मम्मों पर लटक गई दीदी कुछ नहीं बोली
मैं फिर से अपने हाथों को सामने लाया और दीदी की चूचियों पर से ब्रा हटा कर उनकी चूचियों को नंगा कर दिया मैंने पहली बार दीदी की नंगी चूची पर अपना हाथ रखा जैसे ही मैं दीदी की नंगी चूचियों को अपने हाथों से पकड़ा दीदी कुछ कांप सी गई और मेरे दोनों हाथों को अपने दोनों हाथों से पकड़ लिया
मैं अब तक बहुत गर्मा गया था और मेरा लंड खड़ा हो चुका था मुझे बहुत ही उत्तेजना चढ़ गई थी मैं सोच रहा था झट से अपने पैंट में से अपना लंड निकलूं और दीदी के सामने ही मुठ मार लूं लेकिन मैं अभी मुठ नहीं मार सकता था
मैं अब जोर जोर से दीदी की नंगी चूचियों को अपने दोनों हाथों से पकड़ कर मसल रहा था मैं दीदी की चूची को दबा रहा था रगड़ रगड़ कर मसल रहा था और कभी कभी उनके निप्पलों को अपने उंगलियों में पकड़ कर मसल रहा था
दीदी के निप्पल इस वक़्त अकड़ कर सख्त हो गए थे जब जब मैं निप्पलों को अपने उंगलियों में पकड़ कर दबाता था तो दीदी छटपटा उठती मैंने बहुत देर तक चूचियों को पकड़ कर मसलने के बाद अपना मुंह नीचे करके दीदी के एक निप्पल को अपने मुंह में ले लिया दीदी ने अभी भी अपनी आंखें बंद कर रखी थीं
जब दीदी की चूची पर मेरा मुंह लगा तो दीदी ने अपनी आंखें खोल दीं और देखा कि मैं उनके एक निप्पल को अपने मुंह में भर कर चूस रहा हूं वो भी गर्मा गई दीदी की सांसे जोर जोर से चलने लगीं और उनका बदन उत्तेजना से कांपने लगा
दीदी ने मेरे हाथों को कस कर पकड़ लिया इस वक़्त मैं उनकी दोनों दूधों को बारी बारी से चूस रहा था अब दीदी के गले से अजीब अजीब सी आवाजें निकलने लगीं उन्होंने मुझे कस कर अपनी छाती से लिपटा लिया और थोड़ी देर के बाद शांत हो गई
मेरा चेहरा नीचे की तरफ था और दीदी की चूचियों को जोर जोर से चूस रहा था मुझे फिर दीदी के पानी की खुशबू आई ओह माय गॉड मैंने अपनी दीदी की चूत की पानी सिर्फ उनकी चूची चूस चूस कर निकाल दिया था?
मैं अपना हाथ दीदी की चूची पर से हटा कर उनकी चूचियों को हल्के से पकड़ते हुए उनके होंठों को चूम लिया मैंने अपना हाथ दीदी के पेट पर रख कर नीचे की तरफ ले जाने लगा और धीरे धीरे मेरा हाथ दीदी की स्कर्ट के हुक तक पहुंच गया
दीदी मेरा हाथ पकड़ कर बोलीं अब और नीचे मत ले मैंने दीदी से पूछा क्यों? दीदी तब मेरे हाथों को और जोर से पकड़ते हुए बोलीं नीचे अपना हाथ मत ले जाओ अभी उधर बहुत गंदा है
मैंने झट से दीदी को चूम कर बोला गंदा क्यों हैं? क्या तुम झड़ गई दीदी ने बहुत धीमी आवाज में कहा हां मैं झड़ गई हूं मैंने फिर दीदी से पूछा दीदी मेरी वजह से तुम झड़ गई हो?
हां अमित तुम्हारी वजह से ही मैं झड़ गई हूं तुम इतने उतावले थे कि मैं अपने आप को संभाल ही नहीं पाई दीदी ने मुस्कुरा कर मुझसे कहा मैंने भी मुस्कुरा कर दीदी से पूछा क्या तुम्हें अच्छा लगा?
दीदी मुझे पकड़ कर चूमते हुए बोलीं मुझे तुम्हारी चूची चुसाई बहुत अच्छी लगी और उसके बाद मुझे झाड़ना और भी अच्छा लगा दीदी ने आज पहली बार मुझे चूमा था
दीदी अपने कपड़ों को ठीक करके उठ खड़ी हो गई और मुझसे बोलीं अमित आज के लिए इतना सब काफी है और हम लोगों को घर भी लौटना है मैंने दीदी को एक बार फिर से पकड़ चुम्मा लिया और सड़क की तरफ चलने लगे
मैंने सारे बैग फिर से उठा लिए और दीदी के पीछे पीछे चलने लगा थोड़ी दूर चलने के बाद वे मुझसे बोलीं मुझे चलने में बहुत परेशानी हो रही है मैंने फौरन पूछा क्यों?
दीदी मेरी आंखों में देखती हुई बोलीं नीचे बहुत गीला हो गया है मेरी पैंटी बुरी तरह से भीग गई है मुझे चलने में बहुत अटपटा लग रहा है मैंने मुस्कुराते हुए बोला दीदी मेरी वजह से तुम्हें परेशानी हो गई है ना?
दीदी ने मेरा एक हाथ पकड़ कर कहा अमित यह गलती सिर्फ तुम्हारी अकेले की नहीं है मैं भी उसमें शामिल हूं हम लोग चुपाचाप चलते रहे और मैं सोच रहा था कि दीदी की समस्या को कैसे दूर करूं?
मेरे दिमाग में एक बात सूझी मैंने फौरन दीदी से बोला एक काम करते हैं वहां पर एक पब्लिक टॉयलेट है तुम वहां जाओ और अपने पैंटी को बदल लो अरे तुमने अभी अभी जो पैंटी खरीदी है वहां जाकर उसको पहन लो और गंदी हो चुकी पैंटी को निकाल दो
दीदी मुझे देखते हुए बोलीं तेरा आईडिया तो बहुत अच्छा है मैं जाती हूं और अपनी पैंटी बदल कर आती हूं हम लोग टॉयलेट के पास पहुंचे और दीदी ने मुझसे अपनी ब्रा और पैंटी वाला बैग ले लिया और टॉयलेट की तरफ चल दी
जैसे ही दीदी टॉयलेट जाने लगी मैंने दीदी से धीरे से बोला तुम अपनी पैंटी चेंज कर लेना तो साथ ही अपनी ब्रा भी चेंज कर लेना इससे तुम्हें यह पता लग जाएगा कि ब्रा ठीक साइज़ की हैं या नहीं?
दीदी मेरी बातों को सुन कर हंस पड़ीं और मुझसे बोलीं बहुत शैतान हो गए हो और स्मार्ट भी दीदी शर्मा कर टॉयलेट चली गई करीब 15 मिनट के बाद दीदी टॉयलेट से लौट कर आई हम लोग बस स्टॉप तक चल दिए हम लोगों को बस जल्दी ही मिल गई और बस में भीड़ भी बिल्कुल नहीं थी बस करीब करीब खाली थी
हमने टिकट लिया और बस के पीछे जा कर बैठ गए सीट पर बैठने के बाद मैंने दीदी से पूछा तुमने अपनी ब्रा भी चेंज कर ली ना?
दीदी मेरी तरफ देख कर हंस पड़ी मैंने फिर दीदी से पूछा बताओ ना दीदी क्या तुमने अपनी ब्रा भी चेंज कर ली है?
तब दीदी ने धीरे से बोलीं हां अमित मैंने अपनी ब्रा चेंज कर ली है मैं फिर दीदी से बोला मैं तुमसे एक रिक्वेस्ट कर सकता हूं?
दीदी ने मेरी तरफ देखा और कहा हां बोल मैं तुम्हें तुम्हारे नए पैंटी और ब्रा में देखना चाहता हूं मैंने दीदी से कहा दीदी फौरन घबरा कर बोलीं यहां?
तुम मुझे यहां मुझे ब्रा और पैंटी में देखना चाहते हो? मैंने दीदी को समझाते हुए बोला नहीं यहां नहीं मैं घर पर तुम्हें ब्रा और पैंटी में देखना चाहता हूं
दीदी फिर मुझसे बोलीं पर घर पर कैसे होगा मां घर पर होगी घर पर यह संभव नहीं है कोई समस्या नहीं है मां घर पर खाना बना रही होंगी और तुम रसोई में जाकर अपने कपड़े चेंज करोगी जैसे तुम रोज करती हो
लेकिन जब तुम कपड़े बदलो रसोई का पर्दा थोड़ा सा खुला छोड़ देना मैं हॉल में बैठ कर तुम्हें ब्रा और पैंटी में देख लूंगा दीदी मेरी बातें सुन कर बोलीं नहीं अमित फिर भी देखते हैं फिर हम लोग चुप हो गए और अपने घर पहुंच गए हमने घर पहुंच कर देखा कि मां रसोई में खाना बना रही हैं
हम लोगों ने पहले 5 मिनट तक रेस्ट किया और फिर दीदी अपनी मैक्सी उठा कर रसोई में कपड़े बदलने चली गई मैं हॉल में ही बैठा रहा रसोई में पहुंच कर दीदी ने पर्दा खींचा और पर्दा खींचते समय उसको थोड़ा सा छोड़ दिया और मेरी तरफ देख कर मुस्कुरा दी और हल्के से आंख मार दी
मैं चुपचाप अपनी जगह से उठ कर पर्दे के पास जा कर खड़ा हो गया दीदी मुझसे सिर्फ 5 फीट की दूरी पर खड़ी थीं और मां हम लोग की तरफ पीठ करके खाना बना रही थीं मां दीदी से कुछ बातें कर रही थी
दीदी मां की तरफ मुड़ कर मां से बातें करने लगी फिर दीदी ने धीरे धीरे अपनी टी-शर्ट को उठा कर अपने सर के ऊपर ले जाकर धीरे धीरे अपनी टी-शर्ट को उतार दीं टी-शर्ट के उतरते ही मुझे आज की खरीदीं हुई ब्रा दिखने लगी वाह क्या ब्रा थी
फिर दीदी ने फौरन अपने हाथों से अपनी स्कर्ट की इलास्टिक को ढीला किया और अपनी स्कर्ट भी उतार दीं अब दीदी मेरे सामने सिर्फ अपनी ब्रा और पैंटी में थी
दीदी ने क्या मस्त ब्रा और मैचिंग की पैंटी खरीदीं है मेरे पैसे तो पूरे वसूल हो गए दीदी ने एक बहुत सुंदर नेट की ब्रा खरीदी थीं और उसके साथ पैंटी में भी खूब लेस लगा हुआ था मुझे दीदी की ब्रा से दीदी की चूचियों के आधे आधे दर्शन भी हो रहे थे फिर मेरी आंखें दीदी के पेट और उनकी दिलकश नाभि पर जा टिकी
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