बहन की ब्रा और पैंटी ने उत्तेजित किया- 4

आप ने bhai behan sex story के पिछले भाग बहन की ब्रा और पैंटी ने उत्तेजित किया- 3 में पढ़ा मुझे दीदी की ब्रा से दीदी की चूचियों के आधे आधे दर्शन भी हो रहे थे फिर मेरी आंखें दीदी के पेट और उनकी दिलकश नाभि पर जा टिकी अब आप bhai behan sex story में आगे पढ़े

Real Bhai Behan Sex Story 4

दीदी की पैंटी इतनी टाइट थी कि मुझे उनके पैरों के बीच उनकी चूत की दरार साफ साफ दिख रही थी उसके साथ साथ दीदी की चूत के होंठ भी दिख रहे थे मुझे पता नहीं कि मैं कितनी देर तक अपनी दीदी को ब्रा और पैंटी में अपनी आंखें फाड़ फाड़ कर देखता रहा

मैंने दीदी को सिर्फ एक या दो मिनट ही देखा होगा लेकिन मुझे लगा कि मैं कई घंटो से दीदी को देख रहा हूं दीदी को देखते देखते मेरा लंड पैंट के अंदर खड़ा हो गया और उसमें से लार निकलने लगी मेरे पैर कामुकता से कांपने लगे सारे वक़्त दीदी मुझसे आंखें चुरा रही थी

शायद दीदी को अपने छोटे भाई के सामने ब्रा और पैंटी में खड़ी होना कुछ अटपटा सा लग रहा था जैसे ही दीदी ने मुझे देखा तो मैंने इशारे से दीदी पीछे घूम जाने के लिए इशारा किया दीदी धीरे धीरे पीछे मुड़ गई लेकिन अपना चेहरा मां की तरफ ही रखा

मैं दीदी को अब पीछे से देख रहा था दीदी की पैंटी उनके चूतड़ों में चिपकी हुई थी मैं दीदी के मस्त चूतड़ देख रहा था और मन ही मन सोच रहा था कि अगर मैं दीदी को पूरी नंगी देखूंगा तो शायद मैं अपने पैंट के अंदर ही झड़ जाऊंगा

थोड़ी देर के बाद दीदी मेरी तरफ फिर मुड़ कर खड़ी हो गई और अपनी मैक्सी उठा लीं और मुझे इशारा किया कि मैं वहां से हट जाऊं मैंने दीदी को इशारा किया कि अपनी ब्रा उतारो और मुझे नंगी चूची दिखाओ दीदी बस मुस्कुरा दीं और अपनी मैक्सी पहन लीं

मैं फिर भी इशारा करता रहा लेकिन दीदी ने मेरी बातों को नहीं माना मैं समझ गया कि अब बात नहीं बनेगी और मैं पर्दे के पास से हट कर हॉल में बिस्तर पर बैठ गया दीदी भी अपने कपड़ों को लेकर हॉल में आ गई अपने कपड़ों को अल्मारी में रखने के बाद दीदी बाथरूम चली गई

मैं समझ गया कि अब बात नहीं बनेगी और मैं पर्दे के पास से हट कर हॉल में बिस्तर पर बैठ गया दीदी भी अपने कपड़ों को लेकर हॉल में आ गई अपने कपड़ों को अल्मारी में रखने के बाद दीदी बाथरूम चली गई

मैं दीदी को सिर्फ ब्रा और पैंटी में देख कर इतना गर्मा गया था कि अब मुझको भी बाथरूम जाना था और मुठ मारना था मेरे दिमाग में आज शाम की हर घटना बार बार घूम रही थी

पहले हम लोग शॉपिंग करने मार्केट गए फिर हम लोग समुंदर के किनारे गए फिर हम लोग एक पत्थर के पीछे बैठे थे फिर मैंने दीदी की चूचियों को पकड़ कर मसला था और दीदी चूची मसलवा कर झड़ गई

फिर दीदी एक पब्लिक टॉयलेट में जाकर अपनी पैंटी और ब्रा चेंज की थी मेरे दिमाग में यह बात आई कि दीदी की उतरी हुई पैंटी अभी भी बैग में ही होगी

मैंने रसोई में झांक कर देखा कि मां अभी खाना पका रही हैं और झट से उठ कर गया और बैग में से दीदी उतरी हुई पैंटी निकाल कर अपनी जेब में रख ली मैंने जल्दी से जाकर के बाथरूम का दरवाज़ा बंद किया और अपना जीन्स का पैंट उतार दिया और साथ साथ अपना अंडरवियर भी उतार दिया

फिर मैंने दीदी की गीली पैंटी को खोला और उसे उल्टा किया मैंने देखा कि जहां पर दीदी की चूत का छेद था वहां पर सफेद सफेद गाढ़ा गाढ़ा चूत का पानी लगा हुआ है जब मैंने वो जगह छुई तो मुझे चिपचिपा सा लगा

मैंने पैंटी अपने नाक के पास ले जाकर उस जगह को सूंघा मैं धीरे धीरे अपने दूसरे हाथ को अपने लंड पर फेरने लगा दीदी की चूत से निकली पानी की महक मेरे नाक में जा रही थी और मैं पागल हुआ जा रहा था

मैं दीदी की पैंटी की चूत वाली जगह को चाटने लगा वाह दीदी की चूत के पानी का क्या स्वाद है मजा आ गया मैं दीदी की पैंटी को चाटता ही रहा और यह सोच रहा था कि मैं अपनी दीदी की चूत चाट रहा हूं

मैं यह सोचते सोचते झड़ गया मैं अपना लंड हिला हिला कर अपना लंड साफ किया और फिर पेशाब की और फिर दीदी की पैंटी और ब्रा अपने जेब में रख कर वापस हॉल में पहुंच गया

थोड़ी देर के बाद जब दीदी को अपनी भीगी पैंटी की याद आई तो वो उसको बैग में ढूंढने लगीं शायद दीदी को उसे साफ करना था दीदी को उनकी पैंटी और ब्रा बैग में नहीं मिली थोड़ी देर के बाद दीदी ने मुझे कुछ अकेला पाया तो मुझ से पूछा मुझे अपनी पुरानी पैंटी और ब्रा बैग में नहीं मिल रही है

मैंने दीदी से कुछ नहीं कहा और मुस्कुराता रहा तू हंस क्यों रहा हैं? इसमें हंसने की क्या बात है दीदी ने मुझसे पूछा मैंने दीदी से पूछा तुम्हें अपनी पुरानी पैंटी और ब्रा क्यों चाहिए? तुम्हें तो नई ब्रा और पैंटी मिल गई तब कुछ कुछ समझ कर मुझसे पूछा उनको तुमने लिया है?

मैं भी कह दिया हां मैंने लिया है वो दोनों अपने पास रखना है तुम्हारी गिफ्ट समझ कर तब दीदी बोलीं अमित वो गंदे है मैं मुस्कुरा कर दीदी से बोला मैंने उनको साफ कर लिया लेकिन दीदी ने परेशान हो कर मुझसे पूछा क्यों?

मैंने दीदी से कहा मैं बाद में दे दूंगा अब मां कमरे आ गई थीं इस लिए दीदी ने और कुछ नहीं पूछा अगली सुबह मैंने दीदी से पूछा क्या वो मेरे साथ दोपहर के शो में सिनेमा जाना चाहेंगी? दीदी ने हंसते हुए पूछा कौन दिखायेगा? मैं भी हंस के बोला मैं दीदी बोलीं मुझे क्या पता तेरे को कौन सा सिनेमा देखने जाना है

मैंने दीदी से बोला हम लोग न्यू थियेटर चलें? वो सिनेमा हॉल थोड़ा सा शहर से बाहर है ठीक है चल चलें दीदी मुझसे बोलीं असल में दीदी के साथ सिनेमा देखने का सिर्फ एक बहाना था

मेरे दिमाग में और कुछ घूम रहा था सिनेमा के बाद मैं दीदी को और कहीं ले जाना चाहता था पिछले कई दिनों से मैंने दीदी की मुसम्मियों को कई बार दबाया था और मसला था और दो तीन बार चूसा भी था

अब मुझे और कुछ चाहिए था और इसी लिए मैं दीदी को और कहीं ले जाना चाहता था मुझे दीदी को छूने का अच्छा मौका सिनेमा हॉल में मिल सकता था या फिर सिनेमा के बाद और कहीं ले जाने के बाद मिल सकता था

जब दीदी सिनेमा जाने के लिए तैयार होने लगी तो मैं धीरे से दीदी से कहा आज तुम स्कर्ट पहन कर चलो दीदी बस थोड़ा सा मुस्कुरा दीं और स्कर्ट पहनने के लिए राजी हो गई ठंड का मौसम था इस लिए मैं और दीदी ने ऊपर से जैकेट भी ले लिया था

मैंने आज यह सिनेमा हॉल जान बूझ कर चुना था क्योंकि यह हॉल शहर से थोड़ा सा बाहर था और वहां जो सिनेमा चल रहा था वो दो हफ्ते पुरानी हो गई थी

मुझे मालूम था कि हॉल में ज्यादा भीड़ भाड़ नहीं होगी हम लोग वहां पहुंच कर टिकट ले लिए और हॉल में जब घुसे तो किसी और सिनेमा का ट्रेलर चल रहा था इस लिए हॉल के अंदर अंधेरा था

जब अंदर जा कर मेरी आंखें अंधेरे में देखने में कुछ अभ्यस्त हो गई तो मैंने देखा कि हॉल में कुछ लोग ही बैठे हुए हैं और मैं एक किनारे वाली सीट पर दीदी को ले जाकर बैठ गया

हम लोग जहां बैठे थे उसके आस पास और कोई नहीं था और जो भी हॉल में बैठे थे वो सब किनारे वाली सीट पर बैठे हुए थे हम लोग भी बैठ गए सिनेमा देखने लगे मैं सिनेमा देख रहा था और दिमाग में सोच रहा था

मैं पहले दीदी की चूची को दबाऊंगा मसलूंगा और अगर दीदी मान गई तो फिर दीदी की स्कर्ट के अंदर अपना हाथ डालूंगा मैंने करीब 15 मिनट तक इंतज़ार किया और फिर अपनी सीट पर मैं आराम से पैर फैला कर बैठ गया संगीता दीदी मेरे दाहिने तरफ बैठी थी

मैं धीरे से अपना दाहिना हाथ बढ़ा कर दीदी की जांघों पर रख दिया फिर मैं धीरे धीरे दीदी की जांघों पर स्कर्ट के ऊपर से हाथ फेरने लगा दीदी कुछ नहीं बोलीं

दीदी बस चुपचाप बैठी रही और मैं उनकी जांघों पर हाथ फेरने लगा अब मैं धीरे धीरे दीदी की स्कर्ट को पैरों से ऊपर उठाने लगा जिससे कि मैं अपना हाथ स्कर्ट के अंदर डाल सकूं

दीदी ने मुझको रोका नहीं और ऊपर से मेरे कानों के पास अपनी मुंह लेकर के बोलीं कोई देख ना ले इधर उधर देख कर मैंने भी धीरे से बोला नहीं कोई नहीं देख पाएगा दीदी फिर से बोलीं स्क्रीन की लाइट काफी ज्यादा है और इसमें कोई भी हमें देख सकता है

मैंने दीदी से कहा अपना जैकेट उतार कर अपनी गोद में रख लो दीदी ने थोड़ी देर रुक कर अपनी जैकेट उतार कर अपनी गोद में रख लीं और इससे उनकी जांघ और मेरा हाथ दोनों जैकेट के अंदर छुप गया

मैं अब अपना हाथ दीदी के स्कर्ट के अंदर डाल कर के उनके पैरों और जांघों को सहलाने लगा दीदी फिर फुसफुसा कर बोलीं कोई हमें देख ना ले? मैंने दीदी को समझाते हुए कहा हमें कोई नहीं देख पाएगा आप चुपचाप बैठी रहो

मैंने अपना हाथ अब दीदी के जांघों के अंदर तक ले जाकर उनकी जांघ के अंदरूनी भाग को सहलाने लगा और धीर धीरे अपना हाथ दीदी की पैंटी की तरफ बढ़ाने लगा मेरा हाथ इतना घूम गया की दीदी की पैंटी तक नहीं पहुंच रहा था

मैंने फिर हल्के से दीदी के कानों में कहा थोड़ा नीचे खिसक कर बैठो ना दीदी ने हंसते हुए पूछा क्या तुम्हारा हाथ वहां तक नहीं पहुंच रहा है हां मैंने दबी जुबान से दीदी को बोला

दीदी धीरे से हंसते हुए बोलीं तुमको अपना हाथ कहां तक पहुंचाना है? मैं शर्माते हुए बोला तुमको मालूम तो है दीदी मेरी बातों को समझ गई और नीचे खिसक कर बैठीं मेरा हाथ शुरू से दीदी के स्कर्ट के अंदर ही घुसा हुआ था और जैसे ही दीदी नीचे खिसकी मेरा हाथ जा कर अपने आप दीदी की पैंटी से लग गया

फिर मैं अपने हाथ को उठा कर पैंटी के ऊपर से दीदी की चूत पर रखा और जोर से दीदी की चूत को छू लिया यह पहलीं बार था कि अपने दीदी की चूत को छू रहा था

दीदी की चूत बहुत गर्म थीं मैं अपनी उंगली को दीदी की चूत के छेद के ऊपर चलाने लगा थोड़ी देर के बाद दीदी फुसफुसा कर बोलीं रुक जाओ नहीं तो फिर से मेरी पैंटी गीलीं हो जायेगी लेकिन मैंने दीदी की बात को अनसुनी कर दी और दीदी की चूत के छेद को पैंटी के ऊपर से सहलाता रहा था

दीदी फिर से बोलीं प्लीज़ अब मत करो नहीं तो मेरी पैंटी और स्कर्ट दोनों गंदी हो जायेगीं मैं समझ गया कि दीदी बहुत गर्मा हो गई है

लेकिन मैं यह भी नहीं चाहता था कि जब हम लोग सिनेमा से निकलें तो लोगों को दीदी गंदी स्कर्ट दिखे इस लिए मैं रुक गया मैंने अपना हाथ चूत पर से हटा कर दीदी की जांघों को सहलाने लगा थोड़ी देर के बाद इंटरवल हो गया

इंटरवल होते ही मैं और दीदी अलग अलग बैठ गए और मैं उठ कर पॉपकॉर्न और पेप्सी ले आया मैंने दीदी से धीरे से कहा तुम टॉयलेट जाकर अपनी पैंटी निकाल कर नंगी होकर आ जाओ दीदी ने आंखें फाड़ कर मुझसे पूछा मैं अपनी पैंटी क्यों निकलूं?

मैं हंस कर बोला निकाल लेने से पैंटी गीलीं नहीं होगी दीदी ने तपाक से पूछा और स्कर्ट का क्या करें? क्या उसे भी उतार कर आऊं?

सिंपल सी बात है जब टॉयलेट से लौट कर आओगी तो बैठने से पहले अपनी स्कर्ट उठा कर बैठ जाना मैंने दीदी को आंख मारते हुए बोला दीदी मुस्कुरा कर बोलीं तुम बहुत शैतान हो और तुम्हारे पास हर बात का जवाब है

जैसा मैंने कहा था दीदी टॉयलेट में गई और थोड़ी देर के बाद लौट आई जब मैं दीदी को देख कर मुस्कुराया तो दीदी शर्मा गई और अपनी गर्दन झुका ली

हम लोग फिर से हॉल में चले गए जब बैठने लगीं तो अपनी स्कर्ट ऊपर उठा लीं लेकिन पूरी नहीं हम लोगों के जैकेट अपने अपने गोद में थीं और हम लोग पॉपकॉर्न खाना शुरू किया थोड़ी देर के बाद हम लोगों ने पॉपकॉर्न खत्म किए और फिर पेप्सी भी खत्म कर लिया

फिर हम लोग अपनी अपनी सीट पर नीचे हो कर पैर फैला कर आराम से बैठ गए थोड़ी देर के बाद मैंने अपना हाथ बढ़ा कर दीदी की गोद पर रखी हुई जैकेट के नीचे से ले जाकर के दीदी की जांघों पर रख दिया मेरे हाथों को दीदी की जांघों से छूते ही दीदी ने अपने जांघों को और फैला दिया

फिर दीदी ने अपने चूतड़ थोड़ा ऊपर उठा करके अपने नीचे से अपनी स्कर्ट को खींच करके निकाल दिया और फिर से बैठ गई अब दीदी हॉल के सीट पर अपनी नंगी चूतड़ों के सहारे बैठी थी सीट की रेग्जीन से दीदी को कुछ ठंड लगीं पर वो आराम से सीट पर नीचे होकर के बैठ गई

मैं फिर से अपने हाथ को दीदी की स्कर्ट के अंदर डाल दिया मैं सीधे दीदी की चूत पर अपना हाथ ले गया जैसे ही मैं दीदी की नंगी चूत को छुआ दीदी झुक गई जैसे कि वो मुझे रोक रही हो मुझे दीदी की नंगी चूत में हाथ फेरना बहुत अच्छा लग रहा था मुझे चूत पर हाथ फेरते फेरते चूत के ऊपरी भाग पर कुछ बाल का होना महसूस हुआ

मैं दीदी की नंगी चूत और उसके बालों को धीरे धीरे सहलाने लगा मैं दीदी की चूत को कभी अपने हाथ में पकड़ कर कस कर दबा रहा था कभी अपने हाथ उसके ऊपर रगड़ रहा था और कभी कभी उनकी क्लिंट को भी अपने उंगलियों से रगड़ रहा था

मैं जब दीदी की क्लिंट को छेड़ रहा था तब दीदी का शरीर कांप सा जाता था उनको एक झुरझुरी सी होती थी मैंने अपनी एक उंगली दीदी की चूत के छेद में घुसेड़ दी ओह भगवान चूत अंदर से बहुत गर्म थीं और मुलायम भी थी चूत अंदर से पूरी रस से भरी हुई थी

मैं अपनी उंगली को धीरे धीरे चूत के अंदर और बाहर करने लगा थोड़ी देर के बाद मैंने अपनी दूसरी उंगली भी चूत में डाल दी ये तो और भी आसानी से चूत में समा गई मैंने दोनों उंगलियों से दीदी चूत को चोदना शुरू किया

दीदी की तेज सांसों की आवाज मझे साफ साफ सुनाई दे रही थीं थोड़ी देर के बाद दीदी का शरीर अकड़ गया कुछ ही देर के बाद दीदी शांत हो कर सीट पर बैठ गई अब दीदी की चूत में से ढेर सारा पानी निकलने लगा चूत की पानी से मेरा पूरा हाथ गीला हो गया

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