धोबी मां बेटा- 6

आप ने maa beta sex story के पिछले भाग धोबी मां बेटा- 5 में पढ़ा मैंने अपने हाथो को मां की जांघों पर रखा और थोडा नीचे झुक कर ठीक चूत के पास अपने चेहरे को ले जा के देखने लगा मां ने अपने दोनों हाथ को मेरे सिर पर रख दिया और मेरे बालो से खेलने लगी अब आप maa beta sex story में आगे पढ़े

Dhobi Maa Beta Sex Story 6

फिर बोली रुक जा ऐसे नहीं दिखेगा तुझे आराम से बिस्तर पर लेट के दिखाती हूं ठीक है आ जाओ बिस्तर पर मां एक बार जरा पीछे घुमो ना

ओह मेरा राजा मेरा पिछवाडा भी देखना चाहता है क्या चल गांड तो मैं तुझे खड़े खड़े ही दिखा देती हूं ले देख अपनी मां की चूत और गांड को इतना कह कर वो पीछे घूम गई

ओह कितना सुंदर दृश्य था वो इसे मैं अपनी पूरी जिंदगी में कभी नहीं भूल सकता उस के चूत सच में बड़े खुबसूरत थे एकदम मलाई जैसे गोल मटोल गुदज मांसल और उस चूत के बीच में एक गहरी लकीर सी बन रही थी जो कि उसके गांड की खाई थी

मैंने उसे को थोडा झुकने को कहा तो वो झुक गई और मै आराम से दोनों मक्खन जैसे चूतड़ों को पकड़ के अपने हाथो से मसलते हुए उनके बीच की खाई को देखने लगा

दोनों चूतड़ों को बीच में गांड की भूरे रंग की छेद फुकफुका रही थी एकदम छोटी सी गोल छेद मैंने हल्के से अपने हाथ को उस छेद पर रख दिया और हल्के हल्के उसे सहलाने लगा साथ में मैं चूतड़ों को भी मसल रहा था पर तभी मां आगे घूम गई

चल मैं खड़े खड़े थक गई अब जो करना है बिस्तर पर करेंगे और वो बिस्तर पर चढ़ गई पलंग की पुष्ट से अपने सिर को टिका कर उसने अपने दोनों पैरो को मेरे सामने खोल कर फैला दिया और बोली अब देख ले आराम से पर एक बात तो बता तू देखने के बाद क्या करेगा कुछ मालूम भी है तुझे या नहीं

हां मां तुझे चोदूंगा

अच्छा चोदेगा? पर कैसे जरा बता तो सही कैसे चोदेगा

मैं पहले तुम्हारी चूत चुसना चाहता हूं

चल ठीक है चूस लेना और क्या करेगा

ओह और पता नहीं पता नहीं ये क्या जवाब हुआ पता नहीं जब कुछ पता नहीं तो मां पर डोरे क्यों डाल रहा था?

ओह मां मैंने पहले किसी को किया नहीं है ना इसलिए मुझे पता नहीं है मुझे बस थोडा बहुत पता है जो कि मैंने गांव के लड़कों के साथ सीखा था

तो गांव के छोकरों ने ये नहीं सिखाया कि कैसे किया जाता है खाली यही सिखाया कि मां पर डोरे डालो ओह मां तू तो समझती ही नहीं अरे वो लोग मुझे क्यों सिखाने लगे कि तुम पर डोरे डालो वो तो वो तो तुम मुझे बहुत सुंदर लगती हो इसलिए मैं तुम्हे देखता था

ठीक है चल तेरी बात समझ गई बेटा कि मैं तुझे सुंदर लगती हूं पर मेरी इस सुंदरता का तू फायदा कैसे उठाएगा उल्लू ये भी तो बता दे ना कि खाली देख के मुठ मार लेगा

मां नहीं मैं तुम्हे चोदना चाहता हूं मां तुम सीखा देना सीखा दोगी ना? कह कर मैंने बुरा सा मुंह बना लिया हां मेरा बेटा देख तो मां की लेने के लिए कैसे तड़प रहा आजा मेरे प्यारे मैं तुझे सब सीखा दूंगी तेरे जैसे लंड वाले बेटे को तो कोई भी मां सीखना चाहेगी

तुझे तो मैं सीखा पढ़ा के चुदाई का बादशाह बना दूंगी आजा पहले अपनी मां के मम्मों से खेल ले जी भर के फिर तुझे चूत से खेलना सिखाती हूं बेटा मैं मां के कमर के पास बैठ गया और मां तो पूरी नंगी पहले से ही थी मैंने उसके मम्मों पर अपना हाथ रख दिया और उनको धीरे धीरे सहलाने लगा

मेरे हाथ में शायद दुनिया के सबसे खूबसूरत मम्में थे ऐसे मम्में जिनको देख के किसी का भी दिल मचल जाए मैं दोनों मम्मों की पूरी गोलाई पर हाथ फेर रहा था मम्में मेरी हथेली में नहीं समा रहे थे मुझे ऐसा लग रहा था जैसे मैं जन्नत में घूम रहा हूं मां के मम्मों का स्पर्श गजब का था

मुलायम गुदज और सख्त गठीलापन ये सब अहसास शायद अच्छी गोल मटोल मम्मों को दबा के ही पाया जा सकता है मुझे इन सारी चीजों का एक साथ आनंद मिल रहा था ऐसे मम्में दबाने का सौभाग्य नसीब वालो को ही मिलता है इस बात का पता मुझे अपने जीवन में बहुत बाद में चला जब मैंने दूसरे अनेक तरह के मम्मों का स्वाद लिया

मां के मुंह से हल्की हल्की आवाज़े आनी शुरू हो गई थी और उसने मेरे चेहरे को अपने पास खीच लिया और अपने तपते हुए गुलाबी होंठो का पहला अनूठा स्पर्श मेरे होंठो को दिया हम दोनों के होंठ एक दूसरे से मिल गये और मैं मां के दोनों मम्मों को पकड़े हुए उसके होंठो का रस ले रहा था कुछ ही सेकंड में हमारे जीभ आपस में टकरा रहे थे

मेरे जीवन का ये पहला चुंबन करीब दो तीन मिनट तक चला होगा मां के पतले होंठो को अपने मुंह में भर कर मैंने चूस चूस कर और लाल कर दिया जब हम दोनों एक दूसरे से अलग हुए तो दोनों हांफ रहे थे मेरे हाथ अब भी उसके दोनों मम्मों पर थे और मैं अब उनको जोर जोर से मसल रहा था मां के मुंह से अब और ज्यादा तेज सिसकारियां निकलने लगी थी

मां ने सिसकते हुए मुझसे कहा ओह्ह्ह ओह्ह्ह स्स्सि शाबाश ऐसे ही प्यार करो मेरे मम्मों से हल्के हल्के आराम से मसलो बेटा ज्यादा जोर से नहीं नहीं तो तेरी मां को मज़ा नहीं आएगा धीरे धीरे मसलो मेरे हाथ अब मां के मम्मों के निपल से खेल रहे थे उसके निपल अब एकदम सख्त हो चुके थे

हल्का कालापन लिए हुए गुलाबी रंग के निपल कड़े होने के बाद ऐसे लग रहे थे जैसे दो गोरे गुलाबी पहाड़ियों पर बादाम की गिरी रख दी गई हो निपल के चारो ओर उसी रंग का घेरा थे ध्यान से देखने पर मैंने पाया कि उस घेरे पर छोटे छोटे दाने से उगे हुए थे मैं निपलो को अपनी दो उंगलियों के बीच में लेकर धीरे धीरे मसल रहा था और प्यार से उनको खींच रहा था

जब भी मैं ऐसा करता तो मां की सिसकियां और तेज हो जाती थी मां की आंखें एकदम नशीली हो चुकी थी और वो सिसकारी लेते हुए बड़बड़ाने लगी ओह बेटा ऐसे ही ऐसे ही तुझे तो सीखने की भी जरूरत नहीं है रे ओह क्या खूब मसल रहा है मेरे प्यारे ऐसे ही कितने दिन हो गये जब इन मम्मों को किसी मर्द के हाथ ने मसला है या प्यार किया है कैसे तरसती थी

मैं कि काश कोई मेरे इन मम्मों को मसल दे प्यार से सहला दे पर आखिर में अपना बेटा ही काम आया आजा मेरे लाल कहते हुए उसने मेरे सिर को पकड़ कर अपने मम्मों पर झुका लिया मैं मां का इशारा समझ गया और मैंने अपने होंठ मां के मम्मों से भर लिए मेरे एक हाथ में उसका एक मम्मां और दूसरे मम्में पर मेरे होंठ चिपके हुए थे

मैंने धीरे धीरे उसके मम्मों को चूसना शुरू कर दिया था मैं ज्यादा से ज्यादा मम्मों को अपने मुंह में भर के चूस रहा था मेरे अंदर का खून इतना उबाल मरने लगा था कि एक दो बार मैंने अपने दांत भी मम्मों पर गड़ा दिए थे जिस से मां के मुंह से अचानक से चीख निकल गई थी

पर फिर भी उसने मुझे रोका नहीं वो अपने हाथो को मेरे सिर के पीछे ले जा कर मुझे बालो से पकड़ के मेरे सिर को अपने मम्मों पर और जोर जोर से दबा रही थी और दांत काटने पर एकदम से घुटि घुटि आवाज़ में चीखते हुए बोली ओह धीरे बेटा धीरे से चूसो मम्मों को ऐसे जोर से नहीं काटते है

फिर उसने अपने मम्में को अपने हाथ से पकड़ा और उसको मेरे मुंह में घुसाने लगी ऐसा लग रहा था जैसे वो अपने मम्में को पूरा का पूरा मेरे मुंह में घुसा देना चाहती हो और कहा ओह राजा मेरे निपल को चूसो जरा पूरे निपल को मुंह में भर लो और कस कस के चूसो राजा जैसे बचपन में दूध पीने के लिए चूस्ते थे

मैंने अब अपना ध्यान निपल पे कर दिया और निपल को मुंह में भर कर अपनी जीभ उसके चारो तरफ गोल गोल घूमते हुए चूसने लगा मैं अपनी जीभ को निपल के चारो तरफ के घेरे पर भी फिरा रहा था निपल के चारो तरफ के घेरे पर उगे हुए दानो को अपनी जीभ से कुरेदते हुए निपल को चूसने पर मां एकदम मस्त हो जा रही थी और उसके मुंह से निकलने वाली सिसकिया इसकी गवाही दे रही थी

मैं उसकी चीखे और सिसकिया सुन कर पहले पहल तो डर गया था पर मां के द्वारा ये समझाए जाने पर की ऐसी चीखे और सिसकिया इस बात को बतला रही है कि उसे मज़ा आ रहा है तो फिर दुगुने जोश के साथ अपने काम में जुट गया था जिस मम्में को मैं चूस रहा था वो अब पूरी तरह से मेरे लार और थूक से भीग चुकी थी और लाल हो चुकी फिर भी मैं उसे चूसे जा रहा था

तभी मां ने मेरे सिर को अपने उस मम्में से हटा के अपनी दूसरे मम्में की तरफ करते हुए कहा खाली इसी मम्में को चूस्ता रहेगा दूसरे को भी चूस उसमे भी वही स्वाद है फिर अपनी दूसरे मम्में को मेरे मुंह में घुसाते हुए बोली इसको भी चूस चूस के लाल कर दे मेरे लाल दूध निकल दे मेरे सैय्या एकदम आम के जैसे चूस और सारा रस निकाल दे अपनी मां के मम्मों का

किसी काम की नहीं है ये कम से कम मेरे लाल के काम तो आएंगी मैं फिर से अपने काम में जुट गया और पहले वाले मम्में को दबाते हुए दूसरे को पूरे मज़े से चूसने लगा मां सिसकिया ले रही थी और चुसवा रही थी कभी कभी अपना हाथ मेरे कमर के पास ले जा के मेरे लोहे जैसे तने हुए लंड को पकड़ के मरोड़ रही थी

कभी अपने हाथो से मेरे सिर को अपने मम्मों पर दबा रही थी इस तरह काफ़ी देर तक मैं उसके मम्मों को चूसता रहा फिर मां ने खुद अपने हाथो से मेरा सिर पकड़ के अपने मम्मों पर से हटाया और मुस्कुराते मेरे चेहरे की ओर देखने लगी मां का बायां मम्मां अभी भी मेरे लार से चमक रहा था जबकि दायें मम्में पर लगा थूक सुख चुका था

पर उसके दोनों मम्में लाल हो चुके थे और निपलो का रंग हल्का काला से पूरा काला हो चुका था ऐसा बहुत ज्यादा चूसने पर खून का दौरा भर जाने के कारण हुआ था मां ने मेरे चेहरे को अपने होंठो के पास खीच कर मेरे होंठो पर एक गहरा चुंबन लिया

मां अपनी कातिल मुस्कुराहट फेकते हुए मेरे कान के पास धीरे से बोली खाली दूध ही पियेगा या मालपुआ भी खायेगा देख तेरा मालपुआ तेरा इंतेज़ार कर रहा है राजा

मैंने भी मां के होंठो का चुंबन लिया और फिर उसके भरे भरे गालो को अपने मुंह में भर कर चूसने लगा और फिर उसके नाक को चूमा और फिर धीरे से बोला ओह मां तुम सच में बहुत सुंदर हो

इस पर मां ने पुछा- क्यों मज़ा आया ना चूसने में

हां मां गजब का मज़ा आया मुझे आज तक ऐसा मज़ा कभी नहीं आया था

तब मां ने अपने पैरो के बीच इशारा करते हुए कहा नीचे और भी मज़ा आएगा यहां तो केवल तिजोरी का दरवाजा था असली खजाना तो नीचे है आजा बेटे आज तुझे असली मालपुआ खिलती हूं

मैं धीरे से खिसक कर मां के पैरो पास आ गया मां ने अपने पैरो को घुटने के पास से मोड़ कर फैला दिया और बोली यहां बीच में दोनों पैर के बीच में आ के बैठ तब ठीक से देख पाएगा अपनी मां का खजाना

मैं उठ कर मां के दोनों पैरो के बीच घुटनो के बल बैठ गया और आगे की ओर झुका सामने मेरे वो चीज़ थी जिसको देखने के लिए मैं मरा जा रहा था मां ने अपनी दोनों जांघें फैला दी और अपने हाथो को अपने चूत के उपर रख कर बोली ले देख ले अपना मालपुआ अब आज के बाद से तुझे यही मालपुआ खाने को मिलेगा

मेरी खुशी का तो ठिकाना नहीं था सामने मां की खुली जांघों के बीच झांटों का एक तिकोना सा बना हुआ था इस तिकोने झांटों के जंगल के बीच में से मां की फूली हुए गुलाबी चूत का चीर झांक रहा था जैसे बादलों के झुरमुट में से चाँद झांकता है मैंने अपने हाथो को मां के चिकने जांघों पर रख दिया और थोड़ा सा झुक गया

उसके चूत के बाल बहुत बड़े बड़े नहीं थे छोटे छोटे घुंघराले बाल और उनके बीच एक गहरी लकीर से चीरी हुई थी मैंने अपने दाहिने हाथ को जाँघ पर से उठा कर हकलाते हुए पुछा मां मैं इसे छू लूं? छू ले तेरे छूने के लिए ही तो खोल के बैठी हूं

मैंने अपने हाथो को मां की चूत को उपर रख दिया झांट के बाल एकदम रेशम जैसे मुलायम लग रहे थे और ऐसा लग रहा थे हालांकि आम तौर पर झांट के बाल मोटे होते है और उसके झांट के बाल भी मोटे ही थे पर मुलायम भी थे हल्के हल्के मैं उन बालो पर हाथ फिरते हुए उनको एक तरफ करने की कोशिश कर रहा था

अब चूत की दरार और उसकी मोटी मोटी फांके स्पष्ट रूप से दिख रही थी मां का चूत एक फूला हुआ और गद्देदार पावरोटी की तरह लगता था चूत की मोटी मोटी फांके बहुत आकर्षक लग रही थी मेरे से रहा नहीं गया और मैं बोल पड़ा ओह मां ये तो सचमुच में मालपुए के जैसा फूला हुआ है

हां बेटा यही तो तेरा असली मालपुआ है आज के बाद जब भी मालपुआ खाने का मन करे यही खाना हां मां मैं तो हमेशा यही मालपुआ खाउंगा ओह मां देखो ना इस से तो रस भी निकल रहा है चूत से रिस्ते हुए पानी को देख कर मैंने कहा

बेटा यही तो असली माल है हम औरतो का ये रस मैं तुझे अपनी चूत की थाली में सज़ा कर खिलाउंगी दोनों फांक को खोल के देख कैसा दिखता है हाथ से दोनों फांक पकड़ कर खीच कर चूत को चीर कर देख सच बताता हूं दोनों फांको को चिर कर मैंने जब चूत के गुलाबी रस से भीगे छेद को देखा तो मुझे यही लगा कि मेरा तो जनम सफल हो गया है

चूत के अंदर का भाग एकदम गुलाबी था और रस से भीगा हुआ था जब मैंने उस चीर को छुआ तो मेरे हाथो में चिपचिपा सा रस लग गया मैंने उस रस को वही बिस्तर के चादर पर पोछ दिया और अपने सिर को आगे बढ़ा कर मां की चूत को चूम लिया

मां ने इस पर मेरे सिर को अपनी चूत पर दबाते हुए हल्के से सिसकते हुए कहा बिस्तर पर क्यों पोछ दिया उल्लू यही मां का असली प्यार है जो कि तेरे लंड को देख के चूत के रास्ते छलक कर बाहर आ रहा है इसको चख के देख चूस ले इसको

बाकी कहानी maa beta sex story के अगले भाग धोबी मां बेटा- 7 में पढ़े